
पटना: वंदे भारत एक्सप्रेस समेत विभिन्न ट्रेनों पर लगातार हो रही पत्थरबाजी की घटनाओं को रोकने के लिए रेलवे ने व्यापक सुरक्षा अभियान शुरू किया है। यात्रियों की सुरक्षा, रेल संपत्ति की रक्षा और ट्रेन संचालन को सुचारु बनाए रखने के उद्देश्य से पूर्व मध्य रेल ने कई स्तरों पर कार्रवाई शुरू की है। इस अभियान के तहत रेलवे ट्रैक के किनारे बसे संवेदनशील गांवों की पहचान की गई है, स्थानीय लोगों को निगरानी व्यवस्था से जोड़ा गया है और आधुनिक तकनीक की मदद से सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार हाल के वर्षों में ट्रेनों पर पत्थरबाजी की घटनाएं चिंता का विषय बन गई हैं। कई बार इन घटनाओं में यात्रियों को चोटें लगी हैं, ट्रेनों के शीशे टूटे हैं और रेलवे को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा है। खासतौर पर हाईस्पीड और प्रीमियम ट्रेनों को निशाना बनाए जाने के कारण रेलवे ने इसे गंभीर सुरक्षा चुनौती के रूप में लिया है।
140 गांवों की हुई पहचान
रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) और रेलवे प्रशासन ने संयुक्त रूप से एक विस्तृत सर्वेक्षण अभियान चलाया है। इसके तहत रेलवे ट्रैक के आसपास बसे 140 गांवों की मैपिंग की गई है। इन गांवों को इसलिए चिन्हित किया गया है क्योंकि इनके आसपास के क्षेत्रों में पहले पत्थरबाजी की घटनाएं सामने आ चुकी हैं या भविष्य में ऐसी घटनाओं की आशंका जताई गई है।
मैपिंग के दौरान रेलवे अधिकारियों ने ट्रैक की भौगोलिक स्थिति, आबादी, स्थानीय गतिविधियों और पूर्व में हुई घटनाओं का अध्ययन किया। इसके आधार पर कई ऐसे सेक्शन चिन्हित किए गए हैं जिन्हें संवेदनशील और अति संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है।
रेलवे का मानना है कि समस्या की जड़ तक पहुंचने के लिए प्रभावित क्षेत्रों की सही पहचान आवश्यक है। यही कारण है कि इस बार केवल घटना होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले से रोकथाम की रणनीति अपनाई जा रही है।
‘रेल मित्र’ अभियान को मिली नई जिम्मेदारी
पत्थरबाजी रोकने की इस मुहिम में रेलवे ने स्थानीय समुदाय को भी शामिल किया है। इसके लिए ‘रेल मित्र’ अभियान को मजबूत किया गया है। अब तक कुल 856 रेल मित्रों को इस अभियान से जोड़ा जा चुका है।
रेल मित्र ऐसे स्थानीय लोग हैं जो रेलवे ट्रैक के आसपास रहने वाले समुदाय का हिस्सा हैं और रेलवे प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर काम करते हैं। इनकी भूमिका केवल निगरानी तक सीमित नहीं है बल्कि लोगों को जागरूक करना, संदिग्ध गतिविधियों की सूचना देना और रेलवे सुरक्षा से जुड़े संदेशों को गांव-गांव तक पहुंचाना भी है।
रेलवे अधिकारियों का मानना है कि किसी भी सामाजिक समस्या का स्थायी समाधान स्थानीय समुदाय की भागीदारी से ही संभव है। यही वजह है कि रेल मित्रों को इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है।
हिस्ट्रीशीटरों का तैयार किया गया डाटा
रेलवे सुरक्षा बल ने समस्तीपुर और सोनपुर मंडल के उन व्यक्तियों का डाटा भी तैयार किया है जो पहले पत्थरबाजी की घटनाओं में शामिल पाए गए थे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार ऐसे 96 लोगों की सूची तैयार की गई है।
इस सूची को सुरक्षा एजेंसियों और रेल मित्रों के साथ साझा किया गया है ताकि इन व्यक्तियों की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। रेलवे का मानना है कि बार-बार अपराध करने वालों की पहचान और निगरानी से घटनाओं को रोकने में मदद मिलेगी।
अधिकारियों का कहना है कि ऐसे लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा रही है और जरूरत पड़ने पर स्थानीय प्रशासन के सहयोग से अतिरिक्त कदम उठाए जाएंगे।
सीसीटीवी निगरानी बढ़ाने पर जोर
रेलवे अब तकनीक की मदद से भी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत कर रहा है। संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
इन कैमरों के माध्यम से रेलवे ट्रैक और आसपास के क्षेत्रों की निगरानी की जाएगी। यदि किसी स्थान पर पत्थरबाजी या अन्य संदिग्ध गतिविधि होती है तो उसकी रिकॉर्डिंग उपलब्ध रहेगी, जिससे दोषियों की पहचान आसान हो सकेगी।
रेलवे अधिकारियों का मानना है कि सीसीटीवी निगरानी न केवल अपराधियों की पहचान में मदद करेगी बल्कि ऐसे लोगों के लिए एक मनोवैज्ञानिक दबाव भी पैदा करेगी जो ट्रेनों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं।
यात्रियों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता
रेलवे का कहना है कि पत्थरबाजी केवल रेलवे संपत्ति को नुकसान पहुंचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह यात्रियों की जान के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करती है।
कई मामलों में पत्थर ट्रेन की खिड़कियों को तोड़कर यात्रियों को घायल कर चुके हैं। तेज रफ्तार ट्रेनों पर होने वाली ऐसी घटनाएं और भी खतरनाक साबित हो सकती हैं। इसी वजह से रेलवे ने इस पूरे अभियान को “सुरक्षित रेल, सुरक्षित सफर” अभियान से जोड़ा है।
अधिकारियों के अनुसार रेलवे की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि यात्रियों को बिना किसी भय के सुरक्षित यात्रा का अनुभव मिल सके।
नरकटियागंज-मुजफ्फरपुर सेक्शन सबसे अधिक संवेदनशील
रेलवे द्वारा चिन्हित किए गए संवेदनशील रेल मार्गों में नरकटियागंज से मुजफ्फरपुर और हाजीपुर रेलखंड विशेष रूप से शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार इस वर्ष इन क्षेत्रों में दो दर्जन से अधिक पत्थरबाजी की घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं।
नरकटियागंज-कपरपुरा और मुजफ्फरपुर-रामदयालु सेक्शन को सबसे अधिक संवेदनशील माना गया है। यहां बार-बार घटनाएं सामने आने के कारण रेलवे सुरक्षा बल लगातार निगरानी बढ़ा रहा है।
आरपीएफ ने कई मामलों में आरोपियों को गिरफ्तार भी किया है, लेकिन इसके बावजूद समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकी है। यही कारण है कि अब रेलवे ने सामुदायिक भागीदारी और तकनीकी निगरानी दोनों पर समान रूप से जोर दिया है।
वंदे भारत एक्सप्रेस भी रही निशाने पर
हाल के महीनों में गोरखपुर-पाटलिपुत्र-गोरखपुर वंदे भारत एक्सप्रेस पर पत्थरबाजी की घटनाएं भी सामने आई हैं। देश की आधुनिक और हाईस्पीड ट्रेनों में शामिल वंदे भारत को निशाना बनाए जाने से रेलवे की चिंता और बढ़ गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी घटनाएं केवल संपत्ति का नुकसान नहीं करतीं, बल्कि रेलवे की छवि और यात्रियों के भरोसे को भी प्रभावित करती हैं। इसलिए रेलवे इस मामले को अत्यंत गंभीरता से ले रहा है।
जागरूकता अभियान भी चलाए जाएंगे
रेलवे प्रशासन केवल निगरानी और कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहता। गांवों और स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि लोगों को समझाया जा सके कि ट्रेनों पर पत्थर फेंकना एक गंभीर अपराध है।
इसके तहत बच्चों, युवाओं और स्थानीय समुदायों को रेलवे सुरक्षा के महत्व के बारे में जानकारी दी जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि जागरूकता बढ़ने से भविष्य में ऐसी घटनाओं में कमी आएगी।
सुरक्षित रेल यात्रा की दिशा में बड़ा कदम
रेलवे द्वारा शुरू किया गया यह अभियान यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। 140 गांवों की मैपिंग, 856 रेल मित्रों की तैनाती, हिस्ट्रीशीटरों की निगरानी और सीसीटीवी नेटवर्क का विस्तार इस बात का संकेत है कि रेलवे अब पत्थरबाजी की घटनाओं को रोकने के लिए बहुस्तरीय रणनीति पर काम कर रहा है।
यदि यह अभियान सफल होता है तो न केवल ट्रेनों पर होने वाली पत्थरबाजी की घटनाओं में कमी आएगी, बल्कि यात्रियों का भरोसा भी मजबूत होगा। रेलवे को उम्मीद है कि प्रशासन, स्थानीय समुदाय और यात्रियों के सहयोग से सुरक्षित रेल यात्रा का लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा।


