पटना, 10 अगस्त 2025 —भारत निर्वाचन आयोग ने सख्ती का बिगुल बजा दिया है। शनिवार को जारी आदेश में बिहार के 17 पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को सूची से सीधा बाहर कर दिया गया।
ये वही दल हैं जो पिछले 6 साल से न तो चुनाव मैदान में उतरे, न दफ्तर में ताला खोला।
देशभर में बड़ी सफाई मुहिम
सिर्फ बिहार ही नहीं, देशभर में ऐसे 334 राजनीतिक दलों की छुट्टी कर दी गई है।
अब 2854 में से सिर्फ 2520 गैर-मान्यता प्राप्त दल ही बचे हैं।
चुनाव आयोग का कहना है — हटाए गए दल अब जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29B और 29C समेत चुनाव चिह्न आदेश, 1968 के तहत मिलने वाले किसी भी लाभ के हकदार नहीं रहेंगे।
6 साल से न चुनाव, न पता-ठिकाना
आयोग की जांच में खुलासा हुआ कि ये दल 2019 से अब तक किसी भी चुनाव में हिस्सा नहीं ले पाए।
और तो और, जब पंजीकृत पते पर जांच हुई तो ज्यादातर जगह पार्टी ऑफिस या तो बंद मिले, या वहां कोई पार्टी का नाम तक नहीं जानता था।
इसके बाद आयोग ने बिना देर किए इन्हें लिस्ट से बाहर कर दिया।
30 दिन में अपील का मौका
अगर किसी दल को यह फैसला नागवार गुजरे तो वे 30 दिनों के भीतर चुनाव आयोग में अपील कर सकते हैं।
बिहार के ‘मृत’ 17 दलों की लिस्ट
- भारतीय बैकवर्ड पार्टी, पटना
- भारतीय सुराज दल, पटना
- भारतीय युवा पार्टी (डेमोक्रेटिक), पटना
- भारतीय जनतंत्र सनातन दल, बक्सर
- बिहार जनता पार्टी, सारण
- देसी किसान पार्टी, गया
- गांधी प्रकाश पार्टी, कैमूर
- हमदर्दी जन संरक्षक समाजवादी विकास पार्टी (जन सेवक), बक्सर
- क्रांतिकारी समाजवादी पार्टी, पटना
- क्रांतिकारी विकास दल, पटना
- लोक आवाज दल, पटना
- लोकतांत्रिक समता दल, पटना
- नेशनल जनता पार्टी (इंडियन), वैशाली
- राष्ट्रवादी जन कांग्रेस, पटना
- राष्ट्रीय सर्वोदय पार्टी, पटना
- सर्वजन कल्याण लोकतांत्रिक पार्टी, पटना
- व्यवसायी किसान अल्पसंख्यक मोर्चा, जमुई
पॉलिटिकल सिग्नल
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कार्रवाई छोटे, निष्क्रिय और कागज़ी दलों पर नकेल कसने का संकेत है। चुनाव आयोग साफ करना चाहता है कि सिर्फ नाम के लिए पार्टी रजिस्टर कराने का जमाना अब गया।


