कोतवाली थाना में पुलिस का जन संवाद कार्यक्रम, सिटी एसपी ने थानाध्यक्षों को सप्ताह में दो दिन जनसंवाद करने का दिया निर्देश

भागलपुर: भागलपुर पुलिस द्वारा आम जनता और पुलिस के बीच बेहतर संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से कोतवाली थाना परिसर में जन संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में सिटी एसपी शुभांक मिश्रा सहित जिले के कई थानाध्यक्ष मौजूद रहे। जन संवाद कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे, जिनकी सुनवाई मौके पर ही की गई।

कार्यक्रम के दौरान नागरिकों ने जमीन विवाद, पारिवारिक विवाद, आपराधिक मामलों में देरी, ट्रैफिक और सुरक्षा से जुड़ी समस्याएं अधिकारियों के समक्ष रखीं। मौजूद पुलिस पदाधिकारियों ने कई मामलों में तत्काल समाधान की दिशा में आवश्यक निर्देश दिए, वहीं कुछ मामलों में संबंधित थानों को जांच और कार्रवाई के आदेश दिए गए।

इस अवसर पर शांति समिति के सदस्य भी उपस्थित रहे। समिति के सदस्यों ने हाल के दिनों में पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई की सराहना की और कानून-व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए। पुलिस अधिकारियों ने शांति समिति के सुझावों को गंभीरता से सुनते हुए उन पर अमल का आश्वासन दिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सिटी एसपी शुभांक मिश्रा ने कहा कि आम जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान पुलिस की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि जिले के सभी थानाध्यक्षों को निर्देश दिया गया है कि वे सप्ताह में कम से कम दो दिन जन संवाद कार्यक्रम आयोजित करें, ताकि लोग अपनी समस्याएं सीधे थाना स्तर पर ही रख सकें।

सिटी एसपी ने कहा कि कई बार दूरी या संकोच के कारण लोग वरिष्ठ अधिकारियों तक नहीं पहुंच पाते हैं और थाने में भी अपनी बात रखने से हिचकिचाते हैं। जन संवाद कार्यक्रम के माध्यम से इस दूरी को कम किया जा रहा है, जिससे आम नागरिकों का पुलिस पर भरोसा बढ़ेगा और समस्याओं का समय पर समाधान हो सकेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि शांति समिति के सदस्यों की भूमिका समाज में सौहार्द और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण है। पुलिस और समाज के बीच समन्वय से ही अपराध पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।

बयान

शुभांक मिश्रा, सिटी एसपी, भागलपुर:
जन संवाद कार्यक्रम का उद्देश्य आम लोगों की समस्याओं को सीधे सुनना और उनका त्वरित समाधान करना है। सभी थानाध्यक्षों को सप्ताह में दो दिन जन संवाद आयोजित करने का निर्देश दिया गया है, ताकि लोगों को बार-बार उच्च अधिकारियों के पास न आना पड़े।

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