
पूर्णिया। बिहार के सीमांचल क्षेत्र में बढ़ते अपराध और आपसी रंजिश के खूनी खेल ने एक बार फिर सामाजिक समरसता को झकझोर कर रख दिया है। पूर्णिया जिले के बैसा प्रखंड अंतर्गत अनगढ़ थाना क्षेत्र के धुसमल गांव में एक निर्वाचित जन प्रतिनिधि की बेरहमी से हत्या कर दी गई। वार्ड संख्या 9 के सदस्य अशफाक अंसारी (57 वर्ष) को उनके अपने ही घर के आंगन में घुसकर कुछ लोगों ने लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया। यह घटना तब घटी जब पूरा गांव दोपहर की सुस्ती में था। आपसी विवाद, जिसे ग्रामीण भाषा में ‘गोतिया की रंजिश’ कहा जाता है, इस कदर बढ़ गई कि उसने एक हंसते-खेलते परिवार के मुखिया और गांव के एक सक्रिय जन प्रतिनिधि की जान ले ली। शनिवार, 25 अप्रैल 2026 की सुबह तक गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है और पुलिस की भारी तैनाती देखी जा रही है। इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य महिला आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि अन्य आरोपी अब भी फरार बताए जा रहे हैं।
दोपहर का खूनी मंजर: जब आंगन बना कत्लगाह
घटनाक्रम की शुरुआत गुरुवार, 23 अप्रैल की दोपहर करीब एक बजे हुई। प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों के अनुसार, अशफाक अंसारी अपने घर में आराम कर रहे थे। दोपहर करीब 1:00 से 2:30 बजे के बीच, गांव के ही कुछ लोग, जो उनके दूर के रिश्तेदार (गोतिया) भी बताए जाते हैं, अचानक उनके घर के आंगन में जबरन घुस आए। हमलावरों की नीयत पहले से ही खराब थी। उनके हाथों में लाठी-डंडे और अन्य हथियार थे।
परिजनों का आरोप है कि हमलावरों ने बिना किसी चेतावनी के अशफाक अंसारी पर हमला बोल दिया। हमले के दौरान अशफाक ने बचने की कोशिश की, लेकिन हमलावरों की संख्या अधिक होने के कारण वे बेबस हो गए। उन्हें जमीन पर पटक दिया गया और शरीर के नाजुक हिस्सों पर प्रहार किए गए। चीख-पुकार सुनकर जब तक घर की महिलाएं और बच्चे उन्हें बचाने के लिए दौड़े, तब तक हमलावर उन्हें लहूलुहान कर चुके थे। परिजनों का कहना है कि अशफाक को इतनी गंभीर आंतरिक चोटें आई थीं कि उनकी स्थिति देखते ही देखते बिगड़ने लगी और अंततः उन्होंने दम तोड़ दिया।
पिटाई का आरोप: छह लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी
इस जघन्य हत्या के बाद मृतक की पुत्री सुहाना ने अदम्य साहस दिखाते हुए कानून का रास्ता अपनाया है। सुहाना ने अनगढ़ थाने में लिखित आवेदन देकर गांव के ही छह लोगों को अपने पिता की हत्या का मुख्य आरोपी बनाया है। पुलिस को दिए गए आवेदन में सुहाना ने आरोप लगाया है कि गांव के ही अफसर आलम उर्फ मुन्ना की पत्नी नबीसता, नैमोद्दीन, नाजमीन, खुशनूर, खुशनंती और नफीस ने मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया है।
सुहाना का कहना है कि ये सभी लोग एक राय होकर उनके घर में घुसे थे और उनका एकमात्र उद्देश्य उनके पिता की जान लेना था। आवेदन में यह भी बताया गया है कि हमले के दौरान परिवार के अन्य सदस्यों को भी डराया-धमकाया गया ताकि कोई बीच-बचाव न कर सके। पीड़ित परिवार ने पुलिस प्रशासन से सभी आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी, परिवार को सुरक्षा प्रदान करने और स्पीडी ट्रायल के माध्यम से कड़ी सजा दिलाने की मांग की है।
पुलिस की कार्रवाई: मुख्य आरोपी नबीसता सलाखों के पीछे
मामले की गंभीरता और मृतक के एक जन प्रतिनिधि होने के कारण अनगढ़ पुलिस तुरंत हरकत में आई। सूचना मिलते ही थानाध्यक्ष विकास कुमार पुलिस बल के साथ धुसमल गांव पहुँचे और घटनास्थल का मुआयना किया। पुलिस ने साक्ष्य जुटाने के साथ-साथ आरोपियों की धरपकड़ के लिए छापेमारी शुरू की।
थानाध्यक्ष विकास कुमार ने बताया कि सुहाना के आवेदन के आधार पर हत्या की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य महिला आरोपी नबीसता को गिरफ्तार कर लिया है। प्रारंभिक पूछताछ के बाद उसे जेल भेज दिया गया है। अन्य पांच आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि फरार आरोपियों को भी जल्द ही दबोच लिया जाएगा। शव को पोस्टमार्टम के लिए पूर्णिया मेडिकल कॉलेज भेजा गया है, जिसकी विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों की वैज्ञानिक पुष्टि हो सकेगी।
गोतिया विवाद: ग्रामीण समाज का एक कड़वा सच
धुसमल गांव की इस घटना के पीछे ‘गोतिया’ (रक्त संबंधियों) का पुराना विवाद बताया जा रहा है। ग्रामीण बिहार में गोतिया विवाद अक्सर जमीन के छोटे से टुकड़े, रास्ते के विवाद या पुरानी सामाजिक रंजिश को लेकर होता है। अशफाक अंसारी के मामले में भी बताया जा रहा है कि दोनों पक्षों के बीच काफी समय से तनाव चल रहा था। घटना से कुछ समय पहले भी दोनों पक्षों में तीखी बहसबाजी हुई थी, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि यह बहस एक खूनी संघर्ष में बदल जाएगी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अशफाक अंसारी एक सुलझे हुए व्यक्ति थे और वार्ड सदस्य के रूप में गांव के विकास कार्यों में सक्रिय रहते थे। उनकी इस तरह से हत्या होना पूरे पंचायत के लिए एक बड़ा झटका है। ग्रामीण क्षेत्रों में आपसी विवादों को सुलझाने के लिए बनी पंचायती व्यवस्था की विफलता भी यहाँ नजर आती है, जहाँ एक जन प्रतिनिधि खुद ही रंजिश का शिकार हो गया।
धुसमल में तनाव और सुरक्षा के कड़े इंतजाम
वार्ड सदस्य की हत्या के बाद धुसमल गांव में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है, लेकिन अंदर ही अंदर जनाक्रोश भी सुलग रहा है। पीड़ित पक्ष के समर्थकों और ग्रामीणों में आरोपियों के प्रति भारी गुस्सा है। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने गांव में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की है। पुलिस गश्ती बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना या प्रतिशोध की कार्रवाई को रोका जा सके।
गांव के प्रबुद्ध जनों ने पुलिस से शांति व्यवस्था बनाए रखने और असली दोषियों को कड़ी सजा दिलाने की अपील की है। लोगों का कहना है कि अगर एक वार्ड सदस्य ही अपने घर के भीतर सुरक्षित नहीं है, तो आम जनता की सुरक्षा का क्या होगा? यह सवाल प्रशासन के सामने एक बड़ी चुनौती बनकर खड़ा है।


