
पटना। बिहार की राजधानी पटना और इसके आसपास के इलाकों में शुक्रवार, 8 मई को आए भीषण आंधी-तूफान ने जिस तरह की तबाही मचाई, उसके जख्मों को भरने के लिए शनिवार सुबह से ही सरकारी अमला सड़कों पर उतर आया है। प्रकृति के इस रौद्र रूप के कारण शहर के तमाम प्रमुख मार्गों पर विशालकाय पेड़ जड़ से उखड़ गए, बिजली के तार टूट गए और कई जगहों पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया था। शनिवार, 9 मई को सूरज की पहली किरण के साथ ही आपदा प्रबंधन विभाग, जिला प्रशासन, पटना नगर निगम और वन विभाग की संयुक्त टीमों ने मोर्चा संभाल लिया। राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) के साथ मिलकर यह टीमें शहर की धमनियों को फिर से चलाने के लिए जद्दोजहद कर रही हैं। आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव चंद्रशेखर सिंह के सीधे पर्यवेक्षण में चल रही इस महामुहिम का मुख्य उद्देश्य जनजीवन को जल्द से जल्द पटरी पर लाना और उन अवरोधों को हटाना है जो सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक साबित हो सकते हैं। शनिवार को भी यह राहत कार्य ‘युद्धस्तर’ पर जारी रहा, जहाँ क्रेन, कटर मशीनों और सैकड़ों सफाई कर्मियों की फौज सड़कों पर मलबे से लोहा लेती नजर आई।
प्रमुख इलाकों में ‘ऑपरेशन क्लीन’: बेली रोड से हवाई अड्डे तक मुस्तैदी
तूफान का सबसे अधिक असर पटना के वीवीआईपी और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में देखने को मिला था। शनिवार की सुबह से ही राहत कार्य की प्राथमिकता उन सड़कों को दी गई जहाँ से प्रशासनिक और आपातकालीन सेवाओं का आवागमन होता है। आपदा प्रबंधन विभाग ने गायघाट, कंकड़बाग, हार्डिंग रोड, हज भवन और पटना म्यूजियम जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को चिह्नित कर वहां से गिरे हुए पेड़ों और मलबे को हटाने का काम शुरू किया।
सचिवालय और गर्दनीबाग के इलाकों में, जहाँ पुराने और विशाल पेड़ों की संख्या अधिक है, वहां एसडीआरएफ के जवानों ने विशेष कटर मशीनों का उपयोग कर टहनियों को काटा और सड़कों को साफ किया। 96 ऑफिसर्स एनक्लेव और हवाई अड्डा मार्ग पर भी स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण थी, क्योंकि वहां पेड़ों के गिरने से बिजली के खंभे भी क्षतिग्रस्त हो गए थे। बेली रोड, पुनाईचक और नेहरू पार्क के आसपास के क्षेत्रों में नगर निगम की गाड़ियां मलबे को ढोने में जुटी रहीं। प्रशासन का प्रयास है कि मुख्य सड़कों के बाद अब गलियों और मोहल्लों की सफाई पर ध्यान दिया जाए, ताकि लोगों को अपने घरों से बाहर निकलने में किसी बाधा का सामना न करना पड़े।
शीर्ष नेतृत्व की निगरानी: रत्नेश सदा और प्रत्यय अमृत का ‘एक्शन प्लान’
राहत और बचाव कार्यों की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसकी पल-पल की समीक्षा शासन के शीर्ष स्तर पर की जा रही है। आपदा प्रबंधन विभाग के मंत्री रत्नेश सदा और मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत इस पूरे अभियान की कमान संभाले हुए हैं। दोनों अधिकारियों द्वारा नियमित रूप से समीक्षा बैठकें की जा रही हैं और क्षेत्र में तैनात अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं।
मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने स्पष्ट किया है कि संसाधन की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी और हर जिले में आपदा रिस्पॉन्स टीम को सक्रिय रखा गया है। मंत्री रत्नेश सदा ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया है कि केवल पटना ही नहीं, बल्कि आंधी-तूफान से प्रभावित अन्य जिलों में भी राहत सामग्री और बचाव कार्य में तेजी लाई जाए। सचिव चंद्रशेखर सिंह खुद भी ग्राउंड जीरो से आ रही रिपोर्टों का अध्ययन कर रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि राहत कार्य केवल कागजों तक सीमित न रहे बल्कि धरातल पर आम आदमी को इसका लाभ मिले।
एसडीआरएफ और तकनीकी समन्वय: आपदा में सुरक्षा का ढाल
इस पूरे संकट के दौरान राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही है। जब सड़कों पर भारी पेड़ गिर जाते हैं या संरचनात्मक ढांचे ढह जाते हैं, तो सामान्य नगर निगम कर्मी वहां तक नहीं पहुँच पाते। ऐसे में एसडीआरएफ के प्रशिक्षित जवान अपने आधुनिक उपकरणों के साथ स्थिति को संभालते हैं। शनिवार को पटना के विभिन्न हिस्सों में एसडीआरएफ की कई टुकड़ियां तैनात रहीं, जिन्होंने न केवल मलबे को हटाया बल्कि लटकते हुए बिजली के तारों और कमजोर हो चुकी इमारतों के हिस्सों को भी सुरक्षित करने का काम किया।
वन विभाग की टीम पेड़ों की छंटाई और उनके वैज्ञानिक निस्तारण में सहयोग कर रही है, जबकि नगर निगम का ध्यान ड्रेनेज और कचरा प्रबंधन पर है। इस अंतर-विभागीय समन्वय के कारण ही 24 घंटे के भीतर पटना की अधिकांश मुख्य सड़कों पर यातायात बहाल किया जा सका है। हालांकि, नेहरू पार्क और कुछ अन्य पार्कों में अभी भी सफाई का बड़ा काम बाकी है, जहाँ भारी नुकसान की खबर है।
प्रशासन की अपील: अफवाहों से बचें और संयम बरतें
पटना जिला प्रशासन ने वर्तमान स्थिति को देखते हुए आम नागरिकों से एक विशेष अपील जारी की है। प्रशासन ने लोगों से धैर्य और संयम बनाए रखने का आग्रह किया है। अक्सर ऐसी आपदाओं के बाद सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से अफवाहें फैलने लगती हैं, जिससे समाज में डर का माहौल बनता है। जिलाधिकारी और आपदा प्रबंधन विभाग ने स्पष्ट किया है कि नागरिक केवल आधिकारिक माध्यमों से जारी सूचनाओं पर ही भरोसा करें।
नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे अभी जर्जर भवनों, बिजली के खंभों और बड़े पेड़ों के नीचे खड़े होने या वाहन पार्क करने से बचें, क्योंकि आंधी के बाद उनकी जड़ें कमजोर हो सकती हैं। प्रशासन ने यह भी कहा है कि यदि कहीं कोई बड़ा खतरा दिखे या किसी को आपातकालीन सहायता की आवश्यकता हो, तो वे प्रशासन को सहयोग प्रदान करें और सरकारी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करें।
आपातकालीन सहायता के लिए हेल्पलाइन सेवा जारी
आमजन की सुविधा और संकट के समय त्वरित सहायता प्रदान करने के लिए आपदा प्रबंधन विभाग ने राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र को 24×7 सक्रिय कर दिया है। यदि किसी क्षेत्र में अभी भी मलबे के कारण रास्ता बंद है या कोई अन्य आपातकालीन स्थिति उत्पन्न होती है, तो नागरिक निम्नलिखित नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं:
- हेल्पलाइन नंबर: 0612-2294204 / 2294205
- आपातकालीन सहायता नंबर: 1070
इन नंबरों पर प्राप्त होने वाली शिकायतों को सीधे संबंधित क्षेत्र की रिस्पॉन्स टीम को भेजा जा रहा है। सरकार की प्राथमिकता अब उन क्षेत्रों की ओर है जहाँ अभी भी बिजली आपूर्ति बाधित है या जलजमाव जैसी समस्या उत्पन्न हुई है। आने वाले एक-दो दिनों तक यह मुस्तैदी बनी रहेगी ताकि पटना फिर से अपनी पुरानी रंगत में लौट सके।
राहत और बचाव के इस महायज्ञ में प्रशासन के साथ-साथ आम नागरिकों का सहयोग भी उतना ही अनिवार्य है। सड़कों की सफाई के बाद अब चुनौती क्षतिग्रस्त सार्वजनिक संपत्तियों के पुनर्निर्माण की है, जिस पर विभाग जल्द ही एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने वाला है।
पटना की सड़कों पर चल रहा यह ‘ऑपरेशन क्लीन’ केवल मलबे की सफाई नहीं, बल्कि प्रशासनिक इच्छाशक्ति का भी परिचय है, जिसने एक प्राकृतिक आपदा के बाद महज कुछ घंटों में व्यवस्था को फिर से खड़ा कर दिया है।


