दरभंगा।ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (LNMU) द्वारा आयोजित पीएचडी एडमिशन टेस्ट (PAT) में भारी गड़बड़ी का आरोप लगने के बाद बड़ा फैसला लिया गया है। शनिवार को सीएम साइंस कॉलेज, दरभंगा में परीक्षा के दौरान छात्रों ने धांधली का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। हालात बेकाबू होने पर कॉलेज प्रशासन ने दोनों पालियों की परीक्षा रद्द कर दी।
परीक्षा के बीच हंगामा, फाड़ी गईं कॉपियां
शनिवार को सीएम साइंस कॉलेज में पीएचडी प्रवेश परीक्षा कराई जा रही थी। परीक्षा शुरू होने के कुछ देर बाद ही छात्रों ने आरोप लगाया कि कुछ कमरों में गड़बड़ी की जा रही है। देखते ही देखते मामला बढ़ गया और कई छात्र-छात्राएं क्लास रूम से बाहर निकलकर नारेबाजी करने लगे।
कुछ छात्रों ने आरोप के विरोध में अपनी ओएमआर शीट और उत्तर पुस्तिकाएं वहीं फाड़ दीं। इसके बाद पूरे कॉलेज परिसर में अफरा-तफरी मच गई।
“पूरा सेंटर मैनेज है” – छात्रों का आरोप
छात्रों ने दावा किया कि
- एक कमरे में चार-चार छात्र मोबाइल से जवाब लिख रहे थे,
- दूसरे कमरे में प्रोफेसर प्रश्न पत्र बाहर ले जाकर टिक लगाकर वापस दे रहे थे,
- कुलपति और कॉलेज प्राचार्य की सेटिंग से सब कुछ कराया जा रहा था।
छात्रों का कहना है कि,
“जिसका सेटिंग है, उसी का रिजल्ट आएगा। इसलिए हमलोग ओएमआर जमा नहीं करेंगे।”
प्रशासन ने किया आरोपों से इनकार
सीएम साइंस कॉलेज के प्रोफेसर संजीव कुमार मिश्र ने सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया।
उन्होंने कहा—
“मैं खुद सुबह आठ बजे से सेंटर पर मौजूद था। पहली पाली शांतिपूर्ण चल रही थी। बीच में कुछ असंतुष्ट छात्रों ने शरारत शुरू की। जिन्हें ओएमआर भरना नहीं आता, वे हंगामा करने लगे। कुछ बाहरी तत्वों ने भी माहौल बिगाड़ा।”
उन्होंने बताया कि दूसरी पाली में भी हंगामा बढ़ गया और कुछ छात्रों ने परीक्षा दे रहे छात्रों की कॉपियां फाड़ दीं। इसके बाद मजबूरी में दोनों पालियों की परीक्षा रद्द करनी पड़ी।
कुलपति भी पहुंचे, जांच के आदेश
घटना की सूचना पर विश्वविद्यालय के कुलपति भी मौके पर पहुंचे। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट तैयार की गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले की विस्तृत जांच कराने का भरोसा दिया है।
पारदर्शिता पर उठे सवाल
इस घटना के बाद छात्र-छात्राओं के बीच परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। छात्रों का कहना है कि जब तक निष्पक्ष व्यवस्था नहीं होगी, वे परीक्षा में भाग नहीं लेंगे।
फिलहाल कॉलेज परिसर में स्थिति सामान्य है, लेकिन मामले को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन पर दबाव बढ़ता जा रहा है।


