मुजफ्फरपुर प्रॉपर्टी डीलर मर्डर मिस्ट्री: 30 लाख लौटाने के बदले 5 लाख की ‘सुपारी’ देकर प्रभाकर सिंह को रास्ते से हटाया, पुलिस ने रची गई खूनी साजिश का किया पर्दाफाश

  • ​मुजफ्फरपुर के अहियापुर थाना क्षेत्र अंतर्गत बाड़ा जगन्नाथ चौक पर सोमवार को हुई दुस्साहसिक हत्या की गुत्थी को पुलिस ने महज 48 घंटों के भीतर सुलझा लिया है।
  • ​प्रॉपर्टी डीलर प्रभाकर सिंह की हत्या के पीछे किसी पुरानी रंजिश या वर्चस्व की जंग नहीं, बल्कि 30 लाख रुपये के लेन-देन का विवाद मुख्य कारण बनकर उभरा है।
  • ​पुलिस की जांच में खुलासा हुआ है कि मुख्य आरोपी तुलसी राय को प्रभाकर सिंह के 30 लाख रुपये लौटाने थे, लेकिन कर्ज चुकाने के बजाय उसने 5 लाख रुपये की ‘सुपारी’ देकर प्रभाकर को हमेशा के लिए खामोश करने की योजना बनाई।
  • ​पुलिस ने इस मामले में मास्टरमाइंड प्रॉपर्टी डीलर तुलसी राय और उसके सहयोगी उदय पटेल को गिरफ्तार कर लिया है, जिन्होंने अपना गुनाह कबूल कर लिया है।
  • ​वारदात को अंजाम देने वाले अहियापुर के ही दो कुख्यात शूटरों की पहचान कर ली गई है और उनकी गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं।

मुजफ्फरपुर (द वॉयस ऑफ बिहार)।

लेन-देन की आग में जला रिश्तों का भरोसा: 30 लाख का कर्ज बना मौत का सबब

उत्तर बिहार की व्यावसायिक राजधानी कहे जाने वाले मुजफ्फरपुर में प्रॉपर्टी के धंधे में खून बहने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। अहियापुर के बाड़ा जगन्नाथ चौक पर सोमवार को जिस तरह से दिनदहाड़े प्रॉपर्टी डीलर प्रभाकर सिंह को गोलियों से भून दिया गया, उसने पूरे शहर में सनसनी फैला दी थी। मुजफ्फरपुर पुलिस के लिए यह मामला एक बड़ी चुनौती था। एसएसपी और सिटी एसपी के नेतृत्व में गठित विशेष टीम ने जब जांच की दिशा मोड़ी, तो परतें एक-एक कर खुलने लगीं। यह हत्या केवल एक अपराध नहीं था, बल्कि एक सोची-समझी खूनी पटकथा थी, जिसे अपनों के बीच ही रचा गया था। जांच में यह कड़वा सच सामने आया कि प्रभाकर सिंह की हत्या की जड़ें उस 30 लाख रुपये के लेन-देन में दफन थीं, जो उन्हें अपने ही सहयोगी तुलसी राय से वापस लेने थे।

5 लाख की ‘सुपारी’ और मौत का सौदा: तुलसी राय का खौफनाक कबूलनामा

पुलिस की गिरफ्त में आए शेखपुर निवासी तुलसी राय ने पूछताछ के दौरान जो खुलासे किए, वे किसी के भी रोंगटे खड़े कर सकते हैं। तुलसी राय खुद भी प्रॉपर्टी के धंधे से जुड़ा हुआ है और प्रभाकर सिंह के साथ उसके पुराने व्यावसायिक संबंध थे। प्रभाकर ने किसी जमीन के सौदे या निजी जरूरत के लिए तुलसी को 30 लाख रुपये दिए थे। काफी समय बीत जाने के बाद भी जब तुलसी ने पैसे वापस नहीं किए, तो प्रभाकर ने उन पर दबाव बनाना शुरू किया। तुलसी राय को लगा कि यदि प्रभाकर जीवित रहा, तो उसे हर हाल में 30 लाख रुपये चुकाने होंगे। इसी वित्तीय दबाव से बचने के लिए उसने एक घातक रास्ता चुना। उसने तय किया कि 30 लाख लौटाने से बेहतर है कि 5 लाख रुपये खर्च करके प्रभाकर को रास्ते से ही हटा दिया जाए। इसके लिए उसने कटरा के बखरी निवासी उदय पटेल के साथ मिलकर पूरी योजना तैयार की और स्थानीय शूटरों को सुपारी दी।

वारदात की पटकथा: बाड़ा जगन्नाथ चौक पर घात लगाकर किया गया हमला

सोमवार का वह दिन प्रभाकर सिंह के लिए किसी सामान्य कार्यदिवस की तरह शुरू हुआ था। लेकिन उन्हें इस बात का रत्ती भर भी अंदाजा नहीं था कि उनकी हर हरकत पर तुलसी राय के भेजे हुए शूटर नजर रख रहे हैं। उदय पटेल ने शूटरों को प्रभाकर के लोकेशन की पल-पल की जानकारी दी। जैसे ही प्रभाकर सिंह अहियापुर के बाड़ा जगन्नाथ चौक पर पहुंचे, मोटरसाइकिल सवार दो नकाबपोश शूटरों ने उन्हें घेर लिया। इससे पहले कि प्रभाकर संभल पाते, शूटरों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। गोलियों की गूंज से पूरा इलाका दहल उठा और प्रभाकर वहीं लहूलुहान होकर गिर पड़े। अस्पताल ले जाने के दौरान उनकी मौत हो गई। अपराधियों ने इस वारदात को इतनी सफाई से अंजाम दिया कि शुरुआत में पुलिस को यह आपसी रंजिश का मामला लग रहा था।

पुलिसिया कार्रवाई: वैज्ञानिक साक्ष्यों और सीडीआर ने खोला राज

हत्याकांड के बाद पुलिस ने तकनीकी सेल की मदद ली। प्रभाकर सिंह के मोबाइल के कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) खंगाले गए, जिससे यह पता चला कि पिछले कुछ दिनों में उनकी तुलसी राय और उदय पटेल से कई बार तीखी बहस हुई थी। पुलिस ने संदेह के आधार पर तुलसी राय को हिरासत में लेकर जब मनोवैज्ञानिक तरीके से पूछताछ की, तो वह टूट गया और उसने सारा सच उगल दिया। तुलसी की निशानदेही पर ही उदय पटेल को दबोचा गया। पुलिस ने बताया कि उदय पटेल ही वह कड़ी था जिसने मुख्य आरोपी और शूटरों के बीच पुल का काम किया। शूटरों को एडवांस के तौर पर एक मोटी रकम पहले ही दी जा चुकी थी और शेष राशि काम पूरा होने के बाद दी जानी थी।

मुजफ्फरपुर में प्रॉपर्टी डीलिंग का खूनी चेहरा: सफेदपोशों के पीछे छिपे अपराधी

मुजफ्फरपुर और उसके आसपास के इलाकों में जमीन की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिसके कारण इस क्षेत्र में अपराधियों का हस्तक्षेप बढ़ गया है। प्रभाकर सिंह की हत्या ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि प्रॉपर्टी डीलिंग के धंधे में सफेदपोश चेहरों के पीछे किस कदर खूंखार अपराधी सक्रिय हैं। तुलसी राय जैसे लोग, जो समाज में एक व्यवसायी के रूप में पहचाने जाते हैं, वे अपने आर्थिक लाभ के लिए किसी की जान लेने से भी गुरेज नहीं करते। मुजफ्फरपुर पुलिस अब उन तमाम डील्स की भी जांच कर रही है जिनमें तुलसी राय और प्रभाकर सिंह शामिल थे। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस खूनी खेल में कुछ और भी प्रभावशाली लोग शामिल हैं जिन्होंने पर्दे के पीछे से तुलसी राय को शह दी थी।

शूटरों की तलाश: अहियापुर में पुलिस की सघन छापेमारी

मुख्य साजिशकर्ताओं की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस का पूरा ध्यान उन दो शूटरों पर है जिन्होंने ट्रिगर दबाया था। गिरफ्तार आरोपियों ने पुलिस को उन दोनों के नाम और ठिकाने बता दिए हैं। बताया जा रहा है कि दोनों शूटर अहियापुर इलाके के ही रहने वाले हैं और पूर्व में भी कई आपराधिक वारदातों में संलिप्त रहे हैं। पुलिस की विशेष टीमें अहियापुर के अलावा कांटी, मोतीपुर और पड़ोसी जिलों में भी छापेमारी कर रही हैं। पुलिस का दावा है कि शूटरों के भागने के सभी रास्ते बंद कर दिए गए हैं और बहुत जल्द वे भी सलाखों के पीछे होंगे। पुलिस उस हथियार और मोटरसाइकिल को भी बरामद करने का प्रयास कर रही है जिसका उपयोग वारदात में किया गया था।

समाज और व्यवसायियों में दहशत: सुरक्षा पर उठते सवाल

प्रभाकर सिंह की हत्या और उसके बाद हुए इस खुलासे ने मुजफ्फरपुर के व्यवसायी वर्ग को डरा दिया है। लोगों का कहना है कि अगर पैसे के लेन-देन के लिए सुपारी देकर हत्या कराई जाने लगेगी, तो व्यापार करना असंभव हो जाएगा। अहियापुर का इलाका, जो पहले से ही अपराध के लिए संवेदनशील माना जाता है, वहां इस तरह की घटना पुलिस गश्त पर भी सवाल उठाती है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि बाड़ा जगन्नाथ चौक जैसे व्यस्त इलाके में अपराधियों का बेखौफ होकर गोली चलाना और भाग जाना यह दर्शाता है कि अपराधियों में कानून का डर खत्म हो चुका है। हालांकि, पुलिस द्वारा त्वरित खुलासे से जनता का भरोसा कुछ हद तक बहाल हुआ है।

निष्कर्ष: न्याय की प्रक्रिया और पुलिस की सतर्कता

मुजफ्फरपुर पुलिस ने प्रभाकर सिंह हत्याकांड का पर्दाफाश कर यह संदेश देने की कोशिश की है कि अपराधी चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, वह कानून की नजरों से बच नहीं सकता। तुलसी राय और उदय पटेल की गिरफ्तारी इस मामले की पहली बड़ी सफलता है। अब सबकी नजरें उन शूटरों की गिरफ्तारी पर टिकी हैं जिन्होंने इस हत्याकांड को अंजाम दिया। पुलिस का कहना है कि वह इस मामले में ‘स्पीडी ट्रायल’ की अनुशंसा करेगी ताकि दोषियों को उनके किए की कड़ी सजा मिल सके और प्रभाकर सिंह के परिवार को वास्तविक न्याय मिले। 30 लाख के कर्ज को 5 लाख की सुपारी से चुकाने का यह घिनौना प्रयास तुलसी राय को अब अपनी पूरी जिंदगी जेल की सलाखों के पीछे बिताने पर मजबूर कर देगा।

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