
20 सितंबर तक चलने वाले इस अभियान में जनता की जमीन से जुड़े मामलों का होगा ऑनस्पॉट समाधान, पंचायत प्रतिनिधियों से लेकर राजस्व कर्मियों तक सबकी भागीदारी सुनिश्चित
पटना | 2 अगस्त 2025: बिहार सरकार जमीन-जायदाद से जुड़े झंझटों को खत्म करने और लोगों को घर बैठे राहत पहुंचाने की दिशा में अब एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। 16 अगस्त से 20 सितंबर तक पूरे राज्य में ‘विशेष राजस्व महाअभियान 2025’ चलाया जाएगा। इस दौरान घर-घर जाकर डिजिटाइज्ड जमाबंदी की प्रति और सुधार हेतु आवेदन फॉर्म वितरित किए जाएंगे। इसके अलावा नामांतरण, बंटवारा और छूटी हुई जमाबंदियों को ऑनलाइन करने जैसी सेवाएं भी प्राथमिकता में रहेंगी।
क्या है खास इस महाअभियान में?
- घर-घर जाकर जमाबंदी दस्तावेज और आवेदन फॉर्म का वितरण
- हल्का स्तर पर शिविर लगाकर ऑन-स्पॉट आवेदन और कागजों का संकलन
- डिजिटाइजेशन में छूटे रिकॉर्ड को ऑनलाइन जोड़ने की व्यवस्था
- उत्तराधिकार नामांतरण और संयुक्त संपत्ति के बंटवारे के लिए त्वरित आवेदन
- पारदर्शिता और त्वरित निष्पादन के लिए डिजिटल ट्रैकिंग व्यवस्था
जनसहयोग से बनेगा यह अभियान मिसाल
इस महाअभियान की सफलता के लिए सरकार केवल अपने अमले पर ही नहीं, पंचायती राज प्रतिनिधियों से लेकर ग्राम कचहरी तक के नेटवर्क को भी जोड़ रही है। सभी संबंधित संघों की संयुक्त बैठक 10 अगस्त को पटना के शास्त्रीनगर स्थित राजस्व (सर्वे) प्रशिक्षण संस्थान में आयोजित की जाएगी। इसमें विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह अध्यक्षता करेंगे।
बैठक में निम्न प्रमुख संगठनों को आमंत्रित किया गया है:
- बिहार प्रशासनिक सेवा संघ
- बिहार राजस्व सेवा संघ
- यूनाइटेड राजस्व सेवा संघ
- मुखिया संघ, पंच-सरपंच संघ, पंचायत सचिव संघ
- ग्राम कचहरी सचिव संघ, न्यायमित्र संघ
- भूमि सुधार कर्मचारी संघ, राजस्व अमीन संघ
- जिला परिषद संघ एवं अन्य क्षेत्रीय संघ
सरकार का उद्देश्य – पारदर्शिता, गति और समाधान
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अनुसार, यह महाअभियान केवल एक सरकारी औपचारिकता नहीं, बल्कि “जनसेवा के धरातल पर समाधान” देने की एक प्रतिबद्ध पहल है। विभाग का मानना है कि अधिसंख्य भूमि विवाद सही रिकॉर्डिंग, नामांतरण और पारिवारिक बंटवारे के अभाव में उत्पन्न होते हैं। ऐसे में ये अभियान आर्थिक न्याय और सामाजिक स्थिरता के दृष्टिकोण से भी अहम है।
तैयारी जोरों पर – अधिकारी से लेकर अमीन तक होंगे जिम्मेदार
प्रत्येक हल्का, अंचल और जिले में इस अभियान के लिए जिम्मेदार अफसरों की तैनाती, शिविर स्थलों की पहचान, और ऑनलाइन अपडेट सिस्टम तैयार किया जा रहा है। विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक –
“राजस्व न्याय प्रणाली को मजबूत करने और आम जनता को जमीन से जुड़े मामलों में राहत दिलाने के लिए यह अब तक का सबसे बड़ा अभियान हो सकता है।”


