पुनपुन की महिला को काम के बहाने बेचा, दो महीने बाद पुलिस ने नरक से निकाला

पुनपुन (पटना)। राजधानी पटना के ग्रामीण इलाकों में मानव तस्करी के नेटवर्क ने एक बार फिर अपनी जड़ें गहरी होने का प्रमाण दिया है। पुनपुन थाना क्षेत्र की रहने वाली एक 28 वर्षीया महिला, जो घर की कलह से तंग आकर अपनी जिंदगी संवारने की उम्मीद में बाहर निकली थी, उसे तस्करों ने जिस्मफरोशी की अंधेरी गलियों में धकेल दिया। दो महीने तक पश्चिम बंगाल के इस्लामपुर स्थित पंजीपाड़ा रेड लाइट एरिया की जंजीरों में जकड़ी इस महिला को आखिरकार पुनपुन पुलिस ने मंगलवार को सकुशल बरामद कर लिया है। यह मामला न केवल एक महिला की आपबीती है, बल्कि उन तमाम खतरों की ओर इशारा करता है जो घर छोड़कर निकलने वाली महिलाओं के इर्द-गिर्द साये की तरह मंडराते रहते हैं। पुलिस ने इस मामले में तकनीकी अनुसंधान के जरिए सफलता तो हासिल कर ली है, लेकिन इस घिनौने व्यापार के असली किरदारों की गिरफ्तारी अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

घर की कलह और 26 जनवरी की वह खौफनाक रात

​घटना की शुरुआत किसी बड़ी साजिश से नहीं, बल्कि एक सामान्य घरेलू विवाद से हुई थी। पुनपुन निवासी पीड़ित महिला का अपने पति के साथ अक्सर मनमुटाव रहता था। पुलिस और परिजनों के अनुसार, महिला पहले भी कई बार विवाद के बाद अपने मायके चली जाया करती थी। 26 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस के दिन, जब पूरा देश उत्सव में डूबा था, इस घर में एक बार फिर झगड़ा हुआ। इस बार विवाद इतना बढ़ गया कि महिला ने घर छोड़ने का फैसला कर लिया।

​महिला के पति को लगा कि हर बार की तरह वह इस बार भी गुस्से में अपने मायके चली गई होगी। इसी आशंका के कारण पति ने शुरुआती दिनों में उसकी खोजबीन करने में ज्यादा सक्रियता नहीं दिखाई। उसे लगा कि कुछ दिन बाद जब गुस्सा शांत होगा, तो वह खुद लौट आएगी या मायके से उसे लाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। लेकिन इस बार कहानी में एक भयानक मोड़ आने वाला था। महिला घर से निकलकर सीधे पटना जंक्शन पहुँच गई, जहाँ से उसकी जिंदगी का वह सफर शुरू हुआ जो उसे सीधे ‘नरक’ के द्वार तक ले गया।

पटना जंक्शन पर बिछाया गया ‘मदद’ का जाल

​पटना जंक्शन, जो हजारों यात्रियों की उम्मीदों का केंद्र है, वहां मानव तस्करों के एजेंट हमेशा शिकार की तलाश में रहते हैं। घर से भागी हुई और मानसिक रूप से परेशान महिला जब स्टेशन पर अकेली बैठी थी, तो एक अज्ञात महिला ने उसे अपनी बातों के जाल में फंसा लिया। उस अज्ञात महिला ने बड़ी ही हमदर्दी दिखाते हुए उसे अच्छी नौकरी और बेहतर जीवन दिलाने का झांसा दिया। आर्थिक तंगी और पारिवारिक कलह से जूझ रही पीड़िता को उस अजनबी महिला की बातों में एक उम्मीद नजर आई।

​वह अज्ञात महिला उसे काम दिलाने के बहाने ट्रेन में बैठाकर पश्चिम बंगाल ले गई। पीड़िता को इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि उसे नौकरी देने वाला नहीं, बल्कि उसे बेचने वाला हाथ थामे हुए है। जैसे ही वे बंगाल के इस्लामपुर स्थित पंजीपाड़ा पहुँचे, उस अज्ञात महिला ने पीड़िता को रेड लाइट एरिया के संचालकों के हवाले कर दिया। महज कुछ हजार रुपयों के लिए एक इंसान की गरिमा का सौदा कर दिया गया और पीड़िता को उन गलियों में कैद कर दिया गया जहाँ से वापसी का रास्ता लगभग बंद माना जाता है।

दो महीने का नारकीय जीवन और खामोशी का अंत

​पंजीपाड़ा के उस रेड लाइट एरिया में पीड़िता को दो महीने तक बंधक बनाकर रखा गया। वहां उसे न केवल शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया, बल्कि उसे भागने या किसी से संपर्क करने के हर रास्ते को बंद कर दिया गया। इस दौरान पटना में उसके परिजन परेशान होने लगे थे, क्योंकि जब मायके में भी उसकी मौजूदगी का पता नहीं चला, तो पति के हाथ-पांव फूल गए। उसे समझ आ चुका था कि उसकी पत्नी के साथ कोई अनहोनी हो चुकी है।

​इसी बीच, पीड़िता ने अपनी हिम्मत नहीं हारी। करीब दो महीने बीत जाने के बाद उसे किसी तरह एक मोबाइल फोन हाथ लगा। उसने बिना समय गंवाए चुपके से अपने पति और मायके वालों को फोन किया। फोन पर उसकी सिसकियाँ और वहां की लोकेशन ने परिजनों को झकझोर कर रख दिया। उसने बताया कि उसे बंगाल में बेच दिया गया है और वह एक बेहद असुरक्षित माहौल में कैद है। इस एक फोन कॉल ने दो महीने से चल रही ‘गुमशुदगी’ की गुत्थी को ‘मानव तस्करी’ के केस में तब्दील कर दिया।

बेबी कुमारी का नेतृत्व और तकनीकी अनुसंधान की सफलता

​पीड़िता के फोन आने के बाद पति ने 28 मार्च 2026 को पुनपुन थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुनपुन थानाध्यक्ष बेबी कुमारी ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तुरंत कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने सबसे पहले उस मोबाइल नंबर को सर्विलांस पर डाला जिससे पीड़िता ने फोन किया था। तकनीकी अनुसंधान और सेल टावर लोकेशन के जरिए पुलिस को यह पुख्ता जानकारी मिली कि महिला पश्चिम बंगाल के इस्लामपुर के पंजीपाड़ा इलाके में है।

​थानाध्यक्ष बेबी कुमारी के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया, जो पश्चिम बंगाल के लिए रवाना हुई। बंगाल पुलिस के सहयोग से पंजीपाड़ा रेड लाइट एरिया में सघन छापेमारी की गई। पुलिस की दबिश बढ़ते ही वहां के संचालकों में खलबली मच गई। आखिरकार, मंगलवार को पुलिस ने उस घर और कमरे का पता लगा लिया जहाँ पीड़िता को रखा गया था। उसे वहां से सकुशल बरामद कर लिया गया और पटना लाया गया। थानाध्यक्ष बेबी कुमारी ने बताया कि महिला की बरामदगी एक बड़ी कामयाबी है, क्योंकि अक्सर ऐसे मामलों में समय बीतने के साथ पीड़िता का सुराग मिलना मुश्किल हो जाता है।

गिरफ्तारी की चुनौती और तस्करों का फरार होना

​हालांकि पुलिस ने महिला को बरामद कर लिया है, लेकिन इस पूरे खेल के मुख्य सूत्रधार अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। छापेमारी के दौरान पुलिस की भनक मिलते ही रेड लाइट एरिया के संचालक और वह एजेंट महिला फरार होने में सफल रहे। पुलिस अब पीड़िता के बयान के आधार पर उस अज्ञात महिला का स्केच तैयार करने और उसका पता लगाने की कोशिश कर रही है जिसने पटना जंक्शन पर उसे जाल में फंसाया था।

​पुनपुन पुलिस का कहना है कि यह एक अंतरराज्यीय गिरोह का काम हो सकता है जो बिहार की असहाय महिलाओं को टारगेट कर उन्हें बंगाल के देह व्यापार केंद्रों में सप्लाई करता है। पुलिस अब उन नंबरों की भी जांच कर रही है जिनसे तस्करों ने आपस में संपर्क किया था। बेबी कुमारी ने स्पष्ट किया है कि भले ही अभी कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है, लेकिन पुलिस की टीमें छापेमारी जारी रखे हुए हैं और जल्द ही इस सिंडिकेट से जुड़े लोगों को सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।

पुनपुन में पसरा सन्नाटा और सामाजिक संदेश

​महिला के बरामद होने के बाद उसे उसके परिजनों को सौंपने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। दो महीने तक मौत और अपमान के साये में रही महिला अब अपने घर लौट आई है, लेकिन उसके मन पर लगे घाव शायद ही कभी भर पाएं। इस घटना ने पूरे पुनपुन इलाके में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। लोग इस बात से हैरान हैं कि कैसे एक छोटी सी घरेलू लड़ाई का फायदा उठाकर अपराधी किसी की जिंदगी तबाह कर सकते हैं।

​यह मामला उन महिलाओं के लिए भी एक चेतावनी है जो आवेश में आकर बिना सोचे-समझे घर की सुरक्षा छोड़कर बाहर निकल जाती हैं। पटना जंक्शन जैसे भीड़भाड़ वाले स्थानों पर सक्रिय ‘मददगार’ चेहरों के पीछे छिपे भेड़ियों से सावधान रहने की जरूरत है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि पुलिस को ऐसे हॉट-स्पॉट्स पर निगरानी बढ़ानी चाहिए जहाँ अकेली या परेशान दिखने वाली महिलाओं को निशाना बनाया जाता है। बेबी कुमारी ने भी अपील की है कि अगर किसी के घर की महिला या लड़की लापता होती है, तो उसे केवल घरेलू विवाद न समझें, बल्कि तुरंत पुलिस को सूचित करें ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

आगे की कानूनी प्रक्रिया और पुनर्वास

​बरामद की गई महिला का अब कोर्ट में 164 के तहत बयान दर्ज कराया जाएगा। उसके बयान के आधार पर ही इस मामले में अपहरण, मानव तस्करी और देह व्यापार की सुसंगत धाराएं जोड़ी जाएंगी। पुलिस यह भी सुनिश्चित कर रही है कि पीड़िता को उचित चिकित्सीय और मनोवैज्ञानिक परामर्श (Counselling) मिले, ताकि वह इस सदमे से बाहर आ सके।

​पश्चिम बंगाल और बिहार पुलिस के बीच बेहतर समन्वय के कारण ही यह बरामदगी संभव हो पाई है। आने वाले दिनों में पुनपुन पुलिस बंगाल पुलिस के साथ मिलकर उन ठिकानों की विस्तृत जांच करेगी जहाँ बिहार की अन्य महिलाओं के भी होने की आशंका है। 15 अप्रैल की यह बरामदगी पुनपुन पुलिस के लिए एक बड़ी प्रशासनिक जीत है, लेकिन समाज के लिए यह एक बड़ा सवाल छोड़ गई है कि हम अपने घरों के भीतर और बाहर महिलाओं के लिए कितना सुरक्षित परिवेश बना पा रहे हैं।

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