एआई की निगरानी में सुरक्षित हो रहे रेलवे स्टेशन: पूर्व रेलवे की पहल से यात्रियों को मिल रहा भरोसा

कोलकाता, रेलवे स्टेशनों पर बढ़ती भीड़ और सुरक्षा चुनौतियों के बीच अब तकनीक ने एक नई उम्मीद जगाई है। पूर्व रेलवे द्वारा लागू की जा रही एआई आधारित निगरानी प्रणाली न केवल अपराधों पर नजर रख रही है, बल्कि खोए हुए बच्चों को उनके परिवारों से मिलाने जैसे मानवीय कार्यों में भी बड़ी भूमिका निभा रही है।

कल्पना कीजिए किसी व्यस्त स्टेशन का दृश्य—भीड़, अफरा-तफरी और ट्रेन पकड़ने की जल्दबाजी। ऐसे माहौल में अगर कोई बच्चा अपने परिजनों से बिछड़ जाए तो उसे ढूंढना बेहद कठिन हो जाता है। लेकिन अब एआई से लैस कैमरे कुछ ही सेकंड में ऐसे बच्चों की पहचान कर सकते हैं और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) को तुरंत अलर्ट भेज देते हैं, जिससे समय रहते उन्हें सुरक्षित उनके परिवार तक पहुंचाया जा सके।

आईपी आधारित निगरानी प्रणाली से 24 घंटे नजर

यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए भारतीय रेलवे प्रमुख स्टेशनों पर आईपी आधारित वीडियो सर्विलांस सिस्टम (VSS) स्थापित कर रहा है। निर्भया फंड से संचालित इस परियोजना के तहत हाई-डेफिनिशन कैमरे, 24×7 निगरानी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।

इस सिस्टम की खास बात यह है कि इसमें फेस रिकग्निशन जैसी उन्नत सुविधाएं शामिल हैं, जिससे संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत पहचान हो सके। स्टेशन के प्रवेश द्वार, प्लेटफॉर्म, वेटिंग हॉल, टिकट काउंटर और पार्किंग जैसे हर महत्वपूर्ण स्थान को कैमरों की निगरानी में लाया गया है। इन कैमरों से मिलने वाली फीड को स्थानीय आरपीएफ चौकियों के साथ-साथ मंडल और जोन स्तर पर भी मॉनिटर किया जाता है।

तेजी से बढ़ रहा नेटवर्क, सैकड़ों स्टेशन कवर

वित्तीय वर्ष 2025-26 में इस परियोजना का विस्तार तेजी से हुआ है। पहले से 191 स्टेशनों पर यह सिस्टम लागू था, वहीं इस साल 63 और स्टेशनों पर 1,243 नए कैमरे लगाए गए हैं।

इनमें हावड़ा मंडल के 14 स्टेशन, सियालदह मंडल के 47 स्टेशन और मालदा मंडल के 2 स्टेशन शामिल हैं। वहीं आसनसोल मंडल में भी सुरक्षा को मजबूत करते हुए 16 आरपीएफ चौकियों पर 48 अतिरिक्त कैमरे लगाए गए हैं। इसके अलावा 20 छोटे स्टेशनों को भी इस निगरानी नेटवर्क से जोड़ा गया है, जिससे सुरक्षा का दायरा और व्यापक हो गया है।

बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा पर खास फोकस

तकनीक के साथ-साथ जमीनी स्तर पर भी पूर्व रेलवे की आरपीएफ टीम सक्रिय रूप से काम कर रही है। “ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते” के तहत 1,407 बच्चों को सुरक्षित बचाया गया, जिनमें 876 लड़के और 531 लड़कियां शामिल हैं।

वहीं “ऑपरेशन आहट” के जरिए मानव तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 68 तस्करों को गिरफ्तार किया गया और 124 बच्चों को उनके चंगुल से छुड़ाया गया। इस अभियान को मजबूत करने के लिए 70 एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट्स लगातार काम कर रही हैं।

इसके अलावा “ऑपरेशन डिग्निटी” के तहत 136 वयस्कों, जिनमें 84 महिलाएं शामिल हैं, को सुरक्षित बचाया गया है। यह पहल महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

सामाजिक पहल: एसिड अटैक पीड़ितों को मिला सहारा

पूर्व रेलवे ने केवल सुरक्षा तक ही खुद को सीमित नहीं रखा है, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए एसिड अटैक पीड़ित महिलाओं के लिए “एक स्टेशन एक उत्पाद” योजना के तहत स्टॉल उपलब्ध कराए हैं। इस पहल का उद्देश्य इन महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना और समाज में सम्मानजनक स्थान दिलाना है।

रेलवे का लक्ष्य—हर यात्रा हो सुरक्षित

पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिबराम माझि के अनुसार, इन सभी पहलों का उद्देश्य यात्रियों को सुरक्षित और भरोसेमंद वातावरण प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि रेलवे लगातार तकनीक और मानवीय प्रयासों के जरिए सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत कर रहा है, ताकि हर यात्री निश्चिंत होकर सफर कर सके।

रेलवे की यह पहल आने वाले समय में देश के अन्य हिस्सों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है, जहां तकनीक और संवेदनशीलता मिलकर सुरक्षा का नया मानक तय कर रही हैं।

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