
खगड़िया/भागलपुर। भागलपुर की लाइफलाइन कहे जाने वाले विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच पैदा हुए गंभीर यातायात संकट ने अब राजनैतिक गलियारों में भी हलचल तेज कर दी है। खगड़िया लोकसभा क्षेत्र के सांसद राजेश वर्मा ने इस समस्या की गंभीरता को समझते हुए केंद्रीय रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव को एक पत्र लिखा है। इस पत्र के माध्यम से उन्होंने कोसी और सीमांचल क्षेत्र की जनता को हो रही भारी परेशानियों से अवगत कराते हुए सहरसा और कटिहार से वाया खगड़िया और मुंगेर रेल-सह-सड़क पुल होकर भागलपुर तक विशेष यात्री और एक्सप्रेस ट्रेनों के परिचालन की पुरजोर मांग की है। शनिवार, 09 मई 2026 को जारी इस प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, राजेश वर्मा ने स्पष्ट किया है कि जब तक सड़क मार्ग बहाल नहीं होता, तब तक रेलवे ही इस क्षेत्र के लाखों लोगों के लिए एकमात्र सुरक्षित और सुलभ सहारा बन सकता है। सेतु के क्षतिग्रस्त होने से जो सामाजिक और आर्थिक गतिरोध पैदा हुआ है, उसे दूर करने के लिए रेल मंत्रालय की त्वरित भूमिका अनिवार्य हो गई है।
लाइफलाइन का टूटना और कोसी-सीमांचल की घेराबंदी
राजेश वर्मा ने अपने पत्र में इस बात का विस्तार से उल्लेख किया है कि 03 मई 2026 की देर रात विक्रमशिला सेतु के एक स्लैब के अचानक गिरकर गंगा में समा जाने से पूरा कोसी-सीमांचल क्षेत्र शेष बिहार से कट गया है। विक्रमशिला सेतु केवल एक कंक्रीट का ढांचा नहीं था, बल्कि यह खगड़िया, सहरसा, कटिहार, नवगछिया पुलिस जिला, पूर्णिया, अररिया और किशनगंज जैसे जिलों को भागलपुर के व्यापारिक, शैक्षणिक और चिकित्सकीय केंद्रों से जोड़ने वाली एकमात्र प्रभावी कड़ी थी। पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद से उत्तर बिहार के इन जिलों की जनता एक प्रकार की राजनैतिक और भौगोलिक घेराबंदी का शिकार हो गई है।
सांसद ने रेखांकित किया कि खगड़िया लोकसभा क्षेत्र के लोगों का जीवन भागलपुर से अभिन्न रूप से जुड़ा हुआ है। शिक्षा के लिए छात्र तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय पर निर्भर हैं, तो गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए जेएलएनएमसीएच (मायागंज अस्पताल) ही एकमात्र बड़ा केंद्र है। इसके अलावा, भागलपुर का बड़ा व्यापारिक बाजार भी कोसी क्षेत्र के व्यापारियों के लिए मुख्य केंद्र है। आवागमन पूरी तरह ठप होने से इन सभी आवश्यक गतिविधियों पर विराम लग गया है, जिससे पूरे क्षेत्र में एक अभूतपूर्व परिवहन संकट उत्पन्न हो गया है।
रेलवे के पास है समाधान की चाबी: मुंगेर पुल का विकल्प
सांसद राजेश वर्मा ने रेल मंत्री को दिए गए पत्र में एक व्यवहारिक समाधान का सुझाव दिया है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में खगड़िया, सहरसा और कटिहार से भागलपुर के लिए कोई सीधी ट्रेन उपलब्ध नहीं है, जिसका लाभ इस संकट के समय में जनता उठा सके। चूंकि सड़क मार्ग बहाल होने में अभी लंबा समय लग सकता है, इसलिए रेलवे को वैकल्पिक मार्ग का उपयोग करना चाहिए।
राजेश वर्मा ने मांग की है कि सहरसा जंक्शन और कटिहार जंक्शन से वाया खगड़िया और मुंगेर रेल-सह-सड़क पुल होकर भागलपुर तक अविलंब एक सवारी (पैसेंजर) गाड़ी और एक एक्सप्रेस ट्रेन का परिचालन शुरू किया जाए। मुंगेर रेल पुल का उपयोग करके इन ट्रेनों को भागलपुर तक पहुँचाना तकनीकी रूप से संभव है और इससे उन लाखों लोगों को बड़ी राहत मिलेगी जो अभी जान जोखिम में डालकर नावों और जहाजों के सहारे गंगा पार कर रहे हैं। सांसद का मानना है कि रेलवे की एक छोटी सी पहल इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर ला सकती है।
शिक्षा, चिकित्सा और व्यापार पर पड़ा है गहरा असर
पत्र में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि विक्रमशिला सेतु के बाधित होने से सबसे अधिक प्रभावित छात्र-छात्राएं और मरीज हो रहे हैं। कोसी और सीमांचल क्षेत्र के हजारों छात्र प्रतिदिन भागलपुर के कोचिंग संस्थानों और कॉलेजों में जाते हैं। सेतु टूटने के बाद उनकी पढ़ाई पूरी तरह बाधित है। वहीं, गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए गंगा पार करना अब किसी चुनौती से कम नहीं है। एम्बुलेंस का पुल से न गुजर पाना जानलेवा साबित हो रहा है।
राजेश वर्मा ने रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव को बताया कि व्यापारी वर्ग भी इस संकट से त्रस्त है। माल ढुलाई पूरी तरह से बाधित होने के कारण आवश्यक वस्तुओं की किल्लत और महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। ऐसी स्थिति में, यदि सहरसा और कटिहार से भागलपुर के लिए सीधी ट्रेनें शुरू होती हैं, तो माल और यात्रियों दोनों का आवागमन सुगम हो जाएगा। यह निर्णय कोसी-सीमांचल की जनता के लिए किसी वरदान से कम नहीं होगा और रेलवे के प्रति जनता के भरोसे को और मजबूत करेगा।
क्षेत्रीय जनता की आवाज बने राजेश वर्मा
सांसद राजेश वर्मा की इस पहल को कोसी और सीमांचल की जनता ने बड़े उत्साह के साथ लिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सेतु टूटने के बाद से वे खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे थे, लेकिन सांसद द्वारा रेल मंत्री को लिखे गए इस पत्र ने उनकी उम्मीदों को फिर से जगा दिया है। राजेश वर्मा ने अपने पत्र में साफ तौर पर लिखा है कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए जनहित में यह निर्णय लेना अनिवार्य है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया है कि रेल मंत्रालय इस गंभीर स्थिति का संज्ञान लेते हुए सकारात्मक निर्णय लेगा। सांसद ने यह भी स्पष्ट किया कि वे इस मांग को लेकर रेल बोर्ड के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी के भी संपर्क में हैं और लगातार फॉलोअप ले रहे हैं। खगड़िया सांसद की इस सक्रियता ने यह संदेश दिया है कि वे संकट के समय में अपनी जनता के साथ खड़े हैं और हर संभव मंच पर उनकी आवाज उठा रहे हैं।
आवागमन बहाल होने तक रेलवे ही एकमात्र विकल्प
विक्रमशिला सेतु की मरम्मत में महीनों का समय लग सकता है, जैसा कि विशेषज्ञों के सेफ्टी ऑडिट से संकेत मिल रहे हैं। गंगा की लहरों पर निजी नावों और सरकारी जहाजों का परिचालन अपनी जगह है, लेकिन वे कभी भी एक पक्के पुल का मुकाबला नहीं कर सकते। रेलवे के पास वह क्षमता है कि वह एक साथ हजारों लोगों को सुरक्षित तरीके से उनके गंतव्य तक पहुँचा सके।
राजेश वर्मा का यह पत्र कोसी-सीमांचल की उस सामूहिक पीड़ा का प्रतिनिधित्व करता है जो पिछले 3 मई से यह क्षेत्र झेल रहा है। सहरसा-खगड़िया-मुंगेर-भागलपुर रेल मार्ग का सक्रिय उपयोग इस संकट का सबसे सटीक और वैज्ञानिक समाधान है। अब गेंद रेल मंत्रालय के पाले में है, और कोसी की जनता टकटकी लगाए अश्वनी वैष्णव के उस आदेश का इंतजार कर रही है जो उन्हें फिर से भागलपुर की धरती से जोड़ देगा। सांसद ने अंत में दोहराया कि कोसी-सीमांचल की जनता की सेवा ही उनका मूल मंत्र है और वे इस रेल परिचालन की मांग को तब तक जारी रखेंगे जब तक कि पहली ट्रेन इस मार्ग पर दौड़ना शुरू नहीं कर देती।


