
पटना, 28 मई 2026। बिहार के प्रशासनिक विन्यास के भीतर आम जनता से जुड़े सबसे संवेदनशील संभाग यानी भूमि राजस्व नेटवर्क की शुचिता को बहाल करने की दिशा में एक बहुत बड़ी दंडात्मक प्रविष्टि सामने आई है। राज्य के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने कार्यप्रणाली में घोर लापरवाही बरतने, वित्तीय अनियमितताओं के चक्रव्यूह में संलिप्त रहने, विधिक आदेशों की अवहेलना करने और भ्रष्टाचार के लूपहोल्स विनिर्मित करने के संगीन आरोपों के तहत कुल 14 अंचलाधिकारियों (CO) के विरुद्ध एक साथ प्रखर कार्रवाई की संचिका को लॉक कर दिया है।
इस सांगठनिक प्रहार के तहत दागी और लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ न केवल औपचारिक आरोप पत्र (प्रपत्र क) गठित किया गया है, बल्कि उनके विधिक सेवा इतिहास को प्रभावित करने वाले दंडात्मक कदम उठाते हुए वार्षिक वेतन वृद्धि पर रोक और पेंशन कटौती जैसे कड़े विनिर्देश निर्गत किए गए हैं। विभाग की इस औचक दबिश से सूबे के तमाम अंचल कार्यालयों के भीतरी केबिनों में पदस्थापित कनिष्ठ और वरिष्ठ राजस्व कप्तानों के बीच गहरा मनोवैज्ञानिक खौफ और प्रशासनिक हलचल लाइव मोड पर परिलक्षित हो रही है।
भ्रष्टाचार और लूपहोल्स पर जीरो टॉलरेंस का कड़ा स्टैंड: मंत्री का खुला अल्टीमेटम
राजस्व महकमे के भीतर आम रैयतों और गरीब किसानों को अपने भूमि विलेखों, दाखिल-खारिज संचिकाओं और जमाबंदी सुधार के वास्ते दफ्तरों के जो चक्कर काटने पड़ते थे, उस विसंगति को क्रैक करने के उद्देश्य से सरकार ने अपनी नीतिगत कड़ाई लाउड मोड पर सक्रिय कर दी है। विभाग की इस सामूहिक दंडात्मक कार्रवाई के विन्यासों को सार्वजनिक पटल पर साझा करते हुए राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने मीडिया काउंटरों और आधिकारिक विलेखों के समक्ष सरकार का सर्वोपरि और संतुलित स्टैंड रेखांकित किया।
राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल का आधिकारिक वक्तव्य:
”राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के भीतरी ढांचे में किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार, लिपिकीय शिथिलता और आम जनता के विलेखों को अनधिकृत रूप से लटकाकर रखने की प्रवृत्तियों पर ‘जीरो टॉलरेंस’ (शून्य सहनशीलता) की नीति पूरी कड़ाई के साथ प्रभावी संधारित रहेगी। जो भी पदाधिकारी विधिक नियमों को मलबे में तब्दील कर अपनी जेबों की तरलता बढ़ाने या भू-माफियाओं के सिंडिकेट को कूटनीतिक लाभ पहुंचाने के विन्यास में संधारित पाए जाएंगे, उनके विरुद्ध इससे भी अधिक अभेद्य दंडात्मक चक्रव्यूह एक्टिव किया जाएगा। भ्रष्ट और कामचोर पदाधिकारी आगे भी इसी प्रकार की कड़क विभागीय कार्रवाइयों का सामना करने के वास्ते पूरी तरह से तैयार रहें।”
दागी अंचलाधिकारियों के विरुद्ध निर्गत दंडात्मक कार्रवाइयों का संपूर्ण सांख्यिकीय लेआउट
विभाग के मुख्य कमान केंद्र द्वारा जारी की गई आधिकारिक केस डायरी के अनुसार, विभिन्न जिलों में तैनात रहे इन 14 अंचलाधिकारियों की कार्यप्रणाली का फॉरेंसिक और विधिक ऑडिट संधारित किया गया था, जिसमें उनके कृत्य नियमों के घोर प्रतिकूल दर्ज किए गए। इन अधिकारियों के खिलाफ की गई विधिक कार्रवाइयों की विस्तृत विवरण सूची इस प्रकार संरेखित है:
रिश्वतखोरी और वित्तीय तरलता के संगीन विलेख
- राकेश कुमार (पूर्व सीओ, पत्थरघट): पूर्व की समय सारणी के भीतर एक आम नागरिक से विधिक कार्य के एवज में अवैध वित्तीय तरलता (रिश्वत) ग्रहण करते हुए निगरानी ब्यूरो द्वारा रंगे हाथ गिरफ्तार किए जाने के विलेख की पुष्टि हुई थी। इस संगीन कदाचार को संज्ञान में लेते हुए विभाग ने उनके विरुद्ध कड़ा विभागीय आरोप पत्र गठित करने का अंतिम निर्णय विलेखबद्ध कर दिया है।
- सतीश कुमार सिंह (पूर्व सीओ, साहेबपुर कमाल): आपदा प्रबंधन के मानवीय प्रोटोकॉल और सरकारी खजाने को ठेस पहुंचाने का गंभीर आरोप। साहेबपुर कमाल अंचल के भीतर आई प्रलयंकारी बाढ़ के समयांतराल में वितरित की जाने वाली सरकारी बाढ़ राहत की वित्तीय राशि और रसद सामग्री के आवंटन में भारी प्रशासनिक अनियमितता और लूपहोल्स विनिर्मित करने के आरोप में शिकंजा कसा गया है।
वेतन वृद्धि पर ब्रेक और पेंशन कटौती का विलोपक
- अनुज कुमार (सीओ, पाटलिपुत्र): शहरी प्रक्षेत्र के भीतर अपनी कप्तानी कार्यप्रणाली में घोर शिथिलता बरतने और फाइलों के संचरण को म्यूट रखने के कारण दंडात्मक रूप से एक वार्षिक वेतन वृद्धि (One Salary Increment) को म्यूट मोड पर डालते हुए रोक लगा दी गई है।
- संजीव कुमार त्रिवेदी (पूर्व सीओ, गुरारू): भूमि राजस्व के विधिक नियमों को दरकिनार कर कतिपय भू-स्वामियों को अवैध लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से गलत ढंग से नई जमाबंदी कायम करने का संगीन कृत्य प्रमाणित हुआ। इसके प्रतिफल के रूप में विभाग ने उनकी दो वार्षिक वेतन वृद्धियों (Two Salary Increments) पर पूरी कड़ाई के साथ रोक लगा दी है।
- राकेश कुमार (पूर्व सीओ, पालीगंज): पर्यावरण शुचिता और माइनिंग नियमों के उल्लंघन का विलेख। पालीगंज क्षेत्र के भीतरी मुहानों पर संचालित हो रहे बालू के अवैध खनन प्रक्रम में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से ढिलाई बरतने और प्रशासनिक नाकेबंदी न करने के कारण दंडात्मक विन्यास के तहत एक वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने का विनिर्देश जारी हुआ है।
- राजकिशोर शर्मा (पूर्व सीओ, गोपालपुर): सेवानिवृत्ति के उपरांत भी कानून का हंटर लाइव रहने का प्रामाणिक प्रमाण। इनके सेवाकाल के दौरान पाई गई गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक विसंगतियों के कारण आगामी पांच वर्षों की लंबी समय सारणी तक उनकी कुल विधिक पेंशन राशि में से 10 प्रतिशत की प्रखर कटौती करने का दंडात्मक आदेश निर्गत किया गया है।
डिजिटल गवर्नेंस में हेरफेर और विधिक अवहेलना के मामलों की सूक्ष्म स्क्रूटनी
विभाग के तकनीकी सेल और जिला खुफिया इकाइयों के इनपुट्स के आधार पर कतिपय अंचलाधिकारियों द्वारा डिजिटल भूमि प्रणालियों और सामाजिक श्रेणियों के डेटा डंप के साथ छेड़छाड़ करने की सांख्यिकी भी दर्ज की गई थी, जिन पर विभाग ने अभेद्य विधिक घेराबंदी की है।
- पंकज कुमार (सीओ, बैकुंठपुर): बिहार सरकार की महात्वाकांक्षी ऑनलाइन डिजिटल पोर्टल प्रणाली के भीतर एक बहुत बड़ा सॉफ्टवेयर और विधिक लूपहोल तैयार करने का आरोप। इन्होंने ‘ऑनलाइन जमाबंदी पंजी’ के भीतरी डिजिटल डेटा में बिना किसी वैध भूमि विलेख, मूल साक्ष्य या कंक्रीट राजस्व रसीदों के, कतिपय भूखंडों के रकबा (जमीन का क्षेत्रफल) को अनधिकृत रूप से संवर्धित (जोड़) दिया। इस गंभीर डिजिटल हेरफेर के कारण इन पर औपचारिक आरोप पत्र गठित कर लॉक कर दिया गया है।
- रजत कुमार वर्णवाल (सीओ, गोपालगंज सदर): आम रैयतों से जुड़े सबसे मुख्य विलेख यानी दाखिल-खारिज (Mutation) प्रणालियों के भीतरी लेआउट में भारी मनमानापन बरतने का आरोप। संचिकाओं के निष्पादन के दौरान नियमों में किसी भी प्रकार की विधिक एकरूपता (Lack of Uniformity) संधारित नहीं रखी गई, जिसके कारण इनके विरुद्ध आरोप पत्र गठित करने की संचिका को मंजूरी हस्तगत कराई गई है।
- कुमारी आंचल (पूर्व सीओ, चंडी): वरिष्ठ राजस्व अदालतों और अपीलीय कमान केंद्रों के आदेशों को ठेंगा दिखाने का विलेख। भूमि विवादों के निपटारे के वास्ते सक्षम विधिक प्राधिकारियों द्वारा पारित किए गए ‘अपील वाद’ के आधिकारिक आदेशों को अपने अंचल के धरातल पर ससमय क्रियान्वित न करने और आदेश की अवहेलना करने के कारण विभागीय आरोप पत्र गठित किया गया है।
- अनिल कुमार (पूर्व सीओ, बैरिया): सामाजिक न्याय की सांख्यिकी और आरक्षण श्रेणियों के सरकारी डेटा डंप के साथ कूटनीतिक खिलवाड़ का संगीन मामला। इन्होंने विधिक प्रमाण पत्रों के सत्यापन के दौरान बैकवर्ड क्लास (BC) के आवेदकों को नियमों के विपरीत कूटनीतिक रूप से एक्सट्रीमली बैकवर्ड क्लास (EBC) के विन्यास के भीतर प्रदर्शित कर विलेख तैयार किए। इस कृत्य के पटल पर आते ही आरोप पत्र गठित किया गया है।
इसके समानांतर, सुपौल की पूर्व सीओ रहीं बुच्ची कुमारी के खिलाफ संधारित विसंगतियों को लेकर एक पूर्ण विभागीय कार्यवाही (Departmental Proceedings) संचालित करने का विधिक खाका तैयार किया गया है, जिसके तहत कनिष्ठ जांच अधिकारी साक्ष्यों का मिलान करेंगे। वहीं, एकमा के पूर्व सीओ अमलेश कुमार द्वारा अपने स्थानांतरण या ड्यूटी की नियत समय सारणी के भीतर बिना किसी विधिक पूर्व सूचना या सक्षम प्रशासनिक अवकाश के, अनधिकृत रूप से अपने कमान केबिन से गायब (अनुपस्थित) रहने के कारण अनुशासनहीनता के तहत आरोप पत्र गठित करने का विनिर्देश लॉक किया गया है।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के वरिष्ठ सचिवों को यह कड़ा विनिर्देश हस्तगत कराया गया है कि वे इन सभी गठित आरोप पत्रों की समयबद्ध ट्रैकिंग करें, ताकि स्पीडी ट्रायल विन्यास के तहत जांच को न्यूनतम समय-सीमा के भीतर तार्किक परिणति तक प्रविष्ट कराया जा सके। अंचल कार्यालयों के भीतर आम रैयतों की शिकायतों के ऑनलाइन डेटा डंप की भी दैनिक आधार पर स्क्रूटनी की जा रही है।


