
बिहार में लगातार बढ़ती भीषण गर्मी और संभावित जल संकट को देखते हुए राज्य सरकार ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है। लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) के सचिव पंकज कुमार पाल ने सभी क्षेत्रीय पदाधिकारियों की छुट्टियां तत्काल प्रभाव से रद्द करने का निर्देश जारी किया है। इस आदेश का उद्देश्य राज्य के हर हिस्से में पेयजल आपूर्ति को निर्बाध बनाए रखना और किसी भी प्रकार के जल संकट से समय रहते निपटना है।
दरअसल, पिछले कुछ दिनों से बिहार के कई जिलों में तापमान तेजी से बढ़ रहा है। कई जगहों पर तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है, जबकि कुछ जिलों में लू जैसे हालात भी देखने को मिल रहे हैं। गर्मी के इस प्रकोप के कारण भू-जल स्तर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है, जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में पानी की किल्लत की आशंका बढ़ गई है। इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग ने यह अहम निर्णय लिया है।
PHED सचिव पंकज कुमार पाल ने अपने निर्देश में साफ कहा है कि सभी क्षेत्रीय अधिकारी और कर्मचारी अलर्ट मोड में रहें और अपने-अपने क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति की स्थिति पर लगातार निगरानी बनाए रखें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सामान्य परिस्थितियों में किसी भी अधिकारी की छुट्टी स्वीकृत नहीं की जाएगी। केवल अत्यंत आपात स्थिति में ही अवकाश दिया जाएगा, और इसके लिए भी सचिव स्तर से अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
सरकार का यह कदम इस बात को दर्शाता है कि इस बार प्रशासन किसी भी स्थिति में जल संकट को लेकर लापरवाही नहीं बरतना चाहता। सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जहां-जहां भू-जल स्तर में कमी की स्थिति बन रही है, वहां तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। इसके तहत टैंकरों के माध्यम से पानी की आपूर्ति, हैंडपंपों की मरम्मत, खराब जलापूर्ति योजनाओं को तुरंत चालू करना और पाइपलाइन सिस्टम को दुरुस्त करना शामिल है।
विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों में पानी की समस्या ज्यादा गंभीर हो सकती है, क्योंकि वहां जल स्रोत सीमित होते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे गांव-गांव जाकर स्थिति का जायजा लें और जरूरत के अनुसार तत्काल कार्रवाई करें। किसी भी क्षेत्र में यदि पेयजल आपूर्ति बाधित होती है, तो उसे प्राथमिकता के आधार पर ठीक किया जाए।
शहरी क्षेत्रों के लिए भी अलग से रणनीति बनाई गई है। नगर निगम और जलापूर्ति विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि शहरों में जलापूर्ति नियमित रूप से होती रहे। पाइपलाइन में लीकेज, मोटर खराब होने या बिजली की समस्या जैसी तकनीकी दिक्कतों को तुरंत दूर करने के निर्देश दिए गए हैं।
सचिव पंकज कुमार पाल ने कहा कि राज्य के किसी भी इलाके में इस बार जल संकट की स्थिति उत्पन्न नहीं होनी चाहिए। इसके लिए सभी अधिकारी अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से निभाएं और समय पर आवश्यक कदम उठाएं। उन्होंने यह भी कहा कि विभागीय स्तर पर लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इसके साथ ही आम जनता से भी अपील की गई है कि वे पानी का उपयोग सोच-समझकर करें और बेवजह पानी की बर्बादी से बचें। गर्मी के मौसम में पानी की खपत बढ़ जाती है, ऐसे में यदि सभी लोग मिलकर पानी बचाने का प्रयास करें, तो संकट की स्थिति को काफी हद तक टाला जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जल संकट केवल सरकारी प्रयासों से नहीं सुलझ सकता, इसके लिए समाज के हर वर्ग को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। वर्षा जल संचयन, पानी का पुनः उपयोग और जल संरक्षण के अन्य उपायों को अपनाना बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की समस्याओं से बचा जा सके।
सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि यदि जरूरत पड़ी तो अतिरिक्त संसाधनों का उपयोग किया जाएगा और अन्य विभागों की मदद भी ली जाएगी। आपदा प्रबंधन विभाग को भी अलर्ट पर रखा गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
कुल मिलाकर, भीषण गर्मी के इस दौर में बिहार सरकार पूरी तरह सतर्क नजर आ रही है। PHED अधिकारियों की छुट्टियां रद्द करने का फैसला इसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि जमीनी स्तर पर इन निर्देशों का कितना प्रभावी क्रियान्वयन होता है और क्या राज्य वास्तव में संभावित जल संकट से बच पाता है या नहीं।


