
पटना। संसद के निचले सदन लोकसभा में महिला आरक्षण बिल के गिर जाने के बाद बिहार की राजनीति में उबाल आ गया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इस घटनाक्रम को केंद्र की सत्ताधारी भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की एक सोची-समझी राजनैतिक साजिश करार दिया है। शनिवार, 18 अप्रैल 2026 को मीडिया से मुखातिब होते हुए तेजस्वी यादव ने न केवल बिल की विफलता पर केंद्र को घेरा, बल्कि आरएसएस और भाजपा के ‘दोहरे चरित्र’ पर ऐसा तंज कसा जिससे सियासी हलकों में खलबली मच गई है। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि भाजपा महिलाओं के प्रति सम्मान का केवल ढोंग करती है, जबकि उनकी असल मानसिकता पिछड़ी और दलित महिलाओं को सत्ता से दूर रखने की है। उन्होंने सीधे तौर पर कहा कि आरएसएस की संस्कृति में महिलाओं का स्थान दोयम दर्जे का रहा है। इसके साथ ही उन्होंने बिहार के नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को ‘सिलेक्टेड सीएम’ बताते हुए राज्य की आर्थिक स्थिति और बेरोजगारी के मुद्दे पर भी सरकार को कटघरे में खड़ा किया।
आरक्षण नहीं, यह ‘छलावा’ था: तेजस्वी की साजिश थ्योरी
संसद में शुक्रवार की रात जो कुछ भी हुआ, उसे तेजस्वी यादव ने एक पूर्व-निर्धारित पटकथा बताया। उन्होंने कहा कि सरकार को अच्छी तरह मालूम था कि उनके पास दो-तिहाई (2/3) बहुमत नहीं है, फिर भी वे इस बिल को लेकर आए ताकि इसे गिरवाकर विपक्ष पर दोष मढ़ा जा सके। तेजस्वी के अनुसार, इस बिल का असली मकसद महिलाओं को हक देना नहीं, बल्कि पांच राज्यों में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों में राजनैतिक लाभ लेना था।
तेजस्वी ने कहा, “यह बिल पूरी तरह से दिखावटी था। सरकार की नीयत कभी साफ नहीं रही। अगर वे वास्तव में महिलाओं को आरक्षण देना चाहते, तो विपक्ष को विश्वास में लेते और उन खामियों को दूर करते जिसकी मांग हम वर्षों से कर रहे हैं।” उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा इस बिल की आड़ में सीटों का परिसीमन कराकर लोकसभा में अपनी संख्या बढ़ाना चाहती थी और सत्ता पर एकाधिकार कायम करना चाहती थी। लेकिन विपक्ष की एकजुटता ने उनकी इस योजना को फिलहाल विफल कर दिया है। तेजस्वी ने चेतावनी दी कि पांच राज्यों की जनता इस धोखे का जवाब अपने वोट से देगी।
“पैर धुलवाने वाले आरक्षण क्या देंगे?”: आरएसएस पर सीधा प्रहार
तेजस्वी यादव ने भाजपा के मातृ संगठन आरएसएस पर हमला करते हुए उनके सामाजिक व्यवहार पर सवाल उठाए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो लोग सार्वजनिक रूप से महिलाओं से पैर धुलवाते हैं, वे महिलाओं के सशक्तिकरण की बात कैसे कर सकते हैं? उन्होंने भाजपा और संघ के नेताओं को ‘दोहरे चरित्र’ वाला बताते हुए कहा कि एक तरफ ये लोग ‘नारी शक्ति वंदन’ की बात करते हैं और दूसरी तरफ महिलाओं को प्राचीन रूढ़िवादी परंपराओं में जकड़ कर रखना चाहते हैं।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा, “आरएसएस और भाजपा सबसे बड़े महिला विरोधी हैं। इनका इतिहास गवाह है कि इन्होंने कभी भी महिलाओं को बराबरी का दर्जा नहीं दिया। ये लोग केवल चुनाव के समय नारी शक्ति का नाम जपते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि ये लोग बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा बनाए गए प्रगतिशील संविधान को बदलकर पुरानी व्यवस्था थोपना चाहते हैं।” तेजस्वी ने स्पष्ट किया कि विपक्ष संविधान की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाएगा और भाजपा के ‘अघोषित एजेंडे’ को सफल नहीं होने देगा।
‘कोटे के अंदर कोटा’: पिछड़ा वर्ग की महिलाओं की अनदेखी का आरोप
महिला आरक्षण बिल के विरोध की सबसे बड़ी वजह को उजागर करते हुए तेजस्वी यादव ने ‘कोटे के अंदर कोटे’ (OBC Reservation) की मांग को फिर से बुलंद किया। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार इस बिल में ओबीसी वर्ग की महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण सुनिश्चित क्यों नहीं कर रही है? तेजस्वी के अनुसार, बिना पिछड़ा वर्ग की भागीदारी के महिला आरक्षण केवल संभ्रांत वर्ग की महिलाओं तक सीमित रह जाएगा।
उन्होंने कहा, “अगर आपकी नीयत साफ थी, तो आपने ओबीसी महिलाओं को इसमें जगह क्यों नहीं दी? क्या पिछड़े समाज की महिलाएं देश की संसद में बैठने की हकदार नहीं हैं?” तेजस्वी ने केंद्र सरकार पर पिछड़ा वर्ग की हकमारी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह बिल दरअसल सामाजिक न्याय की अवधारणा को कमजोर करने के लिए लाया गया था। उन्होंने साफ किया कि राजद और अन्य सहयोगी दल तब तक चैन से नहीं बैठेंगे जब तक कि आरक्षण के इस प्रारूप में ‘कोटे के अंदर कोटा’ की व्यवस्था नहीं की जाती।
सम्राट चौधरी पर हमला: “सिलेक्टेड मुख्यमंत्री के पास कोई रोडमैप नहीं”
बिहार की राजनीति पर लौटते हुए तेजस्वी यादव ने नवनियुक्त मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने सम्राट चौधरी को जनता द्वारा नहीं बल्कि दिल्ली द्वारा ‘सिलेक्टेड’ मुख्यमंत्री करार दिया। मुख्यमंत्री के उस बयान पर कि ‘अधूरे काम को तेजी से आगे बढ़ाना है’, तेजस्वी ने पलटवार करते हुए पूछा कि आखिर उन्हें यह स्पष्टीकरण देने की जरूरत क्यों पड़ रही है?
तेजस्वी ने कहा, “मुख्यमंत्री को काम करके दिखाना चाहिए, न कि केवल बोलना चाहिए। चाहे शराबबंदी का मामला हो या विकास का, क्या इन्होंने कोई नया कैबिनेट फैसला लिया है? सच्चाई यह है कि यह सरकार केवल पुरानी लकीर पीट रही है।” तेजस्वी ने आरोप लगाया कि सम्राट चौधरी के पास बिहार को पिछड़ेपन से उबारने के लिए कोई ठोस रोडमैप नहीं है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री केवल बयानबाजी के जरिए जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।
खाली खजाना और ‘गुजरात-दिल्ली’ का रिमोट कंट्रोल
बिहार की आर्थिक स्थिति पर चिंता जताते हुए नेता प्रतिपक्ष ने राज्य के खजाने को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार के पास न तो नए रोजगार सृजन के लिए पैसे हैं और न ही पुरानी परियोजनाओं को पूरा करने के लिए। तेजस्वी ने कहा, “बिहार का खजाना वर्तमान में खाली है। नीति आयोग की ताजा रिपोर्ट में बिहार आज भी 30वें नंबर पर है। मुख्यमंत्री को यह बताना चाहिए कि वे बिहार को विकास के मामले में शीर्ष पांच राज्यों में कैसे लाएंगे?”
तेजस्वी ने एक और बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि बिहार की सरकार अब पटना से नहीं बल्कि गुजरात और दिल्ली से संचालित हो रही है। उन्होंने कहा, “अब तो गुजरात से सरकार चलाने की तैयारी हो रही है। इनके जो प्रिंसिपल सेक्रेटरी आ रहे हैं, वह सीधे पीएमओ से भेजे जा रहे हैं। इसका मतलब साफ है कि बिहार सरकार का रिमोट कंट्रोल दिल्ली में है।” उन्होंने आरोप लगाया कि सम्राट चौधरी केवल एक चेहरा हैं, जबकि निर्णय लेने की शक्ति बाहरी लोगों के पास है। यह बिहार की अस्मिता और स्वायत्तता पर बड़ा हमला है।
रोजगार का वादा और जमीनी हकीकत
तेजस्वी यादव ने चुनाव के दौरान भाजपा और जदयू द्वारा किए गए एक करोड़ युवाओं को रोजगार देने के वादे की याद दिलाई। उन्होंने पूछा कि आखिर वे नौकरियां कहाँ हैं? उन्होंने कहा कि राज्य के सभी जिलों में फैक्ट्रियां लगाने का वादा केवल कागजों तक सीमित रह गया है। तेजस्वी ने युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाते हुए कहा कि रोजगार के अभाव में बिहार के युवा आज भी पलायन करने को मजबूर हैं।
उन्होंने कहा कि विपक्ष सड़क से लेकर सदन तक इस मुद्दे को उठाता रहेगा। तेजस्वी के अनुसार, सरकार के पास निवेश लाने या उद्योग धंधे स्थापित करने की कोई मंशा नहीं है। वे केवल सांप्रदायिक ध्रुवीकरण और ‘दिखावटी बिलों’ के जरिए सत्ता में बने रहना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता अब जागरूक हो चुकी है और वह विकास के नाम पर दिए जा रहे इन ‘जुमलों’ को भली-भांति समझती है।
विपक्ष की अगली रणनीति और संघर्ष का संकल्प
अपने संबोधन के अंत में तेजस्वी यादव ने साफ किया कि महिला आरक्षण बिल का गिरना सरकार की नैतिक हार है। उन्होंने कहा कि विपक्ष किसी भी ऐसे कानून का समर्थन नहीं करेगा जो सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ हो। तेजस्वी ने कहा कि आने वाले समय में वे राज्य भर में दौरा करेंगे और जनता को बताएंगे कि किस तरह भाजपा ने महिलाओं और पिछड़ों के साथ धोखा किया है।
तेजस्वी ने कहा, “हम लोग हमेशा महिलाओं के असली हक के लिए लड़ते रहे हैं और लड़ते रहेंगे। हमारा संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक कि समाज के हर तबके को उसकी संख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व नहीं मिल जाता।” 18 अप्रैल की इस प्रेस वार्ता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बिहार में अब राजनैतिक मुकाबला और भी तीखा होने वाला है। तेजस्वी यादव ने जिस तरह से सम्राट चौधरी और प्रधानमंत्री मोदी को सीधे निशाने पर लिया है, उससे आने वाले विशेष सत्र और पांच राज्यों के चुनावों में राजनैतिक सरगर्मी बढ़ना तय है। बिहार की राजनीति अब एक नए मोड़ पर खड़ी है, जहाँ एक ओर ‘सत्ता का नया समीकरण’ है तो दूसरी ओर ‘विपक्ष का आक्रामक तेवर’।


