​वर्दी पर शराबबंदी की आंच: समस्तीपुर में डायल 112 के दारोगा गश्ती के दौरान शराब पीने के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित

समस्तीपुर, 26 मई 2026। बिहार सरकार की सर्वोपरि नीति यानी पूर्ण शराबबंदी कानून की शुचिता और कड़ाई को धता बताने वाले कतिपय रक्षक ही जब भक्षक के विन्यास में प्रविष्ट होने लगें, तो प्रशासनिक तंत्र का सख्त होना विधिक रूप से अनिवार्य संधारित हो जाता है। समस्तीपुर जिले के भीतरी पुलिसिया प्रशासनिक अमले में उस समय भारी सांगठनिक हड़कंप लाउड मोड पर दर्ज किया गया, जब विधि व्यवस्था और आपातकालीन सहायता प्रणाली के मुख्य स्तंभ यानी डायल 112 (Dial 112) सेवा में मुस्तैद एक पुलिस अवर निरीक्षक (सब-इंस्पेक्टर) को सरेआम शराब का सेवन करने और नशे की हालत में गश्ती प्रक्रम संचालित करने के गंभीर विसंगतिपूर्ण मामले में रंगे हाथों विधिक रूप से दोषी पाया गया।

​समस्तीपुर के पुलिस अधीक्षक (SP) अरबिंद प्रताप सिंह ने मामले की संवेदनशीलता, तकनीकी साक्ष्यों और फॉरेंसिक रिपोर्टों के विन्यासों को संज्ञान में लेते हुए त्वरित दंडात्मक एक्शन लिया है। एसपी अरबिंद प्रताप सिंह के कड़े विनिर्देश पर मुसलीघरारी थाना के अंतर्गत डायल 112 सेवा के कमान केंद्र में पदस्थापित पुलिस अवर निरीक्षक विनोद कुमार सिंह को तत्काल प्रभाव से विधिक रूप से निलंबित (Suspend) कर दिया गया है।

​इस प्रखर निलंबन आदेश के पटल पर लाइव होते ही जिले के तमाम थानों, पुलिस चौकियों और गश्ती दलों के भीतरी गलियारों में अनुशासनहीनता और कर्तव्यहीनता के विरुद्ध एक बहुत बड़ा और कड़ा सांगठनिक संदेश संचरित संधारित परिलक्षित हो रहा है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था गश्ती के दौरान नशे का विन्यास: 23 मई का पूरा घटनाक्रम

​इस अत्यंत शर्मनाक और विभागीय साख को मलबे में तब्दील करने वाले प्रकरण के धरातलीय लेआउट की स्क्रूटनी करने पर यह प्रामाणिक तथ्य सामने आता है कि इसकी पटकथा मचलते कतिपय दिनों पूर्व ही सोशल मीडिया के डिजिटल पटल पर लॉक हो चुकी थी। विलेखों के अनुसार, विगत 23 मई 2026 के टाइम-स्टैम्प के भीतर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स—फेसबुक, व्हाट्सएप और एक्स (पूर्व में ट्विटर)—पर एक वीडियो क्लिप प्रखरता के साथ लाइव होकर वायरल मोड पर संचरण करने लगा था।

​इस वायरल वीडियो के भीतरी विजुअल प्रक्षेप में यह स्पष्ट तौर पर परिलक्षित हो रहा था कि मुसरीघरारी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मुख्य कंक्रीट मार्गों और हॉट-स्पॉट्स पर आपातकालीन रेस्क्यू वाहन यानी डायल 112 की गाड़ी संख्या के समीप खड़े होकर पुलिस अवर निरीक्षक विनोद कुमार सिंह पूरी तरह से नशे के चक्रव्यूह में संधारित थे।

​वीडियो के भीतर स्थानीय मुसाफिरों और कनिष्ठ नागरिकों द्वारा दारोगा की शारीरिक चेष्टाओं, लड़खड़ाती जुबान और अमर्यादित आचरण का पूरा डिजिटल डेटा डंप कैमरे के विन्यास में सील कर लिया गया था। कानून लागू करने वाली सबसे प्रखर आपातकालीन इकाई का एक जिम्मेदार कप्तान जब ऑन-ड्यूटी गश्ती के समय बिहार के कड़े मद्य निषेध नियमों का मखौल उड़ाता लाइव दिखा, तो नेटिजन्स (इंटरनेट उपभोक्ताओं) के भीतर तीखा सांगठनिक आक्रोश भड़क उठा।

​वीडियो के वायरल होते ही पुलिस मुख्यालय पटना के मुख्य डैशबोर्ड से लेकर समस्तीपुर जिला समाहरणालय के कमान केंद्र तक सिग्नल्स लाउड हो गए, जिसके बाद पुलिस महकमे के आला अधिकारियों की विभागीय केस डायरी को म्यूट रखना पूरी तरह से असंभव संधारित हो गया।

प्रभारी सदर डीएसपी की फॉरेंसिक और प्रशासनिक जांच में प्रमाणित हुए मद्यपान के विलेख

​डिजिटल पटल पर इस सनसनीखेज वीडियो के फ्लैश होते ही समस्तीपुर के पुलिस कप्तान अरबिंद प्रताप सिंह ने मामले की संवेदनशीलता को सर्वोच्च प्राथमिकता के ग्रिड पर लॉक कर दिया। उन्होंने बिना किसी लिपिकीय ढिलाई या समय अवसाद के, पूरे प्रकरण की धरातलीय सच्चाई को क्रैक करने का कड़ा विनिर्देश तय किया। एसपी के विनिर्देश पर प्रभारी सदर पुलिस उपाधीक्षक (Sadar DSP) को इस अति-संवेदनशील मामले का मुख्य जांच अधिकारी नियुक्त करते हुए चौबीसों घंटे के भीतर एक विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) तलब की गई।

​प्रभारी सदर डीएसपी के नेतृत्व में गठित विशेष जासूसी विंग ने त्वरित रिस्पॉन्स दिखाते हुए मुसरीघरारी थाने के सनहा (स्टेशन डायरी), उस नियत तिथि के जीपीएस (GPS) लोकेशंस और वायरल वीडियो के फॉरेंसिक फ्रेमों की बारीक स्क्रूटनी मुकम्मल की। इसके साथ ही, घटना के समय मौके पर संचरण कर रहे कतिपय स्वतंत्र चश्मदीद मुसाफिरों और कनिष्ठ गृह रक्षकों (होमगार्ड्स) के गोपनीय फर्दबयान भी रिकॉर्ड किए गए।

​जांच अधिकारी की इस सघन और फॉरेंसिक स्क्रूटनी के दौरान यह बात शत-प्रतिशत प्रामाणिक और सत्य विनिर्मित होकर डायरी का हिस्सा बनी कि आरोपी पुलिस अवर निरीक्षक विनोद कुमार सिंह ने न केवल कानून की शुचिता को ब्लॉक किया था, बल्कि कर्तव्य अवधि के दौरान उनके शरीर के भीतर अल्कोहल (शराब) का संचरण लाइव मोड पर संधारित था। जांच रिपोर्ट के इन कड़े विन्यासों को जैसे ही समस्तीपुर एसपी के मुख्य कमान डेस्क पर हस्तांतरित किया गया, दारोगा के विधिक बचाव के तमाम विलोपक पूरी कड़ाई से म्यूट हो गए।

एसपी अरबिंद प्रताप सिंह का हंटर लाइव: तत्काल प्रभाव से निलंबन संचिका लॉक

​प्रभारी सदर डीएसपी द्वारा सुपुर्द की गई आधिकारिक जांच संचिका के निष्कर्षों में दारोगा विनोद कुमार सिंह पर लगे तमाम आरोपों के अकाट्य रूप से प्रमाणित पाए जाने के उपरांत, समस्तीपुर के आरक्षी अधीक्षक अरबिंद प्रताप सिंह ने अनुशासन का हंटर लाइव करने का विधिक आदेश निर्गत कर दिया। आदेश विलेख के अनुसार, पुलिस अवर निरीक्षक विनोद कुमार सिंह को बिहार राज्य में पूर्ण रूप से सक्रिय और प्रभावी ‘बिहार मद्य निषेध एवं उत्पाद अधिनियम’ (Prohibition Law) की कड़क धाराओं के घोर उल्लंघन, लोक सेवक की गरिमा को धूमिल करने और घोर विभागीय कदाचार का दोषी विनिर्मित मानते हुए तत्काल प्रभाव से विधिक रूप से निलंबित कर दिया गया है।

समस्तीपुर आरक्षी अधीक्षक अरबिंद प्रताप सिंह का आधिकारिक प्रशासनिक विनिर्देश:

​”बिहार पुलिस बल का प्रत्येक सदस्य कानून व्यवस्था संधारित रखने और राज्य सरकार की मद्य निषेध नीतियों का धरातल पर अक्षरशः अनुपालन मुकम्मल कराने के वास्ते विधिक रूप से प्रतिबद्ध संधारित है। यदि वर्दी की हनक का दुरुपयोग कर कोई भी कनिष्ठ या वरिष्ठ अधिकारी नशे के कारोबार या उसके उपभोग के भीतरी प्रक्षेपों में आंशिक रूप से भी संधारित पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध बिना किसी लिपिकीय रियायत के सीधे कठोरतम दंडात्मक संचिकाएं खोली जाएंगी। विनोद कुमार सिंह का कृत्य अत्यंत निंदनीय और अक्षम्य है।”

 

​निलंबन की इस कड़क समयावधि के दौरान दारोगा विनोद कुमार सिंह की वर्तमान कप्तानी को मुसरीघरारी थाने से शत-प्रतिशत ब्लॉक कर दिया गया है, और उनका नया विधिक मुख्यालय जिला पुलिस लाइन के मुख्य रिजर्व केंद्र संभाग के भीतरी केबिन में नियत कर लॉक कर दिया गया है। इस दौरान उन्हें अपनी विधिक उपस्थिति दैनिक रूप से दर्ज करानी होगी और वे बिना सक्षम प्रशासनिक अनुमति के समस्तीपुर जिला प्रक्षेत्र की सीमाओं से बाहर डाइवर्ट (प्रस्थान) नहीं हो सकेंगे।

डायल 112 आपातकालीन सेवा की साख पर लगा बड़ा बट्टा और अग्रिम विभागीय कार्यवाही

​भौगोलिक और प्रशासनिक लेआउट के अनुसार, बिहार पुलिस की ‘डायल 112’ (ERSS) प्रणाली आम नागरिकों, पीड़ित महिलाओं और संकट में फंसे मुसाफिरों को न्यूनतम रिस्पॉन्स टाइम के भीतर त्वरित और अभेद्य सुरक्षा कवच हस्तगत कराने वाली एक अत्यंत प्रतिष्ठित और संवेदनशील विंग संधारित की जाती है। इस प्रकार की हाई-टेक और सायरन मोड पर लाइव रहने वाली आपातकालीन गाड़ियों के भीतर तैनात कप्तानों का आचरण समाज के भीतरी नेटवर्कों में पुलिसिया इकबाल का विजुअल प्रमाण विनिर्मित करता है। ऐसे में, इस विंग के एक दारोगा का नशे की हालत में गश्ती करना पूरी प्रणाली की विश्वसनीयता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लाइव कर गया है।

​समस्तीपुर जिला पुलिस प्रशासन ने इस विधिक मामले को केवल साधारण निलंबन तक म्यूट रखने से पूरी कड़ाई से इनकार किया है। एसपी कार्यालय के तकनीकी सेल से प्राप्त इनपुट्स के अनुसार, निलंबित पुलिस अवर निरीक्षक विनोद कुमार सिंह के विरुद्ध बहुत जल्द एक कड़क विभागीय कार्यवाही (Departmental Proceedings) का लेआउट लाइन-अप किया जा रहा है।

​इसके साथ ही, मद्य निषेध विभाग के कड़े प्रावधानों के आलोक में उनके विरुद्ध विधिक रूप से आपराधिक केस डायरी (FIR) दर्ज कर कानूनी चक्रव्यूह को और अधिक अभेद्य बनाया जा सकता है, ताकि स्पीडी ट्रायल के विन्यास के तहत सेवा से बर्खास्तगी जैसी कड़क दंडात्मक सांख्यिकी को भी भविष्य में लॉक किया जा सके। समस्तीपुर के प्रबुद्ध नागरिकों और सामाजिक संगठनों के कप्तानों ने एसपी अरबिंद प्रताप सिंह के इस त्वरित और संतुलित एक्शन का व्यापक स्वागत किया है, जिससे आम जनता के भीतर कानून की शुचिता और मद्य निषेध नीतियों के प्रति अटूट विश्वास का संचरण दोबारा लाइव मोड पर सुचारू हो सका है।

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