नई दिल्ली/पटना | 26 फरवरी, 2026 बिहार और झारखंड सहित चार राज्यों के रेल यात्रियों के लिए केंद्र सरकार ने खुशियों का पिटारा खोल दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने भारतीय रेलवे के नेटवर्क विस्तार के लिए 9,072 करोड़ रुपये की तीन महत्वपूर्ण मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को हरी झंडी दे दी है। इस फैसले से न केवल ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी, बल्कि बिहार के मुख्य रेल खंडों पर लगने वाले जाम (Congestion) से भी बड़ी राहत मिलेगी।
बिहार को क्या मिला? पुनारख-किऊल खंड का कायाकल्प
इस योजना में बिहार के लिए सबसे महत्वपूर्ण पुनारख-किऊल तीसरी और चौथी लाइन का निर्माण है।
- महत्व: यह खंड पटना-हावड़ा मुख्य रेल मार्ग का एक व्यस्त हिस्सा है। तीसरी और चौथी लाइन बिछ जाने से ट्रेनों के परिचालन में होने वाली देरी कम होगी और मालगाड़ियों के साथ-साथ पैसेंजर ट्रेनों की संख्या बढ़ाई जा सकेगी।
- प्रभाव: इस परियोजना से लखीसराय और पटना जिले के लाखों रेल यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा।
झारखंड का फायदा: गम्हरिया-चांडिल लाइन का विस्तार
झारखंड के औद्योगिक गलियारे को मजबूती देते हुए गम्हरिया-चांडिल तीसरी और चौथी लाइन को भी मंजूरी दी गई है। यह परियोजना इस्पात और लौह अयस्क की ढुलाई के लिए लाइफलाइन साबित होगी, जिससे टाटा नगर और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने में मदद मिलेगी।
परियोजनाओं की 5 बड़ी बातें: एक नजर में
- विस्तार: इन तीन परियोजनाओं (गोंडिया-जबलपुर दोहरीकरण सहित) से रेलवे नेटवर्क में कुल 307 किलोमीटर की वृद्धि होगी।
- समय सीमा: केंद्र सरकार ने इन परियोजनाओं को वर्ष 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
- गांवों का विकास: प्रस्तावित मल्टी-ट्रैकिंग से लगभग 5,407 गांवों की 98 लाख आबादी को बेहतर रेल संपर्क मिलेगा।
- माल ढुलाई: क्षमता बढ़ने से प्रति वर्ष 52 मिलियन टन (MTPA) अतिरिक्त माल की ढुलाई हो सकेगी, जिससे कोयला, सीमेंट और इस्पात जैसे उद्योगों को गति मिलेगी।
- पर्यटन को पंख: इन रूटों के विकसित होने से जबलपुर के धुआंधार जलप्रपात से लेकर झारखंड के दलमा वन्यजीव अभ्यारण्य और चांडिल बांध तक पहुँचना आसान हो जाएगा।
पर्यावरण और अर्थव्यवस्था: 1 करोड़ वृक्षारोपण के बराबर लाभ
यह परियोजना केवल पटरियों का विस्तार नहीं, बल्कि पर्यावरण की दिशा में भी बड़ा कदम है:
- तेल की बचत: रेल परिचालन कुशल होने से सालाना 6 करोड़ लीटर तेल के आयात में कमी आएगी।
- कार्बन फुटप्रिंट: कार्बन उत्सर्जन में 30 करोड़ किलोग्राम की कटौती होगी, जो एक करोड़ पेड़ लगाने के पर्यावरणीय प्रभाव के बराबर है।
प्रधानमंत्री गति शक्ति: आत्मनिर्भर भारत का विजन
यह पूरा खाका ‘प्रधानमंत्री गति शक्ति’ राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत तैयार किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य परिवहन लागत को कम करना और सेवाओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना है। इससे बिहार और झारखंड के युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए द्वार खुलेंगे।
VOB का नजरिया: कागजों से पटरियों तक का सफर
केंद्र सरकार की यह मंजूरी बिहार के बुनियादी ढांचे के लिए ‘संजीवनी’ की तरह है। पुनारख-किऊल जैसे व्यस्त रूट पर तीसरी और चौथी लाइन की मांग वर्षों पुरानी थी। हालांकि, असली परीक्षा 2030-31 तक इसे समय पर पूरा करने की होगी। अगर यह समय पर पूरा होता है, तो बिहार की विकास दर को नई पटरी मिलनी तय है।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।


