नवादा पुलिस की बड़ी कामयाबी: तेल लदा लूटा गया ट्रक बरामद, झारखंड-बिहार में सक्रिय कुख्यात अपराधी पटना से गिरफ्तार

नवादा। बिहार में संगठित अपराध और अंतरराज्यीय लूटकांड के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत नवादा पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। कई महीनों से फरार चल रहे एक कुख्यात अपराधी को पुलिस ने पटना से गिरफ्तार कर लिया है। यह अपराधी नवादा जिले के टॉप-10 वांछित अपराधियों की सूची में शामिल था और उस पर झारखंड से लेकर बिहार तक सक्रिय लूट गिरोह से जुड़े होने का आरोप है। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के साथ-साथ पिछले वर्ष लूटे गए तेल से भरे ट्रक को भी बरामद कर लिया है। इस कार्रवाई को नवादा पुलिस की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तार अपराधी की पहचान रमेश गुप्ता उर्फ रमेश प्रसाद के रूप में हुई है। वह झारखंड के बोकारो जिले के चास थाना क्षेत्र का रहने वाला है। लंबे समय से पुलिस उसकी तलाश कर रही थी। तकनीकी निगरानी और लगातार चलाए जा रहे अभियान के बाद आखिरकार उसे पटना जिले के गौरीचक थाना क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया गया।

यह मामला सितंबर 2025 में हुए एक सनसनीखेज ट्रक लूटकांड से जुड़ा हुआ है। जानकारी के अनुसार एक ट्रांसपोर्ट कंपनी का ट्रक कोलकाता से खाद्य तेल की खेप लेकर पटना की ओर जा रहा था। ट्रक में एक प्रमुख कंपनी का खाद्य तेल लदा हुआ था जिसकी बाजार में बड़ी कीमत बताई गई थी। जब ट्रक नवादा जिले के अकबरपुर थाना क्षेत्र के केंदुआ ओवरब्रिज के पास पहुंचा तो पहले से घात लगाए अपराधियों ने उसे निशाना बना लिया।

बताया जाता है कि अपराधियों ने ट्रक चालक को रोककर उसके साथ मारपीट की। इसके बाद चालक को जबरन नशीला पदार्थ पिलाया गया ताकि वह विरोध न कर सके। चालक के बेहोश होने के बाद अपराधी ट्रक लेकर मौके से फरार हो गए। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और परिवहन व्यवसायियों के बीच दहशत फैल गई।

वारदात की सूचना मिलते ही अकबरपुर थाना में मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने इसे सामान्य चोरी या लूट की घटना मानने के बजाय संगठित अपराध के रूप में जांच शुरू की। चूंकि घटना में अंतरराज्यीय गिरोह के शामिल होने की आशंका थी, इसलिए मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच टीम यानी एसआईटी का गठन किया गया।

पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर गठित इस टीम की कमान रजौली अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी गुलशन कुमार को सौंपी गई। टीम ने घटना से जुड़े हर पहलू की बारीकी से जांच शुरू की। मोबाइल कॉल डिटेल, लोकेशन ट्रैकिंग, इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और ह्यूमन इंटेलिजेंस जैसे आधुनिक तरीकों का उपयोग कर अपराधियों तक पहुंचने की कोशिश की गई।

जांच के दौरान पुलिस को कई अहम सुराग मिले। तकनीकी विश्लेषण से यह स्पष्ट हुआ कि वारदात को अंजाम देने वाले अपराधी काफी पेशेवर तरीके से काम करते हैं और उनके पास आधुनिक उपकरण भी मौजूद थे। पुलिस को संदेह हुआ कि गिरोह लंबे समय से ट्रांसपोर्ट वाहनों को निशाना बनाता रहा है और इसके तार कई जिलों तथा राज्यों से जुड़े हो सकते हैं।

लगातार छापेमारी और निगरानी अभियान के दौरान पुलिस ने पहले इस मामले में शामिल एक आरोपी को गिरफ्तार किया था। उसकी गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आईं। इन्हीं सूचनाओं के आधार पर पुलिस ने गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश तेज कर दी। इसी क्रम में रमेश गुप्ता का नाम सामने आया, जिसे गिरोह का सक्रिय सदस्य और प्रमुख योजनाकारों में से एक माना जा रहा था।

कई महीनों तक उसकी गतिविधियों पर नजर रखने के बाद पुलिस को सूचना मिली कि वह पटना जिले के गौरीचक इलाके में मौजूद है। इसके बाद एक विशेष टीम ने कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद उसे नवादा लाकर पूछताछ की गई, जहां उसने कथित तौर पर कई महत्वपूर्ण खुलासे किए।

पुलिस सूत्रों के अनुसार पूछताछ में आरोपी ने गिरोह की कार्यप्रणाली, वारदात को अंजाम देने के तरीके और अन्य सदस्यों की भूमिका से जुड़ी जानकारियां दी हैं। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि इन जानकारियों के आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों तक भी जल्द पहुंचा जा सकेगा। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह ने बिहार और झारखंड में और कितनी घटनाओं को अंजाम दिया है।

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि लूटे गए ट्रक की बरामदगी रही। पुलिस ने पहले गिरफ्तार किए गए अपराधियों की निशानदेही पर जमुई जिले के झाझा क्षेत्र से ट्रक को बरामद कर लिया था। बरामदगी के दौरान पुलिस को कई ऐसे उपकरण भी मिले जो अपराधियों की पेशेवर कार्यशैली को दर्शाते हैं।

पुलिस के अनुसार अपराधियों के पास से मोबाइल फोन, जीपीएस ट्रैकर मशीन, जाल मशीन और ट्रक की चाबियां बरामद की गई थीं। इससे यह स्पष्ट हुआ कि गिरोह वारदात को अंजाम देने से पहले पूरी योजना बनाता था और ट्रक की लोकेशन पर नजर रखने के लिए तकनीकी उपकरणों का इस्तेमाल करता था। जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह परिवहन वाहनों की गतिविधियों पर पहले से निगरानी रखता था और फिर सुनियोजित तरीके से लूट की घटना को अंजाम देता था।

पुलिस अधिकारियों का मानना है कि रमेश गुप्ता की गिरफ्तारी से अंतरराज्यीय अपराध नेटवर्क के कई राज सामने आ सकते हैं। वह लंबे समय से पुलिस की निगरानी सूची में शामिल था और उसके खिलाफ विभिन्न आपराधिक मामलों में संलिप्तता की जानकारी भी मिली है। जिले के टॉप-10 अपराधियों की सूची में उसका नाम शामिल होना उसकी आपराधिक पृष्ठभूमि को दर्शाता है।

इस कार्रवाई के बाद नवादा पुलिस ने स्पष्ट संदेश दिया है कि संगठित अपराध में शामिल किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि मामले में शामिल अन्य फरार अपराधियों की पहचान कर ली गई है और उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि जल्द ही पूरे गिरोह का पर्दाफाश कर दिया जाएगा।

परिवहन व्यवसायियों और ट्रक मालिकों ने भी इस कार्रवाई का स्वागत किया है। उनका कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में मालवाहक वाहनों को निशाना बनाने वाली घटनाओं में वृद्धि हुई थी, जिससे कारोबार प्रभावित हो रहा था। ऐसे में पुलिस की यह सफलता व्यापारियों में सुरक्षा का भरोसा बढ़ाने वाली है।

फिलहाल पुलिस गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ कर रही है और उससे मिली जानकारी के आधार पर आगे की कार्रवाई जारी है। अधिकारियों का दावा है कि इस मामले में जल्द ही और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। नवादा पुलिस की इस कार्रवाई को न केवल एक बड़ी आपराधिक गुत्थी सुलझाने के रूप में देखा जा रहा है, बल्कि इसे अंतरराज्यीय अपराध नेटवर्क के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की महत्वपूर्ण सफलता भी माना जा रहा है।

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