
पटना, बिहार।राज्य के स्कूलों में कार्यरत शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अनुदेशकों की उपेक्षित स्थिति को लेकर फिजिकल एजुकेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया (PEFI) ने बिहार के मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। संगठन का कहना है कि आज भी बिहार में इन प्रशिक्षकों को केवल ₹8000 प्रतिमाह के बेहद अल्प मानदेय पर रखा गया है, जबकि उनसे पूर्णकालिक शिक्षकों जैसी सभी जिम्मेदारियाँ ली जाती हैं।
न नीति में सम्मान, न वेतन में न्याय
PEFI ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था न केवल नई शिक्षा नीति 2020 के मूलभूत सिद्धांतों के खिलाफ है, बल्कि यह मानवाधिकारों का भी हनन है।
“जब अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों में भारत से पदकों की उम्मीद की जाती है, तो जमीनी स्तर पर खेल शिक्षकों को सम्मान, संसाधन और स्थायित्व क्यों नहीं दिया जाता?” — PEFI
PEFI की प्रमुख मांगें
PEFI ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर निम्नलिखित मांगें प्रमुख रूप से उठाई हैं:
- शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अनुदेशकों को पूर्णकालिक शिक्षक का दर्जा दिया जाए।
- न्यूनतम ₹25,000 प्रतिमाह का सम्मानजनक वेतनमान सुनिश्चित किया जाए।
- सभी अनुदेशकों की नियमित नियुक्ति की प्रक्रिया प्रारंभ की जाए।
- विद्यालयों में खेल संसाधनों और ढांचे का सुदृढ़ीकरण किया जाए।
देशभर के शारीरिक शिक्षकों की पीड़ा


PEFI का कहना है कि यह समस्या केवल बिहार की नहीं, बल्कि देशभर के हजारों शारीरिक शिक्षकों की साझा पीड़ा है। भारत जैसे युवा देश में शारीरिक शिक्षा और फिटनेस संस्कृति को मजबूत करने के लिए प्रशिक्षकों को समान सम्मान और सुरक्षा देना अनिवार्य है।
खेल महाशक्ति बनने की राह में सबसे बड़ी बाधा
PEFI के अनुसार, यदि भारत को खेल महाशक्ति के रूप में स्थापित करना है, तो सबसे पहले उन शिक्षकों को सशक्त करना होगा जो बचपन से ही खिलाड़ियों की नींव रखते हैं। जब तक उन्हें स्थायित्व, सुरक्षा और सामाजिक सम्मान नहीं मिलेगा, तब तक देश की खेल संभावनाएं अधूरी ही रहेंगी।
सरकार से सीधी अपील
PEFI ने मुख्यमंत्री से अपील करते हुए कहा है:
“मुख्यमंत्री से हमारी विनम्र अपील है कि वे इस विषय को नीतिगत प्राथमिकता में शामिल करें और शारीरिक शिक्षा अनुदेशकों को उनका वाजिब अधिकार, सम्मान और स्थायित्व प्रदान करने की पहल करें।”


