पटना | 26 फरवरी, 2026: बिहार में नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में एक नया मील का पत्थर स्थापित हुआ है। राजधानी स्थित राजेंद्र नगर सुपरस्पेशलिस्ट ऑप्थैल्मिक साइंस अस्पताल अब केवल इलाज का केंद्र नहीं, बल्कि एक उच्च स्तरीय शैक्षणिक संस्थान (Academic Institute) के रूप में उभरेगा। संस्थान में अब मेडिकल छात्रों के लिए पोस्ट ग्रेजुएट (PG) की पढ़ाई शुरू होने जा रही है, जिससे बिहार के साथ-साथ देशभर के छात्रों को विशेषज्ञता हासिल करने का मौका मिलेगा।
4 सीटों पर मुहर: नेशनल और स्टेट कोटा का गणित
राजेंद्र नगर नेत्रालय और नेशनल बोर्ड ऑफ एजुकेशन (NBE) के बीच डीएनबी (DNB) सीटों को लेकर महत्वपूर्ण एमओयू (MoU) साइन किया गया है।
- कुल सीटें: इस शैक्षणिक सत्र से कुल 4 डीएनबी सीटों पर दाखिला लिया जाएगा।
- सीटों का बंटवारा: इनमें से 2 सीटें नेशनल कोटा के लिए आरक्षित होंगी, जिससे देश-विदेश के प्रतिभावान छात्र बिहार आकर शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे।
- राज्य का कोटा: शेष 2 सीटों पर स्टेट कोटा के माध्यम से बिहार के स्थानीय छात्रों को प्राथमिकता दी जाएगी।
ऑप्टोमेट्री छात्रों के लिए इंटर्नशिप की सौगात
अस्पताल के निदेशक डॉ. अजीत कुमार द्विवेदी ने बताया कि संस्थान को विश्वस्तरीय एकेडमिक इंस्टीट्यूट बनाने की दिशा में कई अन्य कदम भी उठाए गए हैं:
- सालाना इंटर्नशिप: अब हर साल 16 ऑप्टोमेट्री छात्रों के लिए इंटर्नशिप की स्थायी व्यवस्था की गई है।
- विशेषज्ञों की टीम: इस ऐतिहासिक अवसर पर अस्पताल निदेशक के साथ आशुतोष कुमार, जीरेश कुमार, प्रभाकर सिन्हा और पीएचएफआई (PHFI) की टीम भी मौजूद रही।
हर दिन 800 मरीजों का भरोसा: बढ़ी डॉक्टरों की फौज
अस्पताल की बढ़ती साख और मरीजों की भारी संख्या को देखते हुए यहाँ की व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ किया गया है:
- मरीजों की संख्या: अस्पताल में प्रतिदिन औसतन 700 से 800 मरीज आँखों के इलाज के लिए पहुँचते हैं।
- डॉक्टरों की तैनाती: बेहतर चिकित्सा प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए विभाग ने डॉक्टरों की संख्या बढ़ाकर अब 17 कर दी है।
- जटिल ऑपरेशनों में सफलता: यहाँ रोजाना 80 से 100 मरीजों का मोतियाबिंद, दृष्टि सुधार, ग्लूकोमा (काला मोतिया), कॉर्निया प्रत्यारोपण और रेटिना से संबंधित गंभीर बीमारियों का सफल इलाज किया जा रहा है।
VOB का नजरिया: बिहार के लिए क्यों है यह खास?
राजेंद्र नगर नेत्रालय का एकेडमिक इंस्टीट्यूट बनना बिहार के चिकित्सा ढांचे के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। अब तक विशेषज्ञ शिक्षा के लिए छात्रों को अक्सर दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता था, लेकिन अब उन्हें अपने ही प्रदेश में विश्वस्तरीय अनुभव मिलेगा। साथ ही, पीजी छात्रों के आने से अस्पताल में अनुसंधान (Research) को बढ़ावा मिलेगा, जिसका सीधा लाभ मरीजों को बेहतर और आधुनिक इलाज के रूप में मिलेगा।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।


