भागलपुर : सोशल मीडिया पर विरोधी पोस्ट डालना पड़ा भारी, भागलपुर की शिक्षिका सुप्रिया कुमारी निलंबित

भागलपुर। शिक्षा विभाग की नीतियों के खिलाफ सोशल मीडिया पर आवाज उठाना प्राथमिक विद्यालय भुवनचक, सन्हौला में पदस्थापित प्रधान शिक्षिका सुप्रिया कुमारी को महंगा पड़ गया। जिला शिक्षा विभाग ने शुक्रवार को उन्हें निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया।

सुप्रिया कुमारी न केवल विद्यालय की प्रधान शिक्षिका हैं बल्कि बिहार पंचायत-नगर प्रारंभिक शिक्षक संघ की प्रदेश सचिव भी हैं। वे लगातार विभागीय आदेशों और निर्णयों के खिलाफ सोशल मीडिया पर अपने विचार रखती रही हैं। 24 जून को उन्होंने शिक्षा विभाग के आदेश के खिलाफ पोस्ट किया था और हाल ही में भी एक विरोधी टिप्पणी लिखी थी। इसी पर संज्ञान लेते हुए जिला शिक्षा विभाग ने उनके खिलाफ कार्रवाई की।

विभाग का आरोप है कि शिक्षिका ने ऑनलाइन उपस्थिति और अन्य विभागीय आदेशों के खिलाफ सोशल मीडिया पर भ्रामक और भड़काऊ टिप्पणियाँ कीं। उन पर शिक्षकों को गुमराह करने, अनुशासनहीनता बरतने और अपने दायित्वों में लापरवाही करने का आरोप लगाया गया है।

कार्रवाई और आगे की प्रक्रिया
डीईओ के निर्देश पर डीपीओ स्थापना द्वारा उनका निलंबन आदेश जारी कर दिया गया है। निलंबन की अवधि में उनका मुख्यालय शाहकुंड प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी का कार्यालय निर्धारित किया गया है। साथ ही उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही भी चलाई जाएगी और आरोप पत्र भी अलग से सौंपा जाएगा। इस कार्रवाई की जिम्मेदारी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी सन्हौला को दी गई है।

क्या लिखा था विरोधी पोस्ट में?
सुप्रिया कुमारी ने 26 जून को अपने फेसबुक पोस्ट में शिक्षा विभाग की ई-शिक्षा कोष योजना का विरोध करते हुए लिखा था – “तो शिक्षक भाइयों और बहनों कैसा चल रहा है ई-शिक्षा कोष, अभी मौका है एक साथ बहिष्कार।”
इसके अलावा उन्होंने विद्यालयों में शिक्षकों को टैबलेट के लिए अपने नाम से सिम कार्ड लेने के आदेश का भी विरोध किया था।

शिक्षिका का पक्ष
निलंबन पर प्रतिक्रिया देते हुए सुप्रिया कुमारी ने कहा – “मेरा निलंबन पत्र संविधान द्वारा प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का हनन है। सरकार की गलत नीतियों का सोशल मीडिया पर विरोध करना किसी भी रूप में गलत नहीं है। जब अधिकारियों को खुद विभागीय सिम और मोबाइल उपलब्ध कराए जाते हैं तो शिक्षकों को अपने नाम से सिम लेने का आदेश क्यों दिया जा रहा है? मेरा संघर्ष जारी रहेगा और आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय का सहारा लूंगी।”

इस पूरे मामले ने शिक्षा विभाग की नीतियों और उनकी आलोचना करने वाले शिक्षकों के खिलाफ उठाए गए कदमों को लेकर गहन बहस छेड़ दी है।


 

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