
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु मंगलवार को बिहार के ऐतिहासिक जिले नालंदा के दौरे पर रहेंगी, जहां वे अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय के भव्य समारोह में शिरकत करेंगी.
- राष्ट्रपति सुबह 11:20 बजे नालंदा पहुंचेंगी और शाम 4:50 बजे तक करीब साढ़े पांच घंटे का समय राजगीर और आसपास के क्षेत्रों में व्यतीत करेंगी.
- राजगीर स्थित नालंदा अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय के दूसरे दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति सफल छात्रों को डिग्रियां और स्वर्ण पदक प्रदान करेंगी.
- शैक्षणिक कार्यक्रम के अतिरिक्त राष्ट्रपति प्राचीन नालंदा महाविहार के ऐतिहासिक भग्नावशेषों का भ्रमण कर भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा का अवलोकन करेंगी.
- समारोह के मंच पर राष्ट्रपति के साथ विदेश मंत्री एस. जयशंकर, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राज्यपाल सहित कई विशिष्ट हस्तियां मौजूद रहेंगी.
बिहारशरीफ (द वॉयस ऑफ बिहार)।
नालंदा की ज्ञान भूमि पर राष्ट्रपति का आगमन और अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय का गौरव
बिहार की गौरवशाली ज्ञान परंपरा के आधुनिक प्रतीक, नालंदा अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय के लिए मंगलवार का दिन बेहद ऐतिहासिक होने जा रहा है। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु इस दिन राजगीर पहुंच रही हैं, जहां वे विश्वविद्यालय के दूसरे दीक्षांत समारोह की मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी। राष्ट्रपति का यह दौरा न केवल शैक्षणिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह नालंदा के पुनरुद्धार की दिशा में वैश्विक संदेश भी देगा। राष्ट्रपति सुबह 11:20 बजे अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार नालंदा की धरती पर कदम रखेंगी और शाम 4:50 बजे तक यहां के विभिन्न कार्यक्रमों में व्यस्त रहेंगी। लगभग साढ़े पांच घंटे के इस प्रवास के दौरान वे राजगीर की वादियों में स्थित आधुनिक परिसर और प्राचीन काल के ज्ञान केंद्र, दोनों के साथ समय बिताएंगी। इस दौरे को लेकर पूरे जिले में उत्साह का माहौल है और राजगीर को पूरी तरह से सजाया गया है।
साढ़े पांच घंटे के व्यस्त कार्यक्रम में दीक्षांत समारोह और ऐतिहासिक खंडहरों का भ्रमण
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के नालंदा दौरे का समय काफी बारीकी से निर्धारित किया गया है। वे सुबह पहुंचने के बाद सीधे दीक्षांत समारोह स्थल के लिए प्रस्थान करेंगी, जहां देश-विदेश से आए छात्र अपनी उपाधियों का इंतजार कर रहे हैं। यह नालंदा अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय का दूसरा दीक्षांत समारोह है, जो इस संस्थान की बढ़ती शैक्षणिक साख का प्रमाण है। समारोह में शामिल होने वाले मेधावी छात्रों के लिए यह क्षण अविस्मरणीय होगा जब देश की प्रथम नागरिक स्वयं उन्हें उपाधियां प्रदान करेंगी। दीक्षांत समारोह के बाद राष्ट्रपति का अगला पड़ाव प्राचीन नालंदा महाविहार के भग्नावशेष होंगे। यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल इन खंडहरों के बीच राष्ट्रपति भारत के स्वर्णिम काल की शिक्षा व्यवस्था और वास्तुशिल्प का दीदार करेंगी। इन खंडहरों का भ्रमण इस बात को रेखांकित करेगा कि कैसे प्राचीन भारत विश्व के लिए ज्ञान का केंद्र था।
मंच पर दिग्गज हस्तियों का जमावड़ा और प्रोटोकॉल के अनुसार बैठने की व्यवस्था
राजगीर में आयोजित होने वाले इस दीक्षांत समारोह के मंच पर भारतीय राजनीति और प्रशासन की कई बड़ी शख्सियतें एक साथ नजर आएंगी। प्रोटोकॉल के अनुसार मंच की पहली पंक्ति में बैठने की विशेष व्यवस्था की गई है। मंच के केंद्र में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु विराजमान होंगी। उनकी बाईं ओर भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी बैठेंगे। वहीं राष्ट्रपति की दाईं ओर बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसन और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बैठने की व्यवस्था की गई है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर की उपस्थिति इस विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय स्वरूप को देखते हुए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि नालंदा विश्वविद्यालय के पुनरुद्धार में कई मित्र देशों का सहयोग और विदेश मंत्रालय की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए भी यह एक भावुक क्षण होगा, क्योंकि इस आधुनिक विश्वविद्यालय की स्थापना उनका एक बड़ा सपना रहा है।
अभेद्य किले में तब्दील हुआ राजगीर, सुरक्षा के लिए तैनात किए गए भारी बल
राष्ट्रपति के आगमन को देखते हुए राजगीर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा के ऐसे इंतजाम किए गए हैं कि परिंदा भी पर न मार सके। पूरी सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने के लिए जिला प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने साझा रणनीति तैयार की है। राष्ट्रपति के काफिले के रूट से लेकर दीक्षांत समारोह स्थल और प्राचीन खंडहरों तक, हर जगह कड़ी निगरानी रखी जा रही है। सुरक्षा के उच्च मानकों का पालन करते हुए चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल और विशेष कमांडो की तैनाती की गई है। ड्रोन के जरिए भी संवेदनशील इलाकों की मैपिंग की जा रही है और ऊंची इमारतों पर स्नाइपर्स को तैनात किया गया है। राष्ट्रपति की सुरक्षा के साथ-साथ समारोह में शामिल होने वाले विदेशी मेहमानों और छात्रों की सुविधा का भी विशेष ध्यान रखा गया है। ट्रैफिक रूट में बदलाव किए गए हैं ताकि सुरक्षा में कोई चूक न हो और आम लोगों को भी कम से कम असुविधा का सामना करना पड़े।
आधुनिक नालंदा के छात्रों के लिए गौरवपूर्ण क्षण और स्वर्ण पदकों की वर्षा
इस दूसरे दीक्षांत समारोह के माध्यम से नालंदा विश्वविद्यालय अपनी शैक्षणिक प्रगति का लोहा दुनिया के सामने मनवाने को तैयार है। विभिन्न विषयों में शोध और स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी करने वाले छात्रों को राष्ट्रपति के हाथों डिग्री मिलना उनके करियर का सबसे बड़ा सम्मान होगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर के इस संस्थान में भारत के अलावा कई अन्य देशों के छात्र भी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, जो इस समारोह को एक वैश्विक पहचान प्रदान करेगा। समारोह के दौरान मेधावी छात्रों को स्वर्ण पदक भी दिए जाएंगे, जो उनकी कड़ी मेहनत और शोध की गुणवत्ता का प्रमाण हैं। कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी ने इस समारोह की तैयारियों को लेकर खुद कमान संभाली है ताकि अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कार्यक्रम संपन्न कराया जा सके।
ज्ञान के वैश्विक केंद्र के रूप में नालंदा का पुनरुद्धार और बिहार का बढ़ता कद
राष्ट्रपति का नालंदा दौरा बिहार के लिए सांस्कृतिक और शैक्षणिक गौरव का विषय है। एक तरफ जहां वे प्राचीन खंडहरों के जरिए इतिहास को याद करेंगी, वहीं दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय के छात्रों के बीच जाकर वे बिहार के आधुनिक शैक्षणिक भविष्य की नींव को मजबूत करेंगी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार ने जिस तरह से नालंदा के पुनरुद्धार की पैरवी की और केंद्र सरकार ने इसे विश्व स्तरीय बनाने के लिए संसाधन जुटाए, उसका परिणाम आज इस दूसरे दीक्षांत समारोह के रूप में दिखाई दे रहा है। राज्यपाल सैयद अता हसन और विदेश मंत्री एस. जयशंकर की मौजूदगी यह स्पष्ट करती है कि नालंदा केवल बिहार का नहीं, बल्कि भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ का एक बड़ा केंद्र है। राष्ट्रपति का यह दौरा नालंदा के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ने जा रहा है।


