
पटना: बिहार की राजनीति में एक बार फिर मुख्यमंत्री पद को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी समेत कई नेताओं के नाम संभावित मुख्यमंत्री के तौर पर चर्चा में हैं, लेकिन इस बीच पूर्व सांसद आनंद मोहन के एक बयान ने सियासी माहौल को और गर्म कर दिया है।
‘पर्ची सिस्टम’ से होगा CM का चयन?
मुजफ्फरपुर दौरे के दौरान मीडिया से बातचीत में आनंद मोहन ने कहा कि बीजेपी में मुख्यमंत्री का चयन पारंपरिक तरीके से नहीं, बल्कि एक अलग प्रक्रिया के तहत होता है। उन्होंने कहा:
“हमारे या आपके चाहने से कुछ नहीं होगा। बीजेपी में पर्ची निकलती है, उसी से तय होता है कि किसे मौका मिलेगा।”
उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है कि क्या वास्तव में पार्टी नेतृत्व किसी चौंकाने वाले नाम पर मुहर लगा सकता है।
सम्राट चौधरी सहित कई नाम चर्चा में
वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में सम्राट चौधरी का नाम मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदारों में माना जा रहा है। इसके अलावा बीजेपी के अन्य वरिष्ठ नेताओं के नाम भी सामने आ रहे हैं।
हालांकि, आनंद मोहन के बयान से यह संकेत मिल रहा है कि अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व द्वारा लिया जाएगा और इसमें किसी भी नाम पर अचानक मुहर लग सकती है।
नीतीश कुमार को लेकर भी उठे सवाल
आनंद मोहन ने यह भी कहा कि जनता से जो वादे किए गए थे, उन्हें निभाना जरूरी है। उन्होंने कहा:
- चुनाव के दौरान 2025 से 2030 तक नीतीश कुमार के नेतृत्व की बात कही गई थी
- ऐसे में अचानक बदलाव की चर्चा जनता के बीच सवाल खड़े कर रही है
उन्होंने संकेत दिया कि यदि वादों से अलग जाकर निर्णय लिया जाता है, तो इसका राजनीतिक असर पड़ सकता है।
बीजेपी को नुकसान की आशंका
आनंद मोहन ने अपने बयान में यह भी कहा कि अगर किसी दबाव में निर्णय लिया गया, तो इसका सबसे ज्यादा नुकसान बीजेपी को हो सकता है।
उनके अनुसार:
- पिछड़ा, अतिपिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वोट बैंक सीधे तौर पर बीजेपी का नहीं है
- ये वोट बैंक अब तक नीतीश कुमार के जरिए गठबंधन को मिलता रहा है
- ऐसे में नेतृत्व में बदलाव का असर चुनावी समीकरण पर पड़ सकता है
राजनीतिक संदेश क्या है?
विशेषज्ञों का मानना है कि आनंद मोहन का यह बयान सीधे तौर पर बीजेपी की रणनीति और संभावित फैसलों पर सवाल खड़ा करता है। साथ ही यह संकेत भी देता है कि पार्टी के भीतर अंतिम निर्णय शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर ही तय होगा।
बिहार में मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच आनंद मोहन का ‘पर्ची सिस्टम’ वाला बयान सियासी बहस को और तेज कर गया है। अब सबकी नजर बीजेपी के अंतिम फैसले पर टिकी है कि पार्टी किस चेहरे पर भरोसा जताती है।
आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि बिहार की राजनीति में अगला बड़ा चेहरा कौन होगा और क्या मौजूदा समीकरणों में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।


