बिहार में जहरीली शराब कांड पर गरमाई सियासत, तेजस्वी यादव ने उठाए बड़े सवाल

मोतिहारी घटना के बाद विपक्ष हमलावर, शराबबंदी कानून की प्रभावशीलता पर बहस तेज

पटना, 3 अप्रैल: बिहार के मोतिहारी में जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद राज्य की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। इस घटना में चार लोगों की मौत और कई अन्य लोगों के गंभीर रूप से बीमार होने की खबर के बाद विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इस मुद्दे पर राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए शराबबंदी कानून को पूरी तरह विफल करार दिया है।

तेजस्वी यादव का सरकार पर सीधा हमला

तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि मोतिहारी की घटना बेहद दुखद और चिंताजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह घटना शराबबंदी कानून की कमजोरियों और प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है। उनके अनुसार, इस कानून का उद्देश्य पूरी तरह भटक चुका है और इसका लाभ गलत तत्व उठा रहे हैं।

आंकड़ों के जरिए साधा निशाना

तेजस्वी यादव ने दावा किया कि बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद से अब तक जहरीली शराब से 1300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि यह केवल आधिकारिक आंकड़े हैं, जबकि वास्तविक संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है। साथ ही, कई लोग इस तरह की घटनाओं में अपनी आंखों की रोशनी भी गंवा चुके हैं।

सरकार पर गंभीर आरोप

विपक्ष का आरोप है कि राज्य में अवैध शराब का कारोबार खुलेआम चल रहा है और इसमें स्थानीय स्तर पर मिलीभगत भी शामिल है। तेजस्वी यादव ने कहा कि पुलिस और प्रशासन की नाक के नीचे जहरीली शराब का निर्माण और बिक्री हो रही है, जिससे आम लोग अपनी जान गंवा रहे हैं।

सरकार की नीति पर उठे सवाल

इस घटना के बाद शराबबंदी कानून की प्रभावशीलता पर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। विपक्ष जहां इसे पूरी तरह असफल बता रहा है, वहीं सरकार की ओर से अभी तक इस पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, प्रशासनिक स्तर पर मामले की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की बात कही जा रही है।

जनता की सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा

विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं सरकार के लिए गंभीर चुनौती हैं। शराबबंदी का उद्देश्य भले ही सामाजिक सुधार था, लेकिन जमीनी स्तर पर इसके क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

फिलहाल, मोतिहारी कांड को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और भी तूल पकड़ सकता है। वहीं, आम लोगों की मांग है कि सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

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