कहलगांव सीट पर सियासी तापमान चढ़ा: कांग्रेस-राजद में टिकट को लेकर खींचतान तेज

भागलपुर/कहलगांव, 18 जून 2025:बिहार विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही कहलगांव सीट पर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। कभी कांग्रेस का गढ़ रही यह सीट अब INDIA गठबंधन के भीतर खींचतान का केंद्र बन चुकी है। सीट पर दावेदारी को लेकर कांग्रेस और राजद आमने-सामने हैं।

राजद के विक्रम मंडल ने ठोकी दावेदारी

राजद कार्यकर्ता विक्रम मंडल ने मंगलवार को एक प्रेस वार्ता में कहा कि अति पिछड़ा समाज के प्रतिनिधित्व का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि यदि पार्टी उन्हें उम्मीदवार घोषित करती है, तो वे पूरी ताकत से चुनाव लड़ेंगे और जनता की समस्याओं को विधानसभा में उठाएंगे। विक्रम मंडल ने यह भी दावा किया कि उन्हें अति पिछड़ा समाज का भरपूर समर्थन मिल रहा है।

कांग्रेस भी सीट छोड़ने के मूड में नहीं

दूसरी ओर कांग्रेस के प्रवीण सिंह कुशवाहा भी पार्टी सिंबल हासिल करने की पूरी कोशिश में जुटे हैं। उनका तर्क है कि कहलगांव सीट पर कांग्रेस का ऐतिहासिक प्रभाव रहा है। स्वर्गीय सदानंद सिंह इस सीट से नौ बार विधायक रह चुके हैं और कांग्रेस अब अपनी खोई हुई जमीन वापस पाना चाहती है।

सभी की निगाहें कहलगांव पर

वर्तमान में यह सीट भाजपा विधायक पवन यादव के पास है, जिन्होंने 2020 में कांग्रेस को हराकर सीट अपने नाम की थी। लेकिन इस बार विपक्षी गठबंधन महंगाई, बेरोजगारी और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों के सहारे जनता तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में कहलगांव सीट पर INDIA गठबंधन किसे टिकट देता है, यह देखना दिलचस्प होगा।

बैनर-पोस्टरों से गर्माया माहौल

चुनाव पूर्व माहौल गरमाने लगा है। कहलगांव शहर में राजद और कांग्रेस दोनों के बैनर और पोस्टर नजर आने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं ने प्रचार-प्रसार शुरू कर दिया है, जो बताता है कि दोनों दल इस सीट को लेकर बेहद गंभीर हैं।

टिकट बंटवारे पर गठबंधन में बढ़ेगी चर्चा

हालांकि सीट बंटवारे को लेकर अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन अंदरखाने समझौते की कवायद तेज हो गई है। कांग्रेस जहां अपने पुराने रिकॉर्ड के आधार पर दावा मजबूत कर रही है, वहीं राजद युवा नेतृत्व और सामाजिक समीकरणों के सहारे सीट को अपने पक्ष में लाना चाह रही है।


कहलगांव सीट पर INDIA गठबंधन के भीतर की रस्साकशी यह संकेत दे रही है कि इस बार का मुकाबला सिर्फ विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच ही नहीं, बल्कि गठबंधन के भीतर तालमेल की परीक्षा भी होगा। अब देखना यह होगा कि अंतिम फैसला किसके पक्ष में जाता है और यह सीट महागठबंधन को सत्ता दिलाने में कितना असर डालेगी।


 

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