
रोहतास। बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक घूसखोर अधिकारी को रंगेहाथ गिरफ्तार किया है। यह मामला रोहतास जिले के राजपुर प्रखंड का है, जहां प्रखंड सहकारिता प्रसार पदाधिकारी जनार्दन कुमार को 10 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया।
बताया जा रहा है कि आरोपी अधिकारी धान अधिप्राप्ति से जुड़े एक मामले में रिपोर्ट भेजने के एवज में घूस की मांग कर रहा था। इस कार्रवाई के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है और भ्रष्टाचार पर एक बार फिर सख्त संदेश गया है।
शिकायत के बाद हुई कार्रवाई
इस पूरे मामले की शुरुआत एक शिकायत से हुई। राजपुर थाना क्षेत्र निवासी प्रशांत कुमार ने पटना स्थित निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रखंड सहकारिता प्रसार पदाधिकारी जनार्दन कुमार धान अधिप्राप्ति प्रक्रिया में पैक्स (PACS) के भौतिक सत्यापन के बाद रिपोर्ट भेजने के लिए उनसे रिश्वत की मांग कर रहे हैं।
शिकायत मिलने के बाद ब्यूरो ने मामले को गंभीरता से लिया और इसकी जांच शुरू कर दी। प्रारंभिक जांच यानी सत्यापन के दौरान यह पाया गया कि अधिकारी द्वारा वास्तव में रिश्वत की मांग की जा रही है। इससे शिकायत की पुष्टि हो गई।
ट्रैप टीम का गठन
शिकायत सही पाए जाने के बाद निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने विधिवत मामला दर्ज किया और कार्रवाई के लिए एक विशेष धावादल (ट्रैप टीम) का गठन किया। इस टीम का नेतृत्व पुलिस उपाधीक्षक और अनुसंधानकर्ता अखिलेश कुमार को सौंपा गया।
टीम ने पूरी योजना के तहत जाल बिछाया और आरोपी को रंगेहाथ पकड़ने की रणनीति बनाई। इसके तहत परिवादी को निर्देश दिए गए कि वह तय रकम लेकर आरोपी से संपर्क करे।
10 हजार रुपये लेते पकड़ा गया
योजना के अनुसार, जैसे ही जनार्दन कुमार ने 10 हजार रुपये की रिश्वत ली, निगरानी टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उन्हें रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी न्यू रॉयल अस्पताल के पास सड़क किनारे की गई।
कार्रवाई इतनी सटीक और तेज थी कि आरोपी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। टीम ने मौके पर ही पैसे बरामद किए और सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी कीं।
पूछताछ और आगे की कार्रवाई
गिरफ्तारी के बाद आरोपी अधिकारी से पूछताछ की जा रही है। निगरानी ब्यूरो यह जानने की कोशिश कर रहा है कि क्या इस मामले में और लोग भी शामिल हैं या यह अकेले का कृत्य था।
अधिकारियों के अनुसार, आरोपी को जल्द ही पटना स्थित निगरानी की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा। इसके बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
भ्रष्टाचार पर सख्त संदेश
इस कार्रवाई को राज्य सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत एक बड़ा कदम माना जा रहा है। लगातार हो रही ऐसी कार्रवाई से यह स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की ट्रैप कार्रवाई न केवल दोषियों को पकड़ने में मदद करती है, बल्कि अन्य अधिकारियों के लिए भी एक चेतावनी का काम करती है।
किसानों और आम जनता पर असर
धान अधिप्राप्ति जैसी प्रक्रियाएं सीधे किसानों से जुड़ी होती हैं। ऐसे में यदि अधिकारी इस प्रक्रिया में भ्रष्टाचार करते हैं, तो इसका सीधा असर किसानों और आम लोगों पर पड़ता है।
इस मामले में भी रिपोर्ट भेजने के नाम पर रिश्वत मांगना यह दर्शाता है कि कैसे प्रशासनिक स्तर पर भ्रष्टाचार किसानों के हितों को प्रभावित करता है। ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई जरूरी है ताकि व्यवस्था पारदर्शी बनी रहे।
रोहतास में घूसखोर अधिकारी की गिरफ्तारी ने यह साबित कर दिया है कि यदि लोग आगे आकर शिकायत करें, तो भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई संभव है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि कानून के सामने कोई भी बड़ा या छोटा नहीं है।
अब देखना होगा कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है और क्या इससे प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार आता है या नहीं।


