
भागलपुर। जगदीशपुर प्रखंड की पंचायत समिति में इन दिनों राजनीतिक माहौल गरमा गया है। समिति के कई सदस्यों ने प्रमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की मांग करते हुए विशेष बैठक बुलाने का औपचारिक अनुरोध किया है। इस संबंध में प्रखंड प्रशासन को आवेदन सौंपा गया है, जिससे पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है।
सदस्यों द्वारा दिए गए आवेदन में प्रमुख की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। उनका आरोप है कि पंचायत समिति के तहत चल रही विकास योजनाओं की जानकारी बार-बार मांगने के बावजूद उन्हें उपलब्ध नहीं कराई जाती। योजनाओं के चयन और क्रियान्वयन में मनमानी करने का भी आरोप लगाया गया है, जिससे कई क्षेत्रों में असंतोष की स्थिति बन गई है।
वित्तीय पारदर्शिता को लेकर भी सदस्यों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि आय-व्यय और लेखा-जोखा की जानकारी बैठकों में साझा नहीं की जाती, जिससे वित्तीय अनियमितताओं की आशंका बढ़ रही है। सदस्यों के अनुसार, यह स्थिति पंचायत स्तर पर जवाबदेही के अभाव को दर्शाती है।
इसके अलावा प्रमुख पर यह भी आरोप लगाया गया है कि वे पंचायत समिति सदस्यों के अधिकारों में हस्तक्षेप करती हैं और उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार नहीं किया जाता। कई सदस्यों ने यह भी कहा कि प्रमुख अक्सर कार्यालय से अनुपस्थित रहती हैं, जिसके कारण आम लोगों के कार्य समय पर नहीं हो पाते और जनप्रतिनिधियों को लोगों के आक्रोश का सामना करना पड़ता है।
सदस्यों का यह भी कहना है कि पंचायत समिति की बैठकों में उनके क्षेत्र की समस्याओं पर न तो गंभीरता से चर्चा होती है और न ही समाधान के लिए ठोस पहल की जाती है। स्थायी समिति के गठन और उसकी कार्यप्रणाली में भी पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया गया है।
मामले में सबसे गंभीर आरोप यह लगाया गया है कि प्रमुख के पति द्वारा कथित रूप से योजनाओं को पोर्टल पर अपलोड कर मनमाने तरीके से लाभ लिया जा रहा है और इसके बदले धन की वसूली की जा रही है। इससे कई पंचायतों को योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
सदस्यों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रमुख कुछ पदाधिकारियों और कर्मचारियों के साथ मिलकर व्यक्तिगत स्वार्थ में कार्य कर रही हैं और पंचायत समिति के निर्वाचित सदस्यों की बातों को नजरअंदाज किया जा रहा है। उनका कहना है कि प्रमुख अपने दायित्वों का सही तरीके से निर्वहन करने में असफल रही हैं।
इसी को लेकर पंचायत समिति सदस्यों ने जगदीशपुर पंचायत समिति की विशेष बैठक बुलाकर अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा और मतदान कराने की मांग की है। इस आवेदन की प्रतिलिपि प्रखंड विकास पदाधिकारी, अनुमंडल पदाधिकारी (सदर) और जिला पंचायत राज पदाधिकारी को भी भेजी गई है।
अब निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि विशेष बैठक बुलाई जाती है, तो यह देखना दिलचस्प होगा कि अविश्वास प्रस्ताव पर क्या फैसला आता है और पंचायत समिति की सियासत किस दिशा में आगे बढ़ती है।


