राजद में डैमेज कंट्रोल शुरू: अस्पताल पहुंचे भाई वीरेंद्र और सुनील सिंह, शिवचंद्र राम की नाराजगी दूर करने की कवायद तेज

पटना। बिहार विधान परिषद चुनाव को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के भीतर शुरू हुआ असंतोष अब पार्टी नेतृत्व के लिए बड़ी चुनौती बनता दिखाई दे रहा है। एमएलसी टिकट नहीं मिलने के बाद नाराज होकर पार्टी के वरिष्ठ नेता और एससी/एसटी प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवचंद्र राम द्वारा इस्तीफे की घोषणा किए जाने के बाद राजद नेतृत्व सक्रिय हो गया है। पार्टी के कई बड़े नेता लगातार उनसे संपर्क साध रहे हैं और नाराजगी दूर करने की कोशिशों में जुटे हुए हैं। इसी कड़ी में पटना के एक निजी अस्पताल में भर्ती शिवचंद्र राम से मिलने पहुंचे नेताओं की मुलाकातें अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई हैं।

सबसे अधिक चर्चा राजद विधायक भाई वीरेंद्र और पार्टी नेता सुनील सिंह की मुलाकातों की हो रही है। दोनों नेताओं ने अस्पताल पहुंचकर शिवचंद्र राम का हालचाल जाना और उनसे लंबी बातचीत की। इन मुलाकातों को राजद के भीतर चल रहे डैमेज कंट्रोल अभियान का अहम हिस्सा माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि पार्टी किसी भी कीमत पर शिवचंद्र राम जैसे वरिष्ठ दलित चेहरे को नाराज नहीं रखना चाहती, क्योंकि इसका असर संगठन और सामाजिक समीकरण दोनों पर पड़ सकता है।

दरअसल, विधान परिषद चुनाव के लिए उम्मीदवारों के चयन के दौरान शिवचंद्र राम का नाम प्रमुख दावेदारों में शामिल माना जा रहा था। लंबे समय से संगठन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले शिवचंद्र राम को टिकट मिलने की उम्मीद थी। उनके समर्थक भी लगातार दावा कर रहे थे कि पार्टी नेतृत्व इस बार उन्हें अवसर देगा। लेकिन अंतिम समय में पार्टी ने सुनील सिंह को उम्मीदवार घोषित कर दिया। इसके बाद शिवचंद्र राम की नाराजगी खुलकर सामने आ गई।

टिकट की घोषणा के बाद शिवचंद्र राम ने भावुक होकर मीडिया के सामने अपनी पीड़ा व्यक्त की थी। उन्होंने कहा था कि उन्होंने वर्षों तक पार्टी और नेतृत्व के प्रति पूरी निष्ठा के साथ काम किया, लेकिन उन्हें अपेक्षित सम्मान नहीं मिला। मीडिया से बातचीत के दौरान उनकी आंखों से आंसू भी छलक पड़े थे। उन्होंने अपने समर्थकों और समाज के लोगों की भावनाओं का हवाला देते हुए पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी थी।

शिवचंद्र राम के इस कदम ने राजद नेतृत्व को चिंता में डाल दिया। पार्टी को यह अहसास हुआ कि यदि उनकी नाराजगी दूर नहीं की गई तो इसका संदेश संगठन के भीतर और बाहर दोनों जगह नकारात्मक जा सकता है। यही कारण है कि उनके इस्तीफे की घोषणा के तुरंत बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता सक्रिय हो गए और उन्हें मनाने का अभियान शुरू कर दिया गया।

इसी बीच शिवचंद्र राम की तबीयत खराब होने के बाद उन्हें पटना के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में भर्ती होने की खबर मिलते ही पार्टी नेताओं का उनके पास पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। कई नेताओं ने उनसे मुलाकात कर उनका हालचाल जाना और पार्टी के प्रति विश्वास बनाए रखने की अपील की।

राजद विधायक भाई वीरेंद्र की मुलाकात भी काफी चर्चा में रही। बताया गया कि वह अस्पताल में शिवचंद्र राम से मिलने हॉर्लिक्स लेकर पहुंचे थे। उन्होंने न केवल उनका हालचाल जाना बल्कि उनसे भावनात्मक बातचीत भी की। पार्टी सूत्रों के अनुसार भाई वीरेंद्र ने उन्हें भरोसा दिलाने की कोशिश की कि संगठन में उनकी भूमिका और योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। उनकी यह मुलाकात सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में भी चर्चा का विषय बनी रही।

हालांकि सबसे ज्यादा सुर्खियां सुनील सिंह और शिवचंद्र राम की मुलाकात ने बटोरीं। जिस नेता को टिकट मिलने के बाद यह पूरा विवाद खड़ा हुआ, वही सुनील सिंह अस्पताल पहुंचकर शिवचंद्र राम से मिले। बताया जाता है कि वह अपने साथ मिठाई लेकर पहुंचे थे। अस्पताल में उन्होंने हाथ जोड़कर शिवचंद्र राम का अभिवादन किया और उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। दोनों नेताओं के बीच काफी देर तक बातचीत हुई। मुलाकात के दौरान दोनों ने एक-दूसरे को मिठाई भी खिलाई। इस दौरान की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो गए।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुलाकात केवल शिष्टाचार तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसके पीछे पार्टी की एक स्पष्ट रणनीति दिखाई देती है। राजद नेतृत्व यह संदेश देना चाहता है कि संगठन के भीतर किसी प्रकार की कटुता नहीं है और सभी नेता मिलकर पार्टी को मजबूत बनाने के लिए काम कर रहे हैं। सुनील सिंह की ओर से दिखाई गई यह पहल भी उसी प्रयास का हिस्सा मानी जा रही है।

दरअसल, एमएलसी टिकट को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा शिवचंद्र राम और सुनील सिंह के नामों को लेकर ही थी। दोनों नेताओं के समर्थक अपने-अपने दावे कर रहे थे। अंतिम फैसला सुनील सिंह के पक्ष में गया, जिसके बाद शिवचंद्र राम की नाराजगी सामने आई। ऐसे में दोनों नेताओं की अस्पताल में हुई मुलाकात को राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

शिवचंद्र राम ने इस्तीफे की घोषणा करते समय कहा था कि उनके समाज के लोग बड़ी उम्मीदों के साथ पटना पहुंचे थे और उन्हें विश्वास था कि पार्टी इस बार उन्हें अवसर देगी। लेकिन ऐसा नहीं होने से वे और उनके समर्थक आहत हैं। उन्होंने इसे केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि सामाजिक सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताया था। यही वजह है कि उनके बयान ने दलित राजनीति और राजद के सामाजिक समीकरणों को लेकर भी नई चर्चा शुरू कर दी थी।

हालांकि पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत हस्तक्षेप किया। उन्होंने शिवचंद्र राम का इस्तीफा स्वीकार करने से इनकार कर दिया और स्पष्ट संदेश दिया कि वे पार्टी के महत्वपूर्ण नेता हैं। इसके बाद संगठन के कई नेताओं को उनसे बातचीत करने और नाराजगी दूर करने की जिम्मेदारी दी गई।

राजद नेताओं का कहना है कि शिवचंद्र राम पार्टी के पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं में शामिल हैं तथा संगठन में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि वे पहले की तरह अपने सभी दायित्वों का निर्वहन करते रहें। यही कारण है कि लगातार उनसे संवाद बनाए रखा जा रहा है।

फिलहाल अस्पताल में हुई मुलाकातों के बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या शिवचंद्र राम की नाराजगी पूरी तरह दूर हो पाएगी या नहीं। हालांकि मुलाकातों की तस्वीरों और दोनों पक्षों की ओर से दिखाई गई सकारात्मकता ने संकेत जरूर दिए हैं कि संबंधों में आई खटास को कम करने की कोशिशें जारी हैं।

बिहार विधान परिषद चुनाव के बीच सामने आया यह घटनाक्रम राजद के लिए एक अहम परीक्षा माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व की कोशिश है कि किसी भी प्रकार का असंतोष संगठन की एकता पर असर न डाले। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि अस्पताल में शुरू हुई मनाने की यह कवायद कितनी सफल साबित होती है और शिवचंद्र राम एक बार फिर पूरी सक्रियता के साथ पार्टी की जिम्मेदारियों को संभालते हैं या नहीं।

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