बिहार में मतदाता सूची पर उठे सवाल, निर्वाचन आयोग ने आरोपों को किया खारिज

पटना। बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चल रही महागठबंधन की मतदाता अधिकार यात्रा के बीच निर्वाचन आयोग ने विपक्ष के आरोपों को बेबुनियाद बताया है। आयोग ने कहा कि वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के सभी आरोप निराधार हैं और एसआईआर का मकसद केवल मतदाता सूची की त्रुटियों को सुधारना है।

राहुल गांधी को नोटिस, हलफनामा या माफी का विकल्प

मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने रविवार को सहयोगी आयुक्तों डॉ. सुखविंदर सिंह संधु और डॉ. विवेक जोशी के साथ संवाददाता सम्मेलन में कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आरोप आधारहीन हैं। आयोग ने स्पष्ट किया कि राहुल गांधी को सात दिन में हलफनामा देना होगा या फिर देश से माफी मांगनी होगी। उनके पास तीसरा कोई विकल्प नहीं है।

65 लाख नाम हटाए गए, सूची वेबसाइट पर उपलब्ध

सीईसी ने बताया कि बिहार की मसौदा मतदाता सूची से 65 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। इनमें मृतक, स्थानांतरित, अनुपस्थित और दोहरी प्रविष्टि वाले मतदाता शामिल हैं। शीर्ष अदालत के निर्देश के 56 घंटे के भीतर ये सूची जिलों की वेबसाइटों पर बूथवार और श्रेणीवार अपलोड कर दी गई है।

वोटर लिस्ट पर उठे सवाल और आयोग के जवाब

  • सवाल: कई मतदाताओं के नाम के आगे पता ‘जीरो’ क्यों लिखा गया?
    जवाब: बहुत से मतदाताओं के पास घर नहीं है और वे सड़कों पर रहते हैं। ऐसे मामलों में पता ‘जीरो’ दर्ज किया जाता है।
  • सवाल: चुनाव आयोग डाटा क्यों नहीं जारी करता?
    जवाब: सुप्रीम कोर्ट ने 2019 में कहा था कि ऐसा करना मतदाता की निजता का उल्लंघन होगा। इसलिए यह आरोप गलत है।
  • सवाल: आयोग कैमरे की फुटेज क्यों नहीं देता?
    जवाब: क्या आयोग मतदाता, चाहे वह किसी की मां हो, बहू हो या बेटी हो, का वीडियो सार्वजनिक कर सकता है? यह निजता का गंभीर उल्लंघन होगा।
  • सवाल: दो अलग-अलग राज्यों में एक जैसे एपिक नंबर क्यों?
    जवाब: डुप्लीकेट एपिक संभव हैं। एक व्यक्ति बंगाल में और दूसरा हरियाणा में एक ही नंबर के साथ दर्ज हो सकता है।

 

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