
वीरांगनाओं को सशक्त बनाने की पहल, 20 को मिली स्वचालित सिलाई मशीन
पटना, 2 अगस्त 2025: राज्य के शहीद सैनिकों की विधवाओं और पूर्व सैनिकों के आश्रितों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बिहार सरकार ने एक सराहनीय कदम उठाया है। गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने शुक्रवार को घोषणा की कि राज्य में जल्द ही सैनिक कल्याण निगम की स्थापना की जाएगी, जिससे पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए योजनाएं और भी व्यापक एवं प्रभावी होंगी।
वीरांगनाओं को मिली स्वचालित सिलाई मशीन और प्रमाण पत्र
पटना स्थित अल्बर्ट एक्का भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में सैनिक कल्याण निदेशालय द्वारा पहली बार आयोजित दस दिवसीय सिलाई प्रशिक्षण शिविर के समापन पर 20 वीरांगनाओं को स्वचालित सिलाई मशीन और प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र वितरित किए गए।
यह कार्यक्रम सैनिक कल्याण निदेशालय, भारतीय स्टेट बैंक और सामाजिक संस्था नव अस्तित्व के संयुक्त प्रयास से आयोजित किया गया था।
सैनिकों के बलिदान को मिले आर्थिक सहारा
अपने संबोधन में अपर मुख्य सचिव चौधरी ने कहा:
“सिलाई की यह कला वीरांगनाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाएगी। वे चाहें तो सामूहिक रूप से सिलाई केंद्र खोलकर आत्मनिर्भर बन सकती हैं।”
“मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मार्गदर्शन में अगले दो माह के भीतर सैनिक कल्याण निगम की स्थापना कर दी जाएगी।”
12 और जिलों में खुलेंगे सैनिक कल्याण केंद्र
फिलहाल राज्य के 13 जिलों में सैनिक कल्याण केंद्र कार्यरत हैं। अब शेष 12 जिलों में भी जल्द ही इनकी स्थापना की जाएगी ताकि राज्यभर के पूर्व सैनिकों, वीरांगनाओं और उनके आश्रितों तक सुविधा पहुंच सके।
सम्मान और आत्मनिर्भरता का संगम
इस अवसर पर बिहार सैनिक कल्याण निदेशालय के निदेशक ब्रिगेडियर मृगेंद्र कुमार, एसबीआई की मुख्य प्रबंधक पल्लवी प्रियदर्शिनी, सहायक निदेशक कर्नल संतोष त्रिपाठी, तथा राज्य सरकार और भारतीय सेना के कई अधिकारी उपस्थित थे।
चौधरी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वीरांगनाओं से सुझाव लेकर भविष्य में और भी प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन किया जाए, जिससे शहीद सैनिकों के परिवार स्वावलंबन की राह पर आगे बढ़ सकें।
यह पहल राज्य सरकार की संवेदनशीलता, समर्पण और सामाजिक न्याय के प्रति प्रतिबद्धता का उदाहरण है। सैनिकों की शहादत को शब्दों से नहीं, उनके परिवारों को आत्मनिर्भर बनाकर सच्चा सम्मान दिया जा सकता है — और यही उद्देश्य सैनिक कल्याण निगम की प्रस्तावित स्थापना और वीरांगनाओं के लिए शुरू की गई प्रशिक्षण योजनाओं का केंद्रबिंदु है।


