पटना। बिहार के पूर्व मंत्री रत्नेश सदा के आवास पर जदयू की ओर से मकर संक्रांति के अवसर पर चूड़ा-दही भोज का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समेत जदयू के तमाम वरिष्ठ नेता और एनडीए घटक दलों के प्रमुख नेता शामिल हुए। हालांकि भोज में सबसे ज्यादा चर्चा निशांत कुमार की राजनीति में संभावित एंट्री और आरसीपी सिंह की जदयू में वापसी को लेकर होती रही।
चूड़ा-दही भोज में दिखी क्षेत्रीय स्वाद की झलक
भोज में सहरसा का दही, भागलपुर का चूड़ा, गया का तिलकुट और नालंदा-पटना से मंगाई गई सब्जियां परोसी गईं। पार्टी के वरिष्ठ नेता खुद कार्यकर्ताओं को चूड़ा-दही और तिलकुट परोसते नजर आए। यह आयोजन संगठनात्मक एकजुटता और परंपरा का प्रतीक माना गया।
निशांत कुमार को लेकर बढ़ी सियासी चर्चा
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी और जदयू एमएलसी ललन सर्राफ ने अपने अंदाज में निशांत कुमार को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा कि “निशांत का मतलब है निशा का अंत, यानी बिहार की प्रगति।”
वहीं जदयू एमएलसी संजय गांधी ने कहा,
“निशांत सर्वगुण संपन्न हैं। पार्टी के सभी लोग उनका इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अंतिम फैसला मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को ही करना है।”
मुख्यमंत्री की मौजूदगी और नेताओं की प्रतिक्रियाएं
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी, ऊर्जा मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे।
मेजबान रत्नेश सदा ने कहा,
“मुख्यमंत्री ने कुछ खाया नहीं, लेकिन बहुत खुश दिखे। उन्होंने पीठ थपथपाई है, अब आगे क्या होता है, यह देखना है।”
हम पार्टी ने भी दिए संकेत
एनडीए घटक दल हम के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष सुमन ने कहा कि बिहार की राजनीति में हर बार कुछ नया होता है।
निशांत कुमार को लेकर उन्होंने कहा,
“अगर निशांत राजनीति में आते हैं तो अच्छा है। उनके पिता पिछले 20 वर्षों से मुख्यमंत्री हैं, ऐसे में उन्हें राजनीति का अनुभव स्वतः मिला है। फैसला तो उन्हीं को करना है।”
आरसीपी सिंह की वापसी पर भी चर्चा
जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज रही। फुलवारी शरीफ के विधायक श्याम रजक ने कहा,
“अगर आरसीपी सिंह जदयू में आते हैं तो उनका स्वागत है। पार्टी को खड़ा करने में उनकी भी बड़ी भूमिका रही है और वे मुख्यमंत्री के विजन को आगे बढ़ा सकते हैं।”
जदयू में बदलाव के संकेत
गौरतलब है कि पहले जदयू का चूड़ा-दही भोज वर्षों तक वशिष्ठ नारायण सिंह के आवास पर होता था। पिछले तीन वर्षों से यह आयोजन रत्नेश सदा के आवास पर हो रहा है।
इस बार 16 जनवरी से शुरू हो रही मुख्यमंत्री की ‘समृद्धि यात्रा’, संभावित मंत्रिमंडल विस्तार और संगठनात्मक फेरबदल को लेकर भी नेताओं के बीच चर्चा होती रही। रत्नेश सदा इस बार मंत्री नहीं बनाए गए हैं, लेकिन जदयू के कई नेता मंत्रिमंडल में शामिल होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
निष्कर्ष
मकर संक्रांति के इस सियासी भोज के बाद यह साफ है कि जदयू में नए साल और खरमास के बाद बड़े राजनीतिक फैसलों की भूमिका बन रही है। निशांत कुमार की संभावित एंट्री और आरसीपी सिंह की वापसी जैसे मुद्दे आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में नई दिशा तय कर सकते हैं।


