
पटना। बिहार की राजधानी पटना की सड़कों पर रेंगते ट्रैफिक और घंटों तक लगने वाले भीषण जाम से नागरिकों को मुक्ति दिलाने के लिए प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी और संयुक्त कार्ययोजना तैयार की है। शहर के व्यस्ततम चौक-चौराहों को जाम मुक्त बनाने के लिए ‘त्रिकोणीय गठबंधन’ बनाया गया है, जिसमें पटना ट्रैफिक पुलिस, नगर निगम और पथ निर्माण विभाग एक साथ मिलकर धरातल पर उतर रहे हैं। इस नई व्यवस्था के तहत अब पटना के किसी भी प्रमुख चौराहे के 150 फीट के दायरे में किसी भी प्रकार के वाहन खड़े करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। प्रशासन ने इस ‘लक्ष्मण रेखा’ को खींचने के लिए 30 अप्रैल 2026 तक की समय सीमा निर्धारित की है। इस माह के अंत तक पटना की सड़कों की सूरत बदलने वाली है, जहाँ न केवल सड़कों पर स्पष्ट निशान और संकेतक नजर आएंगे, बल्कि नियमों की अवहेलना करने वालों पर भारी जुर्माने की कार्रवाई भी की जाएगी। यह निर्णय शहर के बढ़ते वाहनों के दबाव और फ्लाईओवर के दोनों छोरों पर लगने वाले अनियंत्रित जाम को देखते हुए लिया गया है।
तीन विभागों का संगम: क्यों जरूरी थी संयुक्त योजना?
पटना में ट्रैफिक जाम की समस्या कोई नई नहीं है, लेकिन इसके समाधान के लिए अब तक किए गए प्रयास अक्सर विभागीय तालमेल की कमी के कारण विफल साबित होते रहे हैं। ट्रैफिक पुलिस ने लगभग दो माह पहले ही यह निर्णय लिया था कि चौराहों से 150 फीट की दूरी तक किसी भी वाहन के स्टैंड को हटाया जाए। हालांकि, जब इस योजना को लागू करने की बारी आई, तो कई तकनीकी पेच फंस गए। शहर की प्रमुख सड़कें पथ निर्माण विभाग (Road Construction Department) के अधिकार क्षेत्र में आती हैं, जबकि सड़कों के किनारे की सफाई और फुटपाथ का प्रबंधन नगर निगम (Nagar Nigam) के जिम्मे है।
ट्रैफिक पुलिस अकेले सड़कों पर निशान नहीं लगा सकती थी और न ही सड़कों के डिजाइन में बदलाव कर सकती थी। इसी समस्या को समझते हुए अब तीनों विभागों के उच्चाधिकारियों ने एक साथ बैठकर साझा रणनीति बनाई है। पथ निर्माण विभाग सड़कों की मरम्मत और चौराहों के डिजाइन पर काम करेगा, नगर निगम नो-पार्किंग जोन को चिह्नित करने और वहां से अतिक्रमण हटाने की जिम्मेदारी संभालेगा, और ट्रैफिक पुलिस इन नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराएगी। इस समन्वय से यह उम्मीद जगी है कि अब सड़कों पर होने वाली कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगी।
150 फीट का ‘नो-गो’ जोन: क्या है नई व्यवस्था?
प्रशासन की नई गाइडलाइन के अनुसार, पटना के हर छोटे-बड़े चौराहे के चारों ओर 150 फीट के दायरे को पूरी तरह से ‘नो पार्किंग’ और ‘नो स्टैंड’ एरिया घोषित किया जा रहा है। इसका सीधा मतलब यह है कि चौराहों के एकदम पास अब न तो ऑटो रुकेंगे, न ई-रिक्शा खड़ा होगा और न ही कोई निजी वाहन पार्क किया जा सकेगा। अक्सर देखा जाता है कि चौराहों पर ही ऑटो और ई-रिक्शा चालक सवारी बैठाने के लिए गाड़ियां खड़ी कर देते हैं, जिससे पीछे से आने वाले वाहनों के लिए रास्ता संकरा हो जाता है और देखते ही देखते लंबा जाम लग जाता है।
इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए सड़कों पर विशेष प्रकार के थर्मल पेंट से निशान लगाए जाएंगे। इसके अलावा, जगह-जगह बड़े और स्पष्ट संकेतक (Signages) लगाए जाएंगे ताकि वाहन चालकों को यह पता रहे कि वे प्रतिबंधित क्षेत्र में हैं। यदि कोई वाहन 150 फीट की इस सीमा के भीतर खड़ा पाया जाता है, तो उसे तुरंत क्रेन के जरिए उठाया जाएगा या डिजिटल चालान के जरिए भारी जुर्माना वसूला जाएगा। इसके लिए चौराहों पर तैनात पुलिसकर्मियों को विशेष रूप से प्रशिक्षित और निर्देशित किया गया है।
ट्रैफिक एसपी का कड़ा रुख: अवहेलना पर होगी सख्त कार्रवाई
पटना के ट्रैफिक एसपी सागर कुमार ने इस योजना की गंभीरता को स्पष्ट करते हुए कहा कि शहर में जाम का एक प्रमुख कारण चौराहों के पास वाहनों का अनधिकृत जमावड़ा है। उन्होंने बताया कि ट्रैफिक पुलिस अब किसी भी प्रकार की नरमी बरतने के मूड में नहीं है। सागर कुमार के अनुसार, चाहे वह ऑटो हो, ई-रिक्शा हो या कोई रसूखदार व्यक्ति का निजी वाहन—यदि वह 150 फीट के दायरे में खड़ा पाया गया, तो कानून अपना काम करेगा।
ट्रैफिक एसपी ने स्पष्ट किया कि पुलिस ने पिछले दिनों कई सड़कों पर काम शुरू भी किया था, लेकिन अब संयुक्त अभियान के कारण इसे और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। अब चौराहों पर तैनात ट्रैफिक जवानों की जिम्मेदारी केवल सिग्नल संचालित करना ही नहीं होगी, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी होगा कि उनके अधिकार क्षेत्र के 150 फीट के भीतर कोई भी वाहन ‘स्टेटिक’ (स्थिर) न रहे। जो पुलिसकर्मी इस नियम को लागू करने में कोताही बरतेंगे, उन पर भी विभागीय कार्रवाई की गाज गिर सकती है।
फ्लाईओवर के छोर बने सिरदर्द: विशेष रणनीति की आवश्यकता
पटना के ट्रैफिक सिस्टम में फ्लाईओवर एक बड़ी राहत बनकर आए थे, लेकिन वर्तमान समय में ये जाम का नया केंद्र बन गए हैं। विशेष रूप से फ्लाईओवर के चढ़ने और उतरने वाले पॉइंट्स पर गाड़ियों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। आर-ब्लॉक, कंकड़बाग, और बेली रोड जैसे इलाकों में फ्लाईओवर के पास स्थिति काफी गंभीर हो जाती है। नई योजना के तहत फ्लाईओवर के दोनों छोरों पर भी 150 फीट की इसी व्यवस्था को लागू किया जाएगा।
अक्सर फ्लाईओवर से उतरते ही ऑटो चालक सवारियों के लिए गाड़ियां रोक देते हैं, जिससे ऊपर से आने वाली रफ़्तार सुस्त पड़ जाती है और पूरा फ्लाईओवर जाम की चपेट में आ जाता है। नगर निगम और पथ निर्माण विभाग अब इन पॉइंट्स पर विशेष रेलिंग या डिवाइडर लगाने की योजना पर भी विचार कर रहे हैं, ताकि वाहनों को बीच सड़क पर रुकने से रोका जा सके। फ्लाईओवर के नीचे वाले रास्तों पर भी पार्किंग को पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाएगा ताकि सर्विस लेन का उपयोग सुचारू रूप से हो सके।
अप्रैल अंत तक बदलेगी तस्वीर: नागरिकों की भूमिका
प्रशासन ने इस योजना के क्रियान्वयन के लिए अप्रैल के अंत तक का समय दिया है। वर्तमान में उन इलाकों को चिह्नित करने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है जहाँ जाम की समस्या सबसे अधिक है। पटना जंक्शन, डाकबंगला चौराहा, बोरिंग रोड चौराहा, और गांधी मैदान के आसपास के इलाकों में नो-पार्किंग जोन के बोर्ड लगाने का काम शुरू होने वाला है।
हालांकि, इस योजना की सफलता केवल सरकारी विभागों के तालमेल पर नहीं, बल्कि नागरिकों के सहयोग पर भी निर्भर करती है। अक्सर लोग अपनी सुविधा के लिए दुकान के ठीक सामने या चौराहे के पास गाड़ी खड़ी कर देते हैं। प्रशासन अब ‘स्मार्ट सिटी’ के कैमरों का उपयोग कर ऐसे लोगों पर नजर रखेगा। यदि आप पटना की सड़कों पर चल रहे हैं, तो अब आपको केवल रेड लाइट का ही नहीं, बल्कि सड़क पर बने उन निशानों का भी ध्यान रखना होगा जो 150 फीट की दूरी को दर्शाते हैं।
बिना किसी ‘निष्कर्ष’ के, यह स्पष्ट है कि पटना की सड़कों पर सुशासन और बेहतर ट्रैफिक प्रबंधन के लिए यह एक अनिवार्य कदम है। 18 अप्रैल की इस घोषणा के बाद अब राजधानीवासियों को एक व्यवस्थित और रफ़्तार भरी यात्रा की उम्मीद जगी है। यदि ट्रैफिक पुलिस, नगर निगम और पथ निर्माण विभाग का यह साझा प्रयास सफल रहता है, तो पटना को जाम मुक्त बनाने का सपना हकीकत में बदल सकता है।


