शिक्षक अभ्यर्थियों पर लाठीचार्ज के खिलाफ बिफर उठे चिराग: बताया अत्यंत ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ और ‘निंदनीय’; बोले—लोकतंत्र में युवाओं की आवाज दबाना संवेदनशीलता के विपरीत

पटना। बिहार की राजधानी पटना की सड़कों पर शिक्षक अभ्यर्थियों और पुलिस के बीच हुई हिंसक झड़प का मामला अब दिल्ली तक पहुँच गया है। लोजपा (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने पटना में बीपीएससी टीआरई 4.0 (BPSC TRE 4.0) के अभ्यर्थियों पर हुए लाठीचार्ज की कड़े शब्दों में निंदा की है। शनिवार, 09 मई 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए चिराग पासवान ने पुलिसिया कार्रवाई को अलोकतांत्रिक और संवेदनहीन बताया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि युवाओं की जायज मांगों पर लाठियां बरसाना संवाद की भावना के खिलाफ है। चिराग पासवान के इस रुख ने न केवल नई सरकार के भीतर बल्कि राज्य के राजनैतिक हलकों में भी सरगर्मी बढ़ा दी है, क्योंकि वे खुद एनडीए गठबंधन के एक महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।

लोकतंत्र में युवाओं की आवाज और पुलिस का बल प्रयोग

​चिराग पासवान ने अपने आधिकारिक पोस्ट में अभ्यर्थियों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डाला:

  • शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार: चिराग ने कहा कि बीपीएससी की शिक्षक भर्ती परीक्षा 4.0 की अधिसूचना जारी करने की मांग को लेकर अभ्यर्थी शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे।
  • अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण कार्रवाई: उन्होंने पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय करार दिया है।
  • संवैधानिक अधिकार: केंद्रीय मंत्री के अनुसार, लोकतंत्र में हर युवा को अपनी जायज मांगों को सरकार के समक्ष रखने का पूर्ण अधिकार है।

संवाद बनाम बल प्रयोग: चिराग की दो-टूक

​चिराग पासवान ने सरकार और प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि युवाओं की आवाज सुनने के बजाय उन पर बल प्रयोग करना संवेदनशीलता और संवाद की भावना के विपरीत है। उनका मानना है कि शिक्षित युवाओं के साथ इस तरह का व्यवहार समाज में नकारात्मक संदेश देता है।

​अभ्यर्थियों की मांग थी कि बीपीएससी टीआरई 4.0 का विज्ञापन जल्द से जल्द जारी किया जाए। इस मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों पर शुक्रवार को पुलिस ने उस वक्त लाठियां चटकायी थीं, जब वे गांधी मैदान के समीप अपनी आवाज बुलंद कर रहे थे। चिराग पासवान का यह बयान दर्शाता है कि एनडीए गठबंधन के भीतर भी युवाओं के रोजगार और उन पर हो रही कार्रवाई को लेकर अलग-अलग राय हो सकती है।

युवाओं के ‘मसीहा’ की छवि और राजनैतिक मायने

​चिराग पासवान हमेशा से खुद को युवाओं के नेता के रूप में पेश करते आए हैं। ऐसे में शिक्षक अभ्यर्थियों पर हुई इस कार्रवाई के खिलाफ उनका खड़ा होना उनके राजनैतिक विजन का हिस्सा माना जा रहा है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया है कि वे बल प्रयोग के बजाय अभ्यर्थियों के साथ टेबल पर बैठकर उनकी समस्याओं का समाधान निकालें।

​पटना में हुई इस घटना के बाद विपक्ष भी लगातार हमलावर है, लेकिन सत्ता पक्ष के ही एक प्रमुख नेता द्वारा लाठीचार्ज की निंदा किए जाने से प्रशासन पर दबाव काफी बढ़ गया है। अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग और राज्य सरकार इस विरोध प्रदर्शन और चिराग पासवान के बयान के बाद शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में क्या तेजी लाती है।

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