प्रधानमंत्री कब तक देश को गुमराह करेंगे? तेजस्वी यादव का तीखा हमला; बिहार के शिक्षा मंत्री के ‘लड़कियों की शिक्षा’ वाले बयान पर भी मचा घमासान

पटना। बिहार की सियासत में सोमवार का दिन सोशल मीडिया पर छिड़ी जुबानी जंग के नाम रहा। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों और बयानों पर जोरदार प्रहार किया है। 11 मई 2026 की शाम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर किए गए अपने दो अलग-अलग पोस्ट में तेजस्वी यादव ने न केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली पर सवाल उठाए, बल्कि बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के एक कथित बयान को लेकर भी मोर्चा खोल दिया। तेजस्वी यादव ने अपने तीखे कटाक्ष में प्रधानमंत्री पर देशवासियों को गुमराह करने का आरोप लगाया और शिक्षा मंत्री की सोच को प्रतिगामी करार दिया। इन बयानों के बाद बिहार की राजनीति में एक बार फिर वार-पलटवार का दौर शुरू हो गया है, जहाँ विपक्ष सरकार को उसके पुराने वादों और वर्तमान दावों के बीच विरोधाभास पर घेर रहा है।

मंगलसूत्र से सोना खरीदने तक: विरोधाभासों का हिसाब

​तेजस्वी यादव ने अपने पहले पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2024 और 2026 के बयानों की तुलना करते हुए उन पर जनता को भ्रमित करने का आरोप लगाया। तेजस्वी यादव ने याद दिलाया कि 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान प्रचार करते समय प्रधानमंत्री ने जनता के बीच यह डर पैदा किया था कि यदि विपक्षी दल सत्ता में आए तो वे महिलाओं का ‘मंगलसूत्र’ तक छीन लेंगे। यह बयान उस समय राष्ट्रीय स्तर पर काफी चर्चा में रहा था और विपक्ष ने इसे ध्रुवीकरण की कोशिश बताया था।

​तेजस्वी ने अपने पोस्ट में लिखा कि वही प्रधानमंत्री अब 2026 में देशवासियों को सलाह दे रहे हैं कि वे सोना खरीदना बंद कर दें। तेजस्वी यादव ने इस पर कटाक्ष करते हुए पूछा कि प्रधानमंत्री जी के सच और झूठ के बीच का यह फासला आखिर कब खत्म होगा? उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी के बयानों का वक्त अब हिसाब कर रहा है। तेजस्वी के अनुसार, एक तरफ तो भावनात्मक मुद्दों के जरिए वोट बटोरे गए और दूसरी तरफ अब देश की आर्थिक स्थिति को देखते हुए जनता को उनकी परंपराओं और निवेश के तरीकों (सोना खरीदने) से रोका जा रहा है। तेजस्वी यादव ने सीधे शब्दों में पूछा कि ‘साहब’ आखिर कितने दिनों तक देशवासियों को इस तरह गुमराह करते रहेंगे। नेता प्रतिपक्ष का यह हमला सीधे तौर पर केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों और चुनावी रैलियों में दिए जाने वाले भाषणों की सत्यता पर सवाल खड़ा करता है।

शिक्षा मंत्री और ‘नारी शक्ति’ का विरोधाभास

​अपने दूसरे पोस्ट में तेजस्वी यादव ने बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी को निशाने पर लिया। तेजस्वी ने उन्हें ‘झाड़-फूंक वाला शिक्षा मंत्री’ संबोधित करते हुए उनके एक कथित बयान पर कड़ी आपत्ति जताई। तेजस्वी के अनुसार, मिथिलेश तिवारी ने कहा है कि भाजपा सरकार में लड़कियों को शिक्षा की जरूरत ही क्या है और उन्हें स्कूलों के बजाय घर में ही रहना चाहिए। तेजस्वी यादव ने इस बयान को बेहद खतरनाक और महिलाओं के प्रति भाजपा की संकीर्ण सोच का परिचायक बताया।

​नेता प्रतिपक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘नारी शक्ति वंदन’ के नारों और बिहार के शिक्षा मंत्री के इस रुख के बीच के विरोधाभास को उजागर किया। उन्होंने कहा कि एक तरफ प्रधानमंत्री मंचों से महिला सशक्तिकरण और नारी शक्ति के वंदन की बातें करते हैं, दूसरी तरफ उनकी ही पार्टी के शिक्षा मंत्री लड़कियों को शिक्षा से दूर रखने की वकालत कर रहे हैं। तेजस्वी यादव ने कहा कि यह केवल एक व्यक्ति का बयान नहीं है, बल्कि यह उस विचारधारा को दर्शाता है जो महिलाओं को प्रगति के पथ पर देखने के बजाय उन्हें पुरानी बेड़ियों में जकड़े रहना चाहती है। शिक्षा मंत्री के इस रुख पर सवाल उठाते हुए तेजस्वी ने पूछा कि क्या यही भाजपा का ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का असली चेहरा है।

सियासी सरगर्मी और बिहार का भविष्य

​तेजस्वी यादव के इन बयानों ने बिहार की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। 2026 के इस दौर में, जब डिजिटल इंडिया और तकनीकी प्रगति की बातें हो रही हैं, एक शिक्षा मंत्री का लड़कियों की शिक्षा पर सवाल उठाना विपक्षी खेमे के लिए एक बड़ा हथियार बन गया है। राजद समर्थकों ने तेजस्वी के इस पोस्ट को हाथों-हाथ लिया है और सोशल मीडिया पर इसे जमकर साझा किया जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तेजस्वी यादव अब प्रधानमंत्री के पुराने चुनावी भाषणों को वर्तमान की परिस्थितियों के साथ जोड़कर उन्हें ‘फैक्ट चेक’ (Fact Check) करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

​सोना खरीदने को लेकर प्रधानमंत्री के हालिया संकेतों को तेजस्वी ने मध्यम वर्ग की भावनाओं से जोड़ दिया है। भारत जैसे देश में सोना केवल धातु नहीं बल्कि सुरक्षा और सम्मान का प्रतीक है, ऐसे में तेजस्वी की यह टिप्पणी सीधे तौर पर आम जनता के साथ जुड़ने की कोशिश मानी जा रही है। वहीं, बिहार के शिक्षा मंत्री पर किया गया हमला सीधे तौर पर राज्य की आधी आबादी, यानी महिला मतदाताओं को साधने की कवायद है।

शिक्षा मंत्री के ‘झाड़-फूंक’ वाले विशेषण पर विवाद

​तेजस्वी यादव ने मिथिलेश तिवारी के लिए ‘झाड़-फूंक वाले मंत्री’ शब्द का इस्तेमाल कर उनके प्रशासनिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर भी तंज कसा है। बिहार में शिक्षा के गिरते स्तर और शिक्षकों की समस्याओं के बीच, शिक्षा मंत्री का ऐसा विवादित बयान सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकता है। तेजस्वी यादव ने अपने पोस्ट के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की है कि बिहार का शिक्षा विभाग ऐसे हाथों में है जो आधुनिक शिक्षा और लैंगिक समानता के विरोधी हैं। नेता विपक्ष ने कहा कि बिहार की बेटियों ने हर क्षेत्र में अपना परचम लहराया है, लेकिन सरकार के मंत्री उन्हें वापस घर की चारदीवारी में भेजने का सपना देख रहे हैं।

​भाजपा की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया स्पष्ट रूप से सामने नहीं आई है, लेकिन पार्टी के भीतर इस बयान को लेकर मंथन जारी है। मिथिलेश तिवारी के करीबियों का कहना है कि उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है, लेकिन तेजस्वी यादव ने जिस तरह से प्रधानमंत्री के पुराने बयानों के साथ इसे जोड़ा है, उससे यह मामला अब केवल राज्य तक सीमित नहीं रह गया है।

आगामी चुनावों और सांगठनिक मजबूती पर असर

​तेजस्वी यादव का यह हमला उनके उस सांगठनिक अभियान का हिस्सा भी माना जा रहा है जिसके तहत वे बिहार के कोने-कोने में राजद की पकड़ को फिर से मजबूत करना चाहते हैं। प्रधानमंत्री पर सीधा हमला कर वे यह साबित करना चाहते हैं कि बिहार में विपक्ष पूरी तरह सक्रिय है और वह केंद्र की नीतियों पर भी नजर रखे हुए है। 2024 के मंगलसूत्र वाले बयान को 2026 के सोने के भाव और सरकारी सलाह से जोड़ना एक सोची-समझी राजनीतिक चाल है।

​राजद के कार्यकर्ताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री ने हमेशा ही जनता को डराकर और गुमराह करके वोट लिए हैं, लेकिन अब जनता जागरूक हो रही है। तेजस्वी यादव ने अपने पोस्ट के अंत में यह साफ कर दिया कि समय सबसे बड़ा न्यायाधीश होता है और वह प्रधानमंत्री के हर वादे और हर झूठ का हिसाब जरूर करेगा। बिहार के शिक्षा मंत्री के बयान पर तेजस्वी की आक्रामकता यह भी बताती है कि आने वाले दिनों में वे शिक्षा और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सरकार को सदन से लेकर सड़क तक घेरने की तैयारी में हैं।

​कुल मिलाकर, तेजस्वी यादव के इन दो पोस्ट ने यह साफ कर दिया है कि बिहार की राजनीति अब डिजिटल युद्ध के मैदान में तब्दील हो चुकी है। प्रधानमंत्री मोदी की विश्वसनीयता और बिहार के शिक्षा मंत्री की प्रगतिशीलता—दोनों ही अब विपक्ष के निशाने पर हैं। तेजस्वी यादव के ये सवाल आने वाले दिनों में बिहार की रैलियों और भाषणों का मुख्य आधार बनेंगे। जनता के बीच इन सवालों की कितनी गूँज सुनाई देती है, यह तो आने वाला वक्त बताएगा, लेकिन फिलहाल राजद ने सरकार को बैकफुट पर धकेलने की पूरी कोशिश की है।

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