​पूर्णिया में मासूम की गला रेतकर हत्या: अमौर में सनसनी

पूर्णिया। बिहार के सीमांचल इलाके से रूह कंपा देने वाली एक ऐसी वारदात सामने आई है, जिसने न केवल मानवीय संवेदनाओं को झकझोर दिया है, बल्कि कानून-व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा पर भी गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। पूर्णिया जिले के अमौर थाना क्षेत्र में एक पांच वर्षीय मासूम बच्ची की गला रेतकर बेरहमी से हत्या कर दी गई। सोमवार को जब इस घटना की जानकारी सार्वजनिक हुई, तो पूरे इलाके में आक्रोश और दहशत का माहौल फैल गया। एक अबोध बच्ची, जिसे शायद दुनिया की बुराइयों का आभास तक नहीं था, उसे जिस क्रूरता के साथ मौत के घाट उतारा गया, उसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए वैज्ञानिक अनुसंधान शुरू कर दिया है, लेकिन हत्या के पीछे के कारणों और हत्यारे की पहचान अभी भी एक पहेली बनी हुई है। ग्रामीण सड़कों पर सन्नाटा पसरा है और हर आंख में इंसाफ की उम्मीद के साथ-साथ एक अनजाना खौफ तैर रहा है।

शाम की वह मनहूस घड़ी और लापता मासूम

​घटना की शुरुआत रविवार की शाम को हुई, जब अमौर थाना क्षेत्र के एक गांव में रहने वाली पांच वर्षीय बच्ची रोज की तरह अपने घर के बाहर खेलने निकली थी। परिजनों को जरा भी अंदाजा नहीं था कि खेल-कूद की यह सामान्य सी शाम उनके जीवन के सबसे बड़े अंधकार में बदलने वाली है। जब अंधेरा घिरने लगा और बच्ची घर वापस नहीं लौटी, तो माता-पिता की चिंता बढ़ने लगी। आसपास के घरों और खेल के मैदानों में तलाश की गई, लेकिन बच्ची का कहीं कोई सुराग नहीं मिला।

​परिजनों की बेचैनी बढ़ती गई और गांव के अन्य लोग भी इस तलाश में जुट गए। रात के करीब साढ़े आठ बज चुके थे, जब गांव के ही एक सुनसान हिस्से में टॉर्च की रोशनी एक ऐसी जगह पड़ी जहाँ का दृश्य देखकर लोगों के पैरों तले जमीन खिसक गई। झाड़ियों के पीछे मासूम बच्ची का बेजान शरीर पड़ा हुआ था। उसकी बेरहमी से हत्या की गई थी और गला पूरी तरह रेता हुआ था। बच्ची के कपड़े खून से लथपथ थे और उसकी आंखें मानो समाज से सवाल पूछ रही थीं। चीख-पुकार और करुण क्रंदन के बीच पूरे गांव में यह खबर आग की तरह फैल गई।

पुलिस की सक्रियता और बायसी एसडीपीओ का बयान

​घटना की सूचना मिलते ही बायसी अनुमंडल पुलिस अधिकारी (SDPO) जितेंद्र पांडेय दलबल के साथ मौके पर पहुँचे। पुलिस ने तुरंत घटनास्थल को घेरे में ले लिया ताकि कोई भी साक्ष्य नष्ट न हो सके। जितेंद्र पांडेय ने मीडिया से बात करते हुए घटना की पुष्टि की और बताया कि बच्ची रविवार शाम से लापता थी। परिजनों द्वारा खोजबीन के दौरान रात करीब साढ़े आठ बजे उसका शव बरामद किया गया। पुलिस अधिकारी ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह मामला जघन्य हत्या का है और अपराधी ने अत्यंत क्रूरता का परिचय दिया है।

​प्रशासन ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए घटनास्थल पर एफएसएल (FSL) यानी विधि विज्ञान प्रयोगशाला की टीम को बुलाया। वैज्ञानिक टीम ने मौके से खून के नमूने, उंगलियों के निशान और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्रित किए हैं। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या हत्या से पहले बच्ची के साथ किसी तरह की अन्य प्रताड़ना या दुष्कर्म जैसी घटना हुई थी। शव को पोस्टमार्टम के लिए पूर्णिया सदर अस्पताल भेज दिया गया है, जहाँ डॉक्टरों का एक पैनल वीडियोग्राफी के साथ शव परीक्षण करेगा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सटीक समय और संघर्ष के निशानों की जानकारी मिल पाएगी।

तफ्तीश के विभिन्न पहलू: पुरानी रंजिश या कुछ और?

​पूर्णिया पुलिस इस हत्याकांड को सुलझाने के लिए कई बिंदुओं पर काम कर रही है। अमौर जैसे ग्रामीण इलाकों में अक्सर जमीनी विवाद या आपसी रंजिश के कारण कमजोरों को निशाना बनाने की प्रवृत्ति देखी गई है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या बच्ची के परिवार का गांव में किसी से कोई पुराना विवाद चल रहा था? क्या किसी ने बदले की भावना से इस मासूम की जान ली है?

​इसके अलावा, पुलिस ‘साइको किलर’ या किसी विक्षिप्त व्यक्ति की संलिप्तता की संभावना से भी इनकार नहीं कर रही है। जिस तरह से गला रेता गया है, वह किसी पेशेवर अपराधी या गहरी नफरत से भरे व्यक्ति का काम हो सकता है। ग्रामीण इलाकों में तंत्र-मंत्र या अंधविश्वास के कारण दी जाने वाली बलि जैसे कोणों पर भी दबी जुबान में चर्चा हो रही है, हालांकि पुलिस ने अभी तक इस दिशा में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। आसपास के सीसीटीवी कैमरों (यदि कहीं मौजूद हों) और संदिग्धों के मोबाइल लोकेशन की भी जांच की जा रही है ताकि रविवार शाम की गतिविधियों का पता लगाया जा सके।

खौफ के साये में अमौर: ग्रामीणों का आक्रोश

​इस जघन्य हत्याकांड के बाद अमौर क्षेत्र के ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। लोगों का कहना है कि अगर पांच साल की बच्ची अपने घर के बाहर सुरक्षित नहीं है, तो फिर सुरक्षा के दावों का क्या मतलब? सोमवार सुबह से ही गांव में भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है, लेकिन ग्रामीणों की मांग है कि हत्यारे की गिरफ्तारी जल्द से जल्द हो और उसे स्पीडी ट्रायल के जरिए फांसी की सजा दिलाई जाए।

​स्थानीय निवासियों ने बताया कि इस घटना के बाद से गांव के बच्चों ने घर से बाहर निकलना बंद कर दिया है। महिलाएं डरी हुई हैं और हर कोई अपने बच्चों को लेकर आशंकित है। इस वारदात ने इलाके के सामाजिक ताने-बाने को भी चोट पहुँचाई है। ग्रामीण संगठनों ने अल्टीमेटम दिया है कि यदि 24 घंटे के भीतर पुलिस किसी नतीजे पर नहीं पहुँचती है, तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। पुलिस प्रशासन लगातार लोगों से शांति बनाए रखने और जांच में सहयोग करने की अपील कर रहा है।

सुरक्षा व्यवस्था और पुलिसिंग पर सवाल

​पूर्णिया जैसे सीमावर्ती जिले में अपराध की बढ़ती घटनाएं अक्सर सुर्खियों में रहती हैं, लेकिन एक मासूम की ऐसी हत्या ने सुरक्षा दावों की पोल खोल दी है। गश्ती दल की सक्रियता और ग्रामीण खुफिया तंत्र (चौकीदार प्रणाली) की विफलता पर भी सवाल उठ रहे हैं। क्या पुलिस की मौजूदगी केवल कागजों तक सीमित है? आखिर कैसे एक अपराधी इतनी बड़ी वारदात को अंजाम देकर आसानी से फरार हो गया?

​विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। नेताओं का आरोप है कि बिहार में अपराधियों के मन से कानून का खौफ खत्म हो चुका है। हालांकि, स्थानीय प्रशासन का दावा है कि वे बहुत जल्द इस गुत्थी को सुलझा लेंगे। पुलिस की कई टीमें संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं और कुछ लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में भी लिया गया है।

न्याय की प्रतीक्षा में सिसकती इंसानियत

​अमौर की यह घटना केवल पूर्णिया की नहीं, बल्कि पूरे समाज की विफलता है। एक पांच वर्षीय बच्ची का भविष्य उन क्रूर हाथों ने छीन लिया, जिन्हें शायद कभी पकड़े जाने का डर नहीं था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और एफएसएल की जांच इस मामले में निर्णायक साबित होगी। लेकिन सवाल यह है कि क्या हम एक ऐसा समाज बना पाए हैं जहाँ हमारे बच्चे निर्भय होकर खेल सकें?

​जितेंद्र पांडेय और उनकी टीम के सामने अब यह चुनौती है कि वे जल्द से जल्द असली गुनहगार को बेनकाब करें। मृतका के माता-पिता की पथराई आंखें केवल एक ही सवाल पूछ रही हैं—उनकी बेटी का क्या कसूर था? जब तक हत्यारा सलाखों के पीछे नहीं पहुँचता, तब तक अमौर की हवाओं में व्याप्त यह खौफ कम नहीं होगा। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ इस मामले की पल-पल की अपडेट आप तक पहुँचाता रहेगा। इंसाफ की इस लड़ाई में पूरा बिहार उस पीड़ित परिवार के साथ खड़ा है।

  • ये भी पढ़े..

    बिहार के महाधिवक्ता पीके शाही ने दिया इस्तीफा, सम्राट सरकार में नए एडवोकेट जनरल की तलाश शुरू

    Share Add as a preferred…

    टेंडर घोटाले और BPSC परीक्षा पर जन सुराज का हमला, न्यायिक निगरानी में जांच की मांग; कार्रवाई में देरी पर उठाए सवाल

    Share Add as a preferred…