ग्रामीण महिलाओं की आवाज़ को मिला ‘डिजिटल’ मंच! पटना में ‘दीदी की आवाज़ केंद्र’ का उद्घाटन; अब एक कॉल पर दर्ज होगी शिकायत और मिलेगा समाधान

खबर के मुख्य बिंदु:

  • बड़ी पहल: अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर ‘जीविका–दीदी की आवाज़ केंद्र’ का भव्य शुभारंभ।
  • कमांड सेंटर: शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए सपोर्ट-सह-नियंत्रण कक्ष के रूप में करेगा कार्य।
  • संस्थागत सहयोग: चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (CNLU) और पीरामल फाउंडेशन के साथ मिलकर शुरू हुई सेवा।
  • सशक्तिकरण: प्रशिक्षित ‘करुणा’ और ‘संविधान’ फेलोज़ संभालेंगे केंद्र की कमान।
  • राज्यव्यापी अभियान: बाल विवाह और दहेज जैसी कुरीतियों के खिलाफ जीविका दीदियों ने लिया सामूहिक संकल्प।

पटना: बिहार की ग्रामीण महिलाओं की समस्याओं को अब न केवल सुना जाएगा, बल्कि उनका ‘रियल-टाइम’ समाधान भी सुनिश्चित होगा। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आज पटना के चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (CNLU) में ‘जीविका–दीदी की आवाज़ केंद्र’ का औपचारिक उद्घाटन किया गया। यह केंद्र राज्यभर की लाखों जीविका दीदियों के लिए एक मज़बूत सुरक्षा कवच और कानूनी सहायता तंत्र के रूप में उभरेगा।

एक कॉल पर मिलेगा न्याय: कमांड सेंटर की ताकत

​जीविका और पीरामल फाउंडेशन (PFEL) के सहयोग से स्थापित यह केंद्र ‘दीदी अधिकार केंद्र’ (DAK) के लिए मुख्य सपोर्ट सिस्टम के रूप में काम करेगा।

  • त्वरित समाधान: राज्य के किसी भी कोने से आने वाली शिकायतों को यहाँ व्यवस्थित रूप से दर्ज किया जाएगा।
  • विशेषज्ञों की निगरानी: प्रशिक्षित फेलोज़ इन शिकायतों को संबंधित विभागों और अधिकारियों तक पहुँचाकर समाधान की नियमित निगरानी करेंगे।
  • CNLU की भूमिका: विश्वविद्यालय का जेंडर रिसोर्स सेंटर (GRC) इस केंद्र के समन्वय का जिम्मा संभालेगा, जबकि लीगल एड सेल दीदियों को कानूनी प्रशिक्षण देगा।

“महिला सशक्तिकरण ही विकास का आधार”: हिमांशु शर्मा

​जीविका के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी (CEO) श्री हिमांशु शर्मा ने रिबन काटकर केंद्र का शुभारंभ किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा:

​”जब महिलाएं संगठित होती हैं, तो वे समाज और अर्थव्यवस्था दोनों को बदलने की क्षमता रखती हैं। ‘दीदी की आवाज़ केंद्र’ एक ऐसी प्रणाली है जो हर महिला की आवाज़ को सुनेगा और न्याय तक उनकी पहुँच सुनिश्चित करेगा। संकुल संघ (CLF) अब केवल आर्थिक मदद तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे सामाजिक परिवर्तन का सबसे बड़ा मंच बन चुके हैं।”

 

मैदान से अनुभव: रूबी और सुलेखा दीदी की कहानी

​कार्यक्रम के दौरान भागलपुर से आईं रूबी दीदी और पटना की सुलेखा दीदी ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि कैसे ‘दीदी अधिकार केंद्र’ ग्रामीण इलाकों में घरेलू हिंसा और अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाने में मील का पत्थर साबित हो रहे हैं। इन केंद्रों की मदद से अब ग्रामीण महिलाएं बिना डरे अपनी शिकायतें प्रशासन और पुलिस तक पहुँचा पा रही हैं।

आज की बड़ी गतिविधियाँ (Quick Facts)

  • मुख्य उद्घाटन: जीविका–दीदी की आवाज़ केंद्र (DAK सपोर्ट-सह-कमांड सेंटर)।
  • सहयोगी संस्थान: जीविका, पीरामल फाउंडेशन और CNLU पटना।
  • जागरूकता संदेश: “सुरक्षित रास्ता विकास का रास्ता” और “घर का काम सबका काम” का प्रचार।
  • राज्यव्यापी शपथ: बाल विवाह, दहेज प्रथा और घरेलू हिंसा के विरुद्ध सामूहिक संकल्प।
  • सम्मान: उत्कृष्ट कार्य करने वाली जीविका दीदियों को मंच पर किया गया सम्मानित।

VOB का नजरिया: आवाज़ को मिला ‘एक्शन’ का साथ!

​अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों में शिकायतें तो दर्ज होती हैं, लेकिन वे फाइलों में दबकर रह जाती हैं। ‘दीदी की आवाज़ केंद्र’ की सबसे बड़ी खूबी इसका ‘कमांड सेंटर’ मॉडल है, जहाँ शिकायतों के समाधान की ट्रैकिंग होगी। CNLU जैसे प्रतिष्ठित संस्थान का जुड़ना इस पहल को कानूनी मजबूती प्रदान करता है। यह कदम दर्शाता है कि बिहार की ‘जीविका’ अब केवल लोन और बचत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के ‘आत्मसम्मान’ और ‘अधिकार’ की सबसे बुलंद आवाज़ बन गई है।

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