
“ऑपरेशन मुस्कान” बना भरोसे का प्रतीक, 2025 में अब तक 3,216 मोबाइल लौटाए गए
पटना, 2 अगस्त 2025: आज के डिजिटल युग में मोबाइल फोन केवल संवाद का साधन नहीं, बल्कि व्यक्तिगत पहचान, यादें, संपर्कों, दस्तावेजों और जीवनशैली की धुरी बन चुका है। ऐसे में मोबाइल फोन का चोरी या गुम हो जाना किसी व्यक्ति के लिए मानसिक और डिजिटल संकट से कम नहीं होता। लेकिन बिहार पुलिस की एक पहल “ऑपरेशन मुस्कान” ने हजारों लोगों को उनका खोया हुआ यह अनमोल साधन लौटाकर उन्हें राहत की सांस दी है।
तीन वर्षों में 22,980 मोबाइल फोन की रिकवरी
राज्य में ऑपरेशन मुस्कान अभियान के तहत पिछले तीन वर्षों में कुल 22,980 गुम या चोरी हुए मोबाइल फोन उनके वास्तविक मालिकों को सौंपे जा चुके हैं।
आइए देखें वर्षवार उपलब्धि:
- 2023: 11,609 मोबाइल फोन की बरामदगी और वापसी
- 2024: 8,155 मोबाइल फोन मालिकों को लौटाए गए
- 2025 (जनवरी से जुलाई तक): 3,216 मोबाइल फोन की सफल वापसी
यह आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि पुलिस महकमा अब सिर्फ अपराधियों की धरपकड़ तक सीमित नहीं है, बल्कि जनसेवा और संवेदना का नया रूप भी है।
हर जिले को मिले हैं निर्देश, मुख्यालय लेता है निगरानी रिपोर्ट
राज्य पुलिस मुख्यालय ने सभी जिला पुलिस अधीक्षकों को निर्देश जारी किए हैं कि मोबाइल गुमशुदगी और चोरी के मामलों को प्राथमिकता से लें और पीड़ितों की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करें।
पुलिस मुख्यालय समेकित रिपोर्ट भी तलब करता है, जिससे यह आकलन किया जा सके कि किस जिले में मोबाइल बरामदगी में कितनी प्रगति हुई है।
“ऑपरेशन मुस्कान” क्यों है खास?
- यह सिर्फ मोबाइल की वापसी नहीं, बल्कि विश्वास और संवेदना की बहाली है।
- लोगों की निजता, डेटा और यादें सुरक्षित लौटाई जाती हैं।
- आम नागरिकों में पुलिस के प्रति भरोसे और सहयोग का माहौल बनता है।
- चोरी और साइबर अपराधों पर नियंत्रण का प्रभावी साधन बन रहा है।
पुलिस की अपील – गुम मोबाइल की तुरंत शिकायत करें
बिहार पुलिस ने आमजन से अपील की है कि मोबाइल गुम या चोरी होने पर तत्काल पास के थाने या ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से प्राथमिकी दर्ज कराएं। जल्द शिकायत दर्ज होने से मोबाइल की ट्रैकिंग और वापसी की संभावना अधिक रहती है।
ऑपरेशन मुस्कान अब केवल एक पुलिस अभियान नहीं रहा, बल्कि यह उन हजारों चेहरों पर लौटी हुई खुशी, उम्मीद और राहत की पहचान बन चुका है। तकनीक और मानवता के इस संगम से पुलिस का चेहरा और भूमिका दोनों बदली है — अब यह सिर्फ कानून का रक्षक नहीं, जनता का संवेदनशील साथी बन चुका है।


