
बिहार की सत्ताधारी दल जनता दल (यूनाइटेड) (जदयू) में इन दिनों संगठनात्मक चुनाव जारी है। प्रखंड और जिला अध्यक्ष पद के लिए चुनाव कराए जा रहे हैं, लेकिन कई जिलों में हंगामे के कारण प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है।
पार्टी ने सांगठनिक स्तर पर 52 जिलों का गठन किया है, लेकिन 1 मार्च को हुए जिला अध्यक्ष चुनाव में आधे से अधिक जिलों में अध्यक्ष का चयन नहीं हो पाया।
50% जिला अध्यक्षों का चयन अनिवार्य
8 मार्च को प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव प्रस्तावित है। इससे पहले कम से कम 50% जिला अध्यक्षों का चयन होना जरूरी है। लेकिन कई जगह एक से अधिक दावेदार सामने आने से विवाद की स्थिति बन गई।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जिले में भी जिला अध्यक्ष का चुनाव नहीं हो सका। पटना नगर सहित कई जिलों में हंगामे के कारण चुनाव टाल दिया गया और राष्ट्रीय अध्यक्ष को उम्मीदवार तय करने के लिए अधिकृत कर दिया गया।
कई जिलों में चुनाव स्थगित
सहरसा, नालंदा और मधेपुरा में पहले ही चुनाव स्थगित कर दिया गया था। वहीं मुजफ्फरपुर, गया, बेगूसराय और पटना नगर में भी भारी हंगामा हुआ, जिसके बाद निर्णय राष्ट्रीय नेतृत्व पर छोड़ दिया गया।
प्रखंड अध्यक्षों की नाराजगी
बेगूसराय जिले के कई प्रखंड अध्यक्ष प्रदेश कार्यालय पहुंचकर कार्यकारी जिला अध्यक्ष को दोबारा जिम्मेदारी देने की मांग कर रहे हैं। बछवारा प्रखंड अध्यक्ष विवेक पटेल का आरोप है कि असामाजिक तत्वों ने जानबूझकर हंगामा कर चुनाव रद्द करवाया।
बेगूसराय नगर प्रखंड अध्यक्ष पांडव कुमार ने भी कहा कि पिछले वर्ष पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल लोग ही हंगामा कर रहे थे।
संजय गांधी का बयान
जदयू के मुख्य सचेतक संजय गांधी ने कहा कि जदयू एक लोकतांत्रिक पार्टी है और राष्ट्रीय अध्यक्ष पर सभी को विश्वास है। कई स्थानों पर एक से अधिक उम्मीदवार होने के कारण जिला अध्यक्ष चुनने का अधिकार राष्ट्रीय अध्यक्ष को सौंपा गया है।
आगे क्या?
27 मार्च को राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव प्रस्तावित है। वर्तमान में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार हैं, लेकिन संगठन में नए चेहरे को मौका मिलने की चर्चा भी तेज है।
प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा को मंत्री बनाए जाने की अटकलें भी लगाई जा रही हैं। वहीं नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार के राजनीति में आने की चर्चा ने भी सियासी हलचल बढ़ा दी है।
फिलहाल पार्टी नेतृत्व की ओर से सभी लंबित जिलों की सूची एक साथ जारी करने की तैयारी है। 8 मार्च को प्रदेश अध्यक्ष और 27 मार्च को राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव से पहले जिला अध्यक्षों के नामों की घोषणा अहम मानी जा रही है।
पार्टी के भीतर चल रहा यह विवाद थमता है या और गहराता है, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।


