‘ऐसे मॉडल स्कूल बनाएंगे कि कोचिंग सेंटर की जरूरत नहीं पड़ेगी’, गयाजी में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का बड़ा ऐलान

गया: बिहार में शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने और सरकारी स्कूलों को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बड़ा बयान दिया है। गयाजी के अतरी विधानसभा क्षेत्र स्थित देवगांव में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ऐसी शिक्षा व्यवस्था विकसित करने की दिशा में काम कर रही है, जिससे भविष्य में छात्रों को कोचिंग संस्थानों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। उन्होंने दावा किया कि बिहार के सरकारी स्कूलों को आधुनिक सुविधाओं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से लैस किया जाएगा, ताकि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी वहीं संभव हो सके।

मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब बिहार में कोचिंग संस्थानों की भूमिका, शिक्षा व्यवस्था और छात्रों के भविष्य को लेकर लगातार बहस चल रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल स्कूलों की संख्या बढ़ाना नहीं बल्कि उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का केंद्र बनाना है।

टेक्नोलॉजी सेंटर के शिलान्यास कार्यक्रम में दिया बयान

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी गया जिले के देवगांव में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय की ओर से स्थापित किए जाने वाले टेक्नोलॉजी सेंटर के भूमि पूजन और शिलान्यास कार्यक्रम में शामिल हुए थे। लगभग 170 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस केंद्र को क्षेत्र में औद्योगिक विकास और कौशल प्रशिक्षण के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने शिक्षा, उद्योग, रोजगार, ऊर्जा और कानून-व्यवस्था जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर अपनी सरकार की प्राथमिकताओं को सामने रखा। उन्होंने कहा कि बिहार को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए शिक्षा और उद्योग दोनों क्षेत्रों में बड़े बदलाव किए जा रहे हैं।

मॉडल स्कूलों पर सरकार का फोकस

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में मॉडल स्कूलों की अवधारणा को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। इन स्कूलों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए निजी कोचिंग संस्थानों का सहारा न लेना पड़े।

उन्होंने कहा कि इन विद्यालयों में ऐसी व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं जहां छात्र लंबे समय तक अध्ययन कर सकें और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आवश्यक संसाधन भी उपलब्ध हों। सरकार की योजना है कि स्कूलों को केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं बल्कि संपूर्ण शैक्षणिक विकास का मंच बनाया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि सरकारी विद्यालयों में बेहतर शिक्षक, आधुनिक तकनीक, डिजिटल संसाधन और उन्नत शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जाए तो छात्रों को अतिरिक्त कोचिंग की आवश्यकता काफी हद तक कम हो सकती है।

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी स्कूलों में

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में विशेष रूप से मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे मॉडल विकसित करना चाहती है जहां छात्र स्कूल परिसर में ही नीट, जेईई और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सकें।

उनका मानना है कि यदि छात्रों को स्कूल स्तर पर ही गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन और संसाधन उपलब्ध हो जाएं तो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त बोझ कम होगा।

शिक्षा विशेषज्ञों का भी मानना है कि स्कूल आधारित प्रतियोगी परीक्षा तैयारी मॉडल ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है।

कानून-व्यवस्था पर भी दिया सख्त संदेश

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कानून-व्यवस्था को लेकर भी स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि अपराध और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई जारी रहनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि राज्य में सुशासन बनाए रखने के लिए कानून का राज आवश्यक है और अपराधियों के खिलाफ किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस और प्रशासन को पूरी स्वतंत्रता दी गई है ताकि वे कानून के अनुसार कार्रवाई कर सकें।

उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य ऐसा वातावरण तैयार करना है जहां आम नागरिक सुरक्षित महसूस करें और निवेशकों को भी भरोसेमंद माहौल मिले।

रोजगार को लेकर सरकार का दावा

मुख्यमंत्री ने रोजगार के मुद्दे पर भी अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में बिहार में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं।

उनके अनुसार राज्य में विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं के माध्यम से लाखों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिला है। सरकार का प्रयास है कि आने वाले वर्षों में उद्योगों और निवेश के माध्यम से रोजगार के नए अवसर और बढ़ाए जाएं।

उन्होंने कहा कि कौशल विकास और तकनीकी प्रशिक्षण पर विशेष जोर दिया जा रहा है ताकि युवा रोजगार के लिए तैयार हो सकें और उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप दक्षता हासिल कर सकें।

बिजली व्यवस्था में सुधार का जिक्र

मुख्यमंत्री ने राज्य की बिजली व्यवस्था में हुए बदलावों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बिहार में बिजली पहुंच और आपूर्ति की स्थिति पहले की तुलना में काफी बेहतर हुई है।

उन्होंने दावा किया कि राज्य में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और ग्रामीण क्षेत्रों तक भी बिजली सुविधाओं का विस्तार किया गया है। सरकार का उद्देश्य हर घर तक सस्ती और गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराना है।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में सुधार का सीधा असर उद्योग, शिक्षा और आर्थिक विकास पर पड़ता है।

सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने की योजना

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम कर रही है।

उनका कहना था कि सोलर ऊर्जा अपनाने वाले उपभोक्ताओं को अतिरिक्त लाभ देने की व्यवस्था की जा रही है। इससे न केवल बिजली बिल में कमी आएगी बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सौर ऊर्जा का उपयोग बड़े स्तर पर बढ़ता है तो राज्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में भी मदद मिलेगी।

बिहार में 5 लाख करोड़ रुपये निवेश का लक्ष्य

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार बिहार में बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि आने वाले वर्षों में लगभग 5 लाख करोड़ रुपये का निवेश लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

इसके लिए औद्योगिक नीतियों को सरल बनाया जा रहा है और निवेशकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि बड़े निवेश से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

प्रवासी बिहारियों से की अपील

मुख्यमंत्री ने बिहार से बाहर रहने वाले लोगों से भी राज्य में निवेश करने और उद्योग स्थापित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि बिहार तेजी से बदल रहा है और यहां व्यापार तथा उद्योग के लिए नई संभावनाएं पैदा हो रही हैं।

उनका मानना है कि यदि प्रवासी बिहारी राज्य में निवेश करेंगे तो इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी।

शिक्षा और विकास को जोड़ने की कोशिश

मुख्यमंत्री के पूरे संबोधन का मुख्य संदेश यह था कि बिहार का भविष्य शिक्षा, कौशल, उद्योग और सुशासन के समन्वय से तय होगा। मॉडल स्कूलों के माध्यम से कोचिंग संस्कृति पर निर्भरता कम करने की बात हो या फिर निवेश और रोजगार बढ़ाने का लक्ष्य, सरकार विकास के विभिन्न क्षेत्रों को एक साथ आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है।

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि मॉडल स्कूलों को लेकर की गई घोषणाएं किस रूप में जमीन पर उतरती हैं और क्या वास्तव में भविष्य में सरकारी स्कूल छात्रों के लिए इतने सक्षम बन पाते हैं कि उन्हें कोचिंग संस्थानों की आवश्यकता कम महसूस हो। फिलहाल मुख्यमंत्री के इस बयान ने शिक्षा और कोचिंग व्यवस्था को लेकर नई बहस जरूर शुरू कर दी है।

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