राबड़ी देवी की बिगड़ी तबीयत, मिलने पहुंचे तेज प्रताप यादव; बोले- ‘सुरक्षा किसी ने वापस नहीं की, दबाव में थे जवान’

पटना: बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की तबीयत खराब होने की सूचना मिलने के बाद उनके बड़े बेटे Tej Pratap Yadav शनिवार को 10 सर्कुलर रोड स्थित आवास पहुंचे। इस दौरान आवास के बाहर बड़ी संख्या में राजद नेता और कार्यकर्ता मौजूद थे, जो लालू परिवार की सुरक्षा में कथित कटौती के विरोध में धरना-प्रदर्शन कर रहे थे।

राबड़ी देवी से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में तेज प्रताप यादव ने सुरक्षा विवाद को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि उनकी मां ने किसी भी सुरक्षाकर्मी को वापस नहीं किया है। उनके अनुसार सुरक्षा कर्मियों पर लगातार दबाव बनाया जा रहा था और उन्हें बार-बार बताया जा रहा था कि उनका कमांड समाप्त कर दिया गया है।

तेज प्रताप यादव ने कहा, “सुरक्षा किसी ने वापस नहीं की है। सुरक्षाकर्मियों को लगातार कहा जा रहा था कि उनका कमांड कट गया है। हमारी माता जी ने सुरक्षा वापस नहीं की है। मैं अपनी मां का हालचाल जानने आया हूं, क्योंकि उनकी तबीयत ठीक नहीं है।”

उन्होंने राबड़ी देवी के स्वास्थ्य को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि परिवार लगातार उनकी सेहत पर नजर बनाए हुए है और डॉक्टरों की सलाह के अनुसार उनका इलाज चल रहा है।

महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए तेज प्रताप यादव ने कहा कि बिहार में सबसे ज्यादा जरूरत बहू-बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की है। उन्होंने राज्य सरकार से महिलाओं की सुरक्षा को लेकर ठोस कदम उठाने की मांग करते हुए कहा कि आम जनता, खासकर महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।

दरअसल, हाल के दिनों में Lalu Prasad Yadav और राबड़ी देवी की सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव को लेकर बिहार की राजनीति गरमा गई है। सुरक्षा समीक्षा के बाद दोनों नेताओं की जेड प्लस सुरक्षा वापस लिए जाने के फैसले पर राष्ट्रीय जनता दल लगातार विरोध जता रहा है। पार्टी का आरोप है कि यह फैसला राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है।

इसी बीच राबड़ी देवी की तबीयत खराब होने और उनसे मिलने पहुंचे तेज प्रताप यादव की तस्वीरों ने पूरे घटनाक्रम को नया राजनीतिक और मानवीय आयाम दे दिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मुलाकात सिर्फ पारिवारिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि मौजूदा परिस्थितियों में परिवार की एकजुटता का भी संदेश देती है।

फिलहाल लालू परिवार की सुरक्षा, सरकारी आवास और उससे जुड़े फैसले बिहार की राजनीति के केंद्र में बने हुए हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।

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