नई दिल्ली, 2 दिसंबर 2025 केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक प्रशासनिक फैसला लेते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का नाम बदल दिया है। अब पीएमओ को नए आधिकारिक नाम ‘सेवा तीर्थ’ के रूप में जाना जाएगा। दशकों से दक्षिण ब्लॉक में संचालित होने वाला प्रधानमंत्री कार्यालय अब शीघ्र ही अपने नए, आधुनिक और अत्याधुनिक सुरक्षा से लैस परिसर सेवा तीर्थ-1 में स्थानांतरित होने जा रहा है।
नया प्रधानमंत्री कार्यालय वायु भवन के पास निर्मित एक हाई-टेक, सुरक्षित और समेकित सरकारी कॉम्प्लेक्स का हिस्सा है।
सेवा तीर्थ परिसर में तीन हाई-टेक भवन, अलग-अलग विभाग होंगे शिफ्ट
‘सेवा तीर्थ’ एक बड़े सरकारी परिसर का नया नाम है, जिसमें तीन अत्याधुनिक इमारतें बनी हैं—
- सेवा तीर्थ-1: प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO)
- सेवा तीर्थ-2: कैबिनेट सचिवालय
- सेवा तीर्थ-3: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) का कार्यालय
सरकारी अधिकारियों के अनुसार स्थानांतरण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
14 अक्टूबर को कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन ने सेवा तीर्थ-2 में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ और तीनों सेनाओं के प्रमुखों के साथ उच्च-स्तरीय बैठक की थी। इस बैठक को नए परिसर की औपचारिक शुरुआत माना जा रहा है।
हाई-टेक, सुरक्षित और इंटेलिजेंस-प्रूफ इमारतें
नया ‘सेवा तीर्थ’ परिसर सरकार की व्यापक प्रशासनिक पुनर्गठन योजना का हिस्सा है। इन इमारतों को—
- इंटेलिजेंस-प्रूफ
- सुरक्षित संचार प्रणाली
- आधुनिक टेक्नोलॉजी इंटीग्रेशन
- उच्च स्तर के डेटा सुरक्षा मानकों
के साथ तैयार किया गया है।
इसका उद्देश्य प्रधानमंत्री कार्यालय, कैबिनेट सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े महत्वूपर्ण विभागों को एक आधुनिक, सुरक्षित और केंद्रीकृत स्थान पर स्थापित करना है, ताकि प्रशासनिक कार्यक्षमता और समन्वय और बेहतर हो सके।
केंद्रीय सचिवालय के एकीकरण की योजना का हिस्सा
विशेषज्ञों के अनुसार ‘सेवा तीर्थ’ नाम और इसके तहत कार्यालयों का स्थानांतरण केंद्र सरकार की केंद्रीय सचिवालय के एकीकरण, डिजिटल प्रशासनिक सुधार, और सुरक्षित ढांचे के निर्माण की दीर्घकालिक योजना से जुड़ा हुआ है।
दक्षिण ब्लॉक में स्थित पुरानी इमारतें अब प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण हैं, जबकि वास्तविक प्रशासनिक कार्य धीरे-धीरे अत्याधुनिक नए परिसर में शिफ्ट होने लगा है।
प्रशासनिक दक्षता और सुरक्षा में बड़ा सुधार
सरकार का दावा है कि ‘सेवा तीर्थ’ परिसर में स्थानांतरण से—
- रणनीतिक बैठकों के लिए बेहतर सुरक्षा
- स्मार्ट संचार प्रणाली
- प्रशासनिक इकाइयों के बीच तेज समन्वय
- और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े उच्चस्तरीय निर्णयों में गति
जैसे लाभ मिलेंगे।


