
- राजधानी पटना के स्वास्थ्य महकमे ने सरकारी अस्पतालों की सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है, जिसके तहत अब जिले के उन तमाम अस्पतालों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे जहां अब तक यह सुविधा उपलब्ध नहीं थी।
- जिला स्वास्थ्य समिति की ओर से पटना के सभी चिकित्सा प्रभारियों और अधीक्षकों को पत्र जारी कर स्पष्ट कर दिया गया है कि अस्पतालों की निगरानी में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
- सिविल सर्जन योगेंद्र मंडल ने विशेष रूप से राजेंद्र नगर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और गर्दनीबाग अस्पताल के प्रबंधन को फटकार लगाते हुए तत्काल प्रभाव से कैमरे लगाने का आदेश दिया है।
- इस पहल का मुख्य उद्देश्य अस्पतालों में आने वाले मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की उपस्थिति की निगरानी करना और अस्पताल परिसर में होने वाली संदिग्ध गतिविधियों पर लगाम लगाना है।
- सीसीटीवी कैमरों के लग जाने से दवा वितरण केंद्रों, ओपीडी और इमरजेंसी वार्डों में होने वाली भीड़ और व्यवस्थाओं की सीधी मॉनिटरिंग जिला मुख्यालय से की जा सकेगी।
पटना (द वॉयस ऑफ बिहार)।
अस्पतालों की सुरक्षा और व्यवस्था में बड़े बदलाव की आहट
बिहार की राजधानी पटना के सरकारी अस्पतालों में अब सुरक्षा और अनुशासन का नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। अक्सर यह शिकायतें आती रही हैं कि सरकारी अस्पतालों में रात के समय सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं होते और कई बार असामाजिक तत्वों द्वारा मरीजों या उनके परिजनों के साथ दुर्व्यवहार किया जाता है। इन तमाम समस्याओं के समाधान के लिए जिला स्वास्थ्य समिति ने अब तकनीकी का सहारा लेने का निर्णय लिया है। पटना के सिविल सर्जन योगेंद्र मंडल ने जिले के उन सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) और अनुमंडल अस्पतालों की सूची तैयार कराई है, जहां अब तक सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हैं। इस सूची के आधार पर अब युद्धस्तर पर कैमरों को लगाने का काम शुरू किया जाएगा।
राजेंद्र नगर और गर्दनीबाग अस्पताल पर विशेष नजर
सिविल सर्जन ने अपनी जांच में पाया कि पटना के कई महत्वपूर्ण अस्पतालों में भी कैमरों की कमी है या जो पुराने कैमरे लगे हैं, वे काम नहीं कर रहे हैं। इसी कड़ी में राजेंद्र नगर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा अधीक्षक और गर्दनीबाग अस्पताल के उपाधीक्षक को कड़ा पत्र लिखा गया है। इन दोनों अस्पतालों में मरीजों का भारी दबाव रहता है, बावजूद इसके यहां कैमरों के जरिए निगरानी की व्यवस्था सुदृढ़ नहीं थी। योगेंद्र मंडल ने साफ शब्दों में कहा है कि इन अस्पतालों के प्रबंधन को जल्द से जल्द कैमरे लगवाने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी और इसकी रिपोर्ट जिला कार्यालय को सौंपनी होगी। यदि भविष्य में इन केंद्रों पर कोई अप्रिय घटना होती है और सीसीटीवी फुटेज की अनुपलब्धता पाई जाती है, तो संबंधित अस्पताल के प्रमुख को सीधे तौर पर जिम्मेदार माना जाएगा।
डॉक्टरों की हाजिरी और मरीजों के साथ व्यवहार की होगी मॉनिटरिंग
सीसीटीवी कैमरे केवल अपराधियों को पकड़ने के लिए नहीं, बल्कि अस्पताल के भीतर की कार्यसंस्कृति सुधारने के लिए भी लगाए जा रहे हैं। जिला स्वास्थ्य समिति के अधिकारियों का मानना है कि कैमरों की निगरानी होने से डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के समय पर आने-जाने की सटीक जानकारी मिल सकेगी। अक्सर ऐसी खबरें आती हैं कि इमरजेंसी वार्ड या ओपीडी से डॉक्टर नदारद रहते हैं, जिससे मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। अब कैमरों के जरिए यह देखा जा सकेगा कि कौन सा कर्मचारी अपनी ड्यूटी पर तैनात है और मरीजों के साथ उनका व्यवहार कैसा है। दवा वितरण केंद्रों (काउंटरों) पर लगने वाली लंबी कतारों को व्यवस्थित करने में भी ये कैमरे सहायक सिद्ध होंगे।
दवाओं की चोरी और दलालों के सिंडिकेट पर होगी चोट
पटना के बड़े सरकारी अस्पतालों में दवा माफिया और दलालों का एक सक्रिय सिंडिकेट काम करता है, जो भोले-भले मरीजों को निजी जांच केंद्रों या मेडिकल स्टोरों पर ले जाने का काम करते हैं। इसके अलावा, सरकारी दवाओं की कालाबाजारी की खबरें भी समय-समय पर आती रहती हैं। सीसीटीवी कैमरे लग जाने से दवा के स्टोर रूम और वितरण काउंटर पर पैनी नजर रखी जा सकेगी। अस्पताल परिसर में घूमने वाले संदिग्ध लोगों और दलालों की पहचान करना अब आसान हो जाएगा। सिविल सर्जन कार्यालय ने निर्देश दिया है कि कैमरों का कंट्रोल रूम अस्पताल के मुख्य कक्ष में होगा और इसकी एक लिंक जिला स्वास्थ्य समिति के सर्वर से भी जोड़ने पर विचार किया जा रहा है ताकि मुख्यालय से कभी भी किसी भी अस्पताल का लाइव फुटेज देखा जा सके।
सुरक्षा मानकों में सुधार और आम जनता का भरोसा
सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति आम जनता का भरोसा तभी बढ़ता है जब उन्हें अस्पताल परिसर में सुरक्षित और व्यवस्थित माहौल मिले। रात के समय महिला मरीजों और स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती रही है। सीसीटीवी कैमरों के लग जाने से अंधेरे कोनों और कम भीड़ वाले क्षेत्रों में भी सुरक्षा का एहसास होगा। सिविल सर्जन योगेंद्र मंडल ने बताया कि कैमरों की गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। निर्देश दिए गए हैं कि उच्च क्षमता वाले ‘नाइट विजन’ कैमरे लगाए जाएं जो कम रोशनी में भी स्पष्ट तस्वीर ले सकें। साथ ही, कम से कम 30 दिनों का बैकअप डेटा सुरक्षित रखने की व्यवस्था करने को कहा गया है ताकि किसी भी विवाद की स्थिति में पुरानी फुटेज को साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल किया जा सके।
बजट और क्रियान्वयन की चुनौतियां
हालांकि, सभी अस्पतालों में एक साथ सीसीटीवी कैमरे लगाना एक बड़ा वित्तीय और तकनीकी कार्य है। जिला स्वास्थ्य समिति ने इसके लिए फंड की उपलब्धता सुनिश्चित करने की बात कही है। कई अस्पतालों में पहले से ही अन्य निर्माण कार्यों के लिए राशि आवंटित है, जिसका एक हिस्सा अब सुरक्षा उपकरणों पर खर्च किया जा सकेगा। सिविल सर्जन ने सभी प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारियों को यह भी निर्देश दिया है कि वे अपने स्तर पर भी स्थानीय निधि से कैमरों का इंतजाम करें। आने वाले दो महीनों के भीतर पटना जिले का कोई भी सरकारी अस्पताल ऐसा नहीं होगा जो सीसीटीवी की निगरानी से बाहर हो।
तकनीक से सुधरेगी बिहार की स्वास्थ्य सेवा
पटना के अस्पतालों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का यह फैसला एक स्वागत योग्य कदम है। यह न केवल अपराधियों के मन में डर पैदा करेगा, बल्कि अस्पताल के कर्मचारियों को भी अपनी जिम्मेदारी के प्रति सचेत रखेगा। राजेंद्र नगर और गर्दनीबाग जैसे व्यस्त केंद्रों से शुरू हुई यह मुहिम यदि सभी प्रखंडों तक सफलतापूर्वक पहुंचती है, तो यह बिहार के स्वास्थ्य ढांचे में एक बड़ा प्रशासनिक सुधार साबित होगा। अब देखना यह है कि कागजी निर्देशों के बाद जमीन पर ये कैमरे कितनी जल्दी सक्रिय होते हैं और क्या इनके लगने के बाद अस्पतालों की अव्यवस्था और भ्रष्टाचार में कमी आती है। द वॉयस ऑफ बिहार की टीम इस मिशन की प्रगति पर अपनी नजर बनाए रखेगी ताकि मरीजों को एक सुरक्षित और अनुशासित चिकित्सा माहौल मिल सके।


