
पटना | बिहार में बिजली दरों को लेकर सियासत एक बार फिर गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष ने राज्य की सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि चुनावी वादों से मुकरते हुए अब आम जनता पर महंगी बिजली का बोझ डाला जा रहा है।
चुनावी वादे बनाम हकीकत
तेजस्वी यादव ने कहा कि चुनाव के समय सरकार और ने 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने का वादा किया था। लेकिन महज कुछ महीनों में ही यह वादा हवा हो गया और नई दरों के जरिए उपभोक्ताओं से अधिक शुल्क वसूला जा रहा है।
उनका आरोप है कि सरकार ने जनता को तत्काल लाभ का लालच देकर वोट हासिल किए, लेकिन अब उन्हीं लोगों से उसकी भरपाई की जा रही है।
‘चीटर मीटर’ पर उठे सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने स्मार्ट मीटर व्यवस्था को ‘चीटर मीटर’ करार देते हुए कहा कि अलग-अलग समय के हिसाब से बिजली दरें तय करना सीधे तौर पर आम लोगों की जेब पर हमला है।
उन्होंने दावा किया कि—
- शाम के समय बिजली सबसे महंगी दर पर मिल रही है
- रात और सुबह के अलग-अलग स्लॉट में भी दरें तय हैं
- इससे उपभोक्ताओं का मासिक बिल पहले से ज्यादा आ रहा है
तेजस्वी के अनुसार, यह व्यवस्था पारदर्शी नहीं है और आम उपभोक्ता को इसकी पूरी जानकारी भी नहीं दी जा रही।
सरकार की आर्थिक स्थिति पर सवाल
तेजस्वी यादव ने राज्य की वित्तीय स्थिति को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार का खजाना लगभग खाली हो चुका है और जो संसाधन बचे हैं, वे भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहे हैं।
उनका यह भी दावा है कि चुनाव से पहले बड़े पैमाने पर सरकारी धन का इस्तेमाल किया गया, जिसका असर अब आम जनता पर पड़ रहा है।
चुनाव प्रक्रिया पर भी निशाना
तेजस्वी ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर भी अप्रत्यक्ष रूप से पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान कई अनियमितताएं हुईं, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावित हुई।
सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार

हालांकि, राज्य सरकार की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिजली दरों का मुद्दा आने वाले समय में बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकता है।
आम जनता पर असर
बिहार में पहले से ही महंगाई, बेरोजगारी और बुनियादी सुविधाओं को लेकर असंतोष की चर्चा होती रही है। ऐसे में बिजली दरों में बदलाव का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ना तय है।
आगे क्या?
अब नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार इन आरोपों का क्या जवाब देती है और क्या बिजली दरों में किसी तरह की राहत देने की घोषणा होती है या नहीं। फिलहाल, बिजली का मुद्दा बिहार की राजनीति में एक बार फिर केंद्र में आ गया है और आने वाले दिनों में इस पर बहस और तेज होने की संभावना है।


