बिहार में ग्रामीण अर्थव्यवस्था का ‘महा-प्लान’: 725 नए हाट-बाजारों से चमकेगी किसानों और जीविका दीदियों की किस्मत; जानें क्या है ‘G-RAM’ योजना

पटना | 26 फरवरी, 2026 बिहार के ग्रामीण इलाकों की तस्वीर बदलने के लिए राज्य सरकार ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। ‘विकसित भारत-जी राम जी’ (G-RAM Ji) योजना के तहत अब गांव-गांव में आधुनिक सुख-सुविधाओं से लैस हाट और बाजार विकसित किए जाएंगे। सरकार ने कुल 725 नए केंद्रों की मंजूरी दी है, जिनमें 447 हाट और 278 बाजार शामिल हैं। यह पहल न केवल स्थानीय उत्पादों को बड़ा मंच देगी, बल्कि ‘गारंटी फॉर रोजगार’ के तहत लाखों युवाओं और महिलाओं के लिए स्वरोजगार के द्वार भी खोलेगी।

तीन श्रेणियों में होगा विकास: जमीन के हिसाब से मिलेंगी सुविधाएं

​ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव पंकज कुमार के अनुसार, इन हाट-बाजारों को उनकी जमीन की उपलब्धता के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटा गया है। नीचे दी गई टेबल से आप समझ सकते हैं कि आपके क्षेत्र में किस स्तर का बाजार बनने वाला है:

श्रेणी

क्षेत्रफल (डिसमिल/एकड़)

हाट की संख्या

बाजार की संख्या

मुख्य विशेषताएं

प्रथम श्रेणी

20 – 49 डिसमिल

136

73

5 चबूतरे, 3 स्थाई दुकानें (जीविका हेतु), शौचालय, पेयजल।

द्वितीय श्रेणी

50 – 99 डिसमिल

125

96

13 चबूतरे, 4 स्थाई दुकानें, कार्यालय, मल्टी-पर्पस स्टोर।

तृतीय श्रेणी

1 एकड़ या अधिक

186

109

16 चबूतरे, 6 स्थाई दुकानें, 2 मल्टी-पर्पस स्टोर, बड़ा कार्यालय।

सिर्फ बाजार नहीं, ‘स्मार्ट हब’ होंगे ये हाट

​इन बाजारों को पारंपरिक हाटों से अलग ‘स्मार्ट’ बनाया जा रहा है। यहाँ निम्नलिखित सुविधाएं अनिवार्य होंगी:

  • जीविका दीदियों का दबदबा: हर बाजार में जीविका दीदियों के लिए स्थाई दुकानें और ‘दीदी की रसोई’ का आवंटन होगा।
  • स्वच्छता का ध्यान: कचरा प्रबंधन के लिए हर जगह गार्बेज डिस्पोजल पिट बनाया जाएगा।
  • डिजिटल कनेक्टिविटी: सभी हाट-बाजारों को ई-नाम (e-NAM) योजना से जोड़ा जाएगा, ताकि किसान ऑनलाइन भी अपनी उपज बेच सकें।

महिला सशक्तिकरण: 1.80 करोड़ महिलाओं को सीधा लाभ

​प्रधान सचिव ने बताया कि यह योजना मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना का ही एक विस्तार है। राज्य में अब तक करीब 1 करोड़ 80 लाख महिलाओं के खातों में 10-10 हजार रुपये की किस्त भेजी जा चुकी है। अब इन हाट-बाजारों के बन जाने से उन महिलाओं को अपने उत्पादों (जैसे आचार, पापड़, हस्तशिल्प) को बेचने के लिए कहीं दूर नहीं जाना पड़ेगा।

प्रशासनिक ढांचा और रख-रखाव

​बाजारों के निर्माण के बाद इनके संचालन के लिए जिलाधिकारी (DM) की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति बनाई जाएगी। इस समिति में सहायक अभियंता, कार्यपालक अभियंता और वरीय उप समाहर्ता शामिल होंगे। दुकानों के आवंटन का अंतिम निर्णय जीविका के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी लेंगे।

“बिहार सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इन हाट-बाजारों से छोटे किसानों और व्यापारियों को बिचौलियों से मुक्ति मिलेगी और स्थानीय उत्पादों को बेहतर दाम मिल सकेगा।”

श्रवण कुमार, ग्रामीण विकास एवं परिवहन मंत्री, बिहार सरकार।

VOB का नजरिया: आत्मनिर्भर गांव की ओर बढ़ते कदम

​बिहार जैसे कृषि प्रधान राज्य में ‘विपणन’ (Marketing) हमेशा से एक कमजोर कड़ी रही है। अक्सर किसान अपनी फसल उगाने के बाद उसे सही दाम पर बेचने के लिए संघर्ष करते हैं। ‘जी राम जी’ योजना के तहत 725 बाजारों का जाल बिछाना एक ‘गेम चेंजर’ साबित हो सकता है। खास तौर पर जीविका दीदियों के लिए स्थाई दुकानों का प्रावधान महिला सशक्तिकरण को नारों से निकालकर धरातल पर ले आएगा।

ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।

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