पूर्णिया में रिश्तों की तल्खी ने ली एक शिक्षक की जान: मोबाइल पर पत्नी से कहासुनी के बाद सहायक शिक्षक ने की खुदकुशी; बोचाही के किराये के कमरे में पसरा सन्नाटा

पूर्णिया/भवानीपुर। रिश्तों में उपजी कड़वाहट और क्षणिक आवेश कभी-कभी ऐसे खौफनाक अंजाम की ओर ले जाते हैं, जिसकी कल्पना करना भी मुश्किल होता है। बिहार के पूर्णिया जिले के भवानीपुर प्रखंड से एक ऐसी ही हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहाँ शिक्षा के उजियारे को बच्चों तक पहुँचाने वाले एक युवा शिक्षक ने खुद अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। भवानीपुर प्रखंड में कार्यरत एक सहायक शिक्षक ने सोमवार, 20 अप्रैल 2026 की देर रात अपनी पत्नी के साथ मोबाइल फोन पर हुए विवाद के बाद आत्मघाती कदम उठा लिया। इस घटना ने न केवल मृतक के परिवार को बल्कि पूरे शिक्षा जगत और स्थानीय क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। 35 वर्षीय इस शिक्षक की पहचान अररिया जिले के मूल निवासी के रूप में हुई है, जो पिछले एक वर्ष से भवानीपुर में किराये के मकान में रहकर अपनी सेवा दे रहे थे। सोमवार की उस काली रात ने एक हँसते-खेलते परिवार को ताउम्र का दर्द दे दिया है।

मृतक की पहचान और कार्यक्षेत्र का विवरण

​मृतक शिक्षक की पहचान अररिया जिले के अररिया आरएस (कोर्ट के समीप) निवासी ब्रजभूषण सिंह के पुत्र मुकेश कुमार (35 वर्ष) के रूप में की गई है। मुकेश कुमार शिक्षा विभाग के प्रति समर्पित थे और वे वर्तमान में भवानीपुर प्रखंड के लाठी पंचायत अंतर्गत भीम जवारी स्थित प्राथमिक विद्यालय सरपंच टोला में सहायक शिक्षक के पद पर तैनात थे। भवानीपुर में उनकी छवि एक अनुशासित और कर्तव्यनिष्ठ शिक्षक की थी। चूँकि उनका मूल निवास अररिया में था, इसलिए वे भवानीपुर के बोचाही गाँव में मुनेश्वर मंडल के मकान में दूसरे तल पर किराये पर रहकर अपनी ड्यूटी निभाते थे। उनके आकस्मिक निधन की खबर जैसे ही उनके विद्यालय और सहकर्मियों तक पहुँची, वहाँ शोक की लहर दौड़ गई।

सोमवार की वह खौफनाक रात: चश्मदीद की जुबानी

​घटना के समय बोचाही स्थित किराये के मकान में मौजूद मकान मालिक मुनेश्वर मंडल ने इस पूरी त्रासदी का आँखों देखा विवरण पुलिस और मीडिया के साथ साझा किया है। उनके अनुसार, मुकेश कुमार पिछले एक साल से उनके यहाँ रह रहे थे और उनका व्यवहार सामान्य था। सोमवार की शाम को मुकेश कुमार अपने कमरे से बाहर निकलकर मकान की छत पर टहल रहे थे। उस दौरान वे लगातार अपने मोबाइल फोन पर किसी से बातचीत कर रहे थे।

​मुनेश्वर मंडल ने बताया कि बातचीत के दौरान मुकेश कुमार काफी उत्तेजित और परेशान नजर आ रहे थे। उनकी आवाज और हाव-भाव से यह स्पष्ट हो रहा था कि फोन के दूसरी तरफ मौजूद व्यक्ति से उनकी तीखी बहस हो रही है। जानकारी के अनुसार, वह बातचीत उनकी पत्नी के साथ हो रही थी। फोन कटने के बाद मुकेश काफी विचलित दिखे और वे अपने कमरे के भीतर चले गए। उस वक्त किसी को यह आभास नहीं था कि यह उनकी आखिरी बातचीत साबित होगी। सोमवार की रात करीब 11:30 बजे उन्होंने कमरे के भीतर आत्मघाती कदम उठाकर खुदकुशी कर ली।

परिजनों की बेचैनी और घटना का खुलासा

​इस दर्दनाक घटना का खुलासा तब हुआ जब मुकेश कुमार के परिजनों ने अररिया से उन्हें बार-बार फोन किया, लेकिन दूसरी तरफ से कोई जवाब नहीं मिला। काफी समय बीत जाने और दर्जनों कॉल अनसुने रहने के बाद परिजनों को किसी अनहोनी का अंदेशा हुआ। उन्होंने तुरंत मकान मालिक और स्थानीय परिचितों से संपर्क साधा। जब कमरे के भीतर जाकर देखा गया, तो मुकेश कुमार का शव मिला। आनन-फानन में इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दी गई। मौके पर पहुँचे लोग इस दृश्य को देखकर दंग रह गए। एक ऐसा व्यक्ति जो समाज को दिशा देने का काम करता था, वह स्वयं जीवन के संघर्षों के आगे हार गया।

पुलिस की कार्रवाई और प्राथमिक जांच के संकेत

​घटना की जानकारी मिलते ही अकबरपुर थानाध्यक्ष अनुज कुमार राज पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे और घटनास्थल का मुआयना किया। पुलिस ने प्राथमिक कार्रवाई करते हुए शव को अपने कब्जे में लिया और कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। थानाध्यक्ष ने बताया कि शुरुआती जांच और चश्मदीदों के बयान से यह मामला पारिवारिक विवाद और मानसिक तनाव का प्रतीत हो रहा है।

​पुलिस के अनुसार:

  • मोबाइल की जांच: मृतक मुकेश कुमार के मोबाइल फोन को जब्त कर लिया गया है और उसके कॉल रिकॉर्ड्स व संदेशों की बारीकी से जांच की जा रही है।

  • पोस्टमार्टम रिपोर्ट: मृत्यु के सटीक कारणों और समय की पुष्टि के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

  • पत्नी से पूछताछ: जिस मोबाइल कॉल को विवाद का मुख्य कारण माना जा रहा है, उस संबंध में मृतक की पत्नी और अन्य परिजनों से भी पूछताछ की जाएगी।

​अकबरपुर पुलिस इस मामले में हर पहलू को गंभीरता से देख रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि खुदकुशी के पीछे की असल वजह क्या थी और क्या इसके लिए कोई उकसावा जिम्मेदार था।

पारिवारिक विवाद और मानसिक स्वास्थ्य का संकट

​यह घटना एक बार फिर समाज में बढ़ते मानसिक तनाव और घरेलू कलह के गंभीर परिणामों की ओर इशारा करती है। एक सहायक शिक्षक, जिसकी उम्र महज 35 वर्ष थी और जिसका भविष्य काफी उज्ज्वल हो सकता था, उसने एक फोन कॉल के विवाद में अपनी जान दे दी। विशेषज्ञों का मानना है कि कार्यस्थल से दूर किराये के मकान में अकेले रहना और पारिवारिक समस्याओं का समाधान न होना व्यक्ति को अवसाद की ओर धकेल सकता है।

​मुकेश कुमार के मामले में, उनके और उनकी पत्नी के बीच के विवाद ने उन्हें उस चरम बिंदु तक पहुँचा दिया जहाँ उन्हें जीवन समाप्त करना ही एकमात्र विकल्प लगा। यह घटना हमें याद दिलाती है कि संवाद की कमी और गुस्से में लिए गए फैसले कितने विनाशकारी हो सकते हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने भी इस घटना पर दुख जताते हुए कहा है कि शिक्षकों के मानसिक स्वास्थ्य और उनके व्यक्तिगत तनावों को दूर करने के लिए भी काउंसलिंग जैसे उपायों पर विचार करने की आवश्यकता है।

सहकर्मियों और गाँव में शोक का माहौल

​बोचाही गाँव, जहाँ मुकेश कुमार किराये पर रहते थे, वहाँ के लोग उन्हें एक शांत स्वभाव के व्यक्ति के रूप में जानते थे। मुनेश्वर मंडल के घर के आसपास रहने वाले ग्रामीणों का कहना है कि वे कभी किसी से उलझते नहीं थे और अपने काम से काम रखते थे। प्राथमिक विद्यालय सरपंच टोला के अन्य शिक्षकों ने बताया कि मुकेश बच्चों के साथ काफी घुले-मिले रहते थे और विद्यालय की गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाते थे। उनके निधन से विद्यालय के बच्चे भी उदास हैं। अररिया से आए उनके परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वे इस बात पर यकीन नहीं कर पा रहे हैं कि मुकेश जैसा समझदार व्यक्ति ऐसा कदम उठा सकता है।

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