“पुलिस की भूमिका संदिग्ध” – नीट छात्रा मामले में विपक्ष का सरकार पर हमला

बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन सदन में प्रश्नोत्तरकाल समाप्त होने के बाद कार्यस्थगन प्रस्ताव पर चर्चा हुई। यह प्रस्ताव काराकाट से सीपीआई विधायक अरुण सिंह की ओर से लाया गया था। स्पीकर प्रेम कुमार ने प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया, लेकिन उसे सदन में पढ़ने की अनुमति दे दी।

विधायक अरुण सिंह ने सदन में जहानाबाद और औरंगाबाद की दो छात्राओं के साथ पटना के हॉस्टल में हुई कथित दुष्कर्म और हत्या की घटना का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि दोनों छात्राएं नीट परीक्षा की तैयारी कर रही थीं और यह घटना राज्य में महिलाओं तथा छात्राओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

उन्होंने आरोप लगाया कि यह मामला कानून-व्यवस्था और पुलिस प्रशासन की बड़ी विफलता को दर्शाता है। शुरुआत से ही पुलिस की भूमिका संदिग्ध रही है। पुलिस पर घटना से इनकार करने और दोषियों को बचाने के आरोप लगे हैं। जनदबाव के बाद सरकार को सीबीआई जांच की अनुशंसा करनी पड़ी, लेकिन केवल सीबीआई जांच से न्याय की गारंटी नहीं मिलती।

अरुण सिंह ने मांग की कि मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी मौजूदा जज की निगरानी में कराई जाए और न्याय के लिए निश्चित समय-सीमा तय की जाए, ताकि पीड़ित परिवारों को भरोसा मिल सके।

इस पर स्पीकर प्रेम कुमार ने कहा कि सरकार ने घटना का संज्ञान ले लिया है और आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। विपक्षी विधायकों ने इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा कराने की मांग की, लेकिन स्पीकर ने स्पष्ट किया कि कार्यस्थगन प्रस्ताव को अमान्य कर दिया गया है, हालांकि इसे पढ़ने की अनुमति दी गई है। उन्होंने दोहराया कि मामला सरकार के संज्ञान में है और प्रक्रिया के तहत कार्रवाई जारी है।


 

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