
पटना। रेलवे स्टेशन की आपाधापी, गाड़ियों की घोषणा और यात्रियों की भीड़ के बीच अक्सर भागदौड़ की तस्वीरें ही जेहन में आती हैं, लेकिन रविवार की सुबह पटना का पाटलिपुत्र रेलवे जंक्शन एक बेहद भावुक और मानवीय संवेदनाओं से भरे पल का गवाह बना। रविवार, 12 अप्रैल 2026 की सुबह जब यात्री अपनी अपनी ट्रेनों के इंतजार में प्लेटफॉर्म पर डटे थे, तभी वहां एक नई जिंदगी ने दस्तक दी। खगड़िया जा रही एक गर्भवती महिला को अचानक प्लेटफॉर्म पर ही प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। इस आपातकालीन स्थिति में रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) और राजकीय रेल पुलिस (जीआरपी) की महिला कर्मियों ने जिस संवेदनशीलता और जांबाजी का परिचय दिया, वह काबिले तारीफ है। बिना किसी अस्पताल या डॉक्टर की मौजूदगी के, प्लेटफॉर्म संख्या 02 पर महिला यात्रियों और पुलिसकर्मियों के सहयोग से एक सुरक्षित प्रसव कराया गया। जंक्शन पर जैसे ही नन्हीं बच्ची की किलकारी गूँजी, वहां मौजूद हर शख्स के चेहरे पर राहत और खुशी के भाव तैर गए। यह घटना यह दर्शाती है कि मुस्तैदी केवल अपराधियों को पकड़ने के लिए ही नहीं, बल्कि मानवता की सेवा के लिए भी कितनी आवश्यक है।
प्लेटफॉर्म संख्या-02 पर अचानक उभरी आपात स्थिति
घटनाक्रम के अनुसार, रविवार की सुबह लगभग 9:18 बजे पाटलिपुत्र जंक्शन पर सामान्य चहल-पहल थी। आरपीएफ के एएसआई प्रभात कुमार अपनी टीम के साथ प्लेटफॉर्म संख्या-02 पर गश्त कर रहे थे। उस समय गाड़ी संख्या 13206 को पास कराने की तैयारी चल रही थी और यात्रियों का जमावड़ा बढ़ रहा था। इसी दौरान ऑन ड्यूटी स्टेशन मास्टर ने पुलिस टीम को वायरलेस पर सूचना दी कि प्लेटफॉर्म के उत्तरी छोर यानी दीघा साइड स्थित फुटओवर ब्रिज के नीचे एक महिला यात्री असहनीय प्रसव पीड़ा से तड़प रही है। सूचना मिलते ही एएसआई प्रभात कुमार बिना एक पल गंवाए अपनी महिला टीम के साथ मौके की ओर दौड़े।
प्रसूता की पहचान खगड़िया जिले के अलौली थाना अंतर्गत शुम्भा राजेघाट निवासी राजा चौधरी की पत्नी खुशबू कुमारी के रूप में हुई। खुशबू अपने पति, भाई और भाभी के साथ अपने गांव जा रही थी। विडंबना यह थी कि वह अपने गांव प्रसव के लिए ही जा रही थी, ताकि अपनों के बीच बच्चे को जन्म दे सके। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। जैसे ही वह ट्रेन में चढ़ने के लिए प्लेटफॉर्म पर पहुँची, उसे अचानक तीव्र पीड़ा शुरू हो गई और वह ट्रेन में चढ़ने की स्थिति में नहीं रही। उसके परिवार वाले घबरा गए और उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि इस भीड़भाड़ वाले स्टेशन पर अब क्या किया जाए।
खाकी के भीतर छिपी ममता और जांबाजी का नजारा
स्टेशन मास्टर की सूचना पर आरपीएफ की महिला आरक्षी एकता, जीआरपी की महिला कांस्टेबल और महिला होमगार्ड के जवान तुरंत मौके पर पहुँचे। उन्होंने देखा कि महिला की स्थिति काफी नाजुक है और उसे तुरंत अस्पताल ले जाना संभव नहीं लग रहा था। ऐसी स्थिति में पुलिस टीम ने मौके पर ही ‘लेबर रूम’ जैसा माहौल तैयार करने का निर्णय लिया। वहां मौजूद कुछ अन्य महिला यात्रियों ने भी हाथ बढ़ाया। आरपीएफ और जीआरपी की महिला कर्मियों ने साड़ियों और चादरों का घेरा बनाकर एक सुरक्षित कोना तैयार किया ताकि महिला की निजता बनी रहे और उसे सुरक्षित प्रसव का वातावरण मिल सके।
महिला आरक्षी एकता और जीआरपी की महिला टीम ने बड़ी ही कुशलता और धैर्य के साथ प्रसव की प्रक्रिया को अंजाम देना शुरू किया। स्टेशन पर मौजूद अन्य यात्रियों ने भी इस दौरान मानवीयता का परिचय दिया और शोर-शराबा कम कर पुलिस की मदद की। कुछ ही मिनटों के भीतर खुशबू कुमारी ने एक बेहद स्वस्थ और सुंदर बच्ची को जन्म दिया। जैसे ही बच्ची की पहली रोने की आवाज गूँजी, प्लेटफॉर्म पर मौजूद लोगों ने तालियां बजाकर इस सुखद पल का स्वागत किया। रेल पुलिस की महिला टीम ने न केवल प्रसव कराया, बल्कि जच्चा और बच्चा को प्राथमिक देखभाल भी दी ताकि उन्हें किसी संक्रमण या समस्या का सामना न करना पड़े।
परिवार की खुशी और रेल पुलिस का मानवीय चेहरा
खुशबू के पति राजा चौधरी और उनके अन्य परिजन जो कुछ देर पहले तक बेहद डरे हुए थे, उनकी आंखों में खुशी के आंसू छलक आए। उन्होंने बताया कि वे काफी डरे हुए थे कि ट्रेन छूटने के डर और स्टेशन की भीड़ में उनकी पत्नी की जान खतरे में न पड़ जाए, लेकिन रेल पुलिस के जवानों ने मसीहा बनकर उनकी मदद की। राजा चौधरी ने रेल पुलिस और वहां मौजूद महिला यात्रियों का बार-बार आभार प्रकट किया। स्टेशन पर तैनात आरपीएफ कर्मियों ने यह सुनिश्चित किया कि परिवार को किसी प्रकार की असुविधा न हो और नवजात को तुरंत आवश्यक गर्मी और सुरक्षा मिल सके।
इस सफल और सुरक्षित प्रसव ने पाटलिपुत्र जंक्शन पर तैनात सुरक्षा बलों की छवि को जनता के बीच और अधिक ऊँचा कर दिया है। अक्सर रेल पुलिस को केवल अनुशासन और सुरक्षा के लिए जाना जाता है, लेकिन इस घटना ने उनके भीतर छिपे सेवा भाव और ममतामयी चेहरे को उजागर किया है। एएसआई प्रभात कुमार और महिला आरक्षी एकता की टीम ने साबित कर दिया कि वर्दी के भीतर एक धड़कता हुआ दिल भी होता है जो समय आने पर किसी भी जिम्मेदारी को निभाने के लिए तैयार रहता है।
बेहतर उपचार के लिए दानापुर मंडलीय अस्पताल में स्थानांतरण
प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित प्रसव के तुरंत बाद रेल प्रशासन ने एम्बुलेंस की व्यवस्था की। रेल पुलिस की देखरेख में प्रसूता खुशबू कुमारी और उनकी नवजात बच्ची को बेहतर चिकित्सा सुविधा और पोस्ट-पार्टम देखभाल के लिए मंडलीय अस्पताल, दानापुर भेजा गया। रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों को भी इस सुखद घटना की जानकारी दी गई। अस्पताल में डॉक्टरों की एक विशेष टीम ने दोनों की जांच की और उन्हें पूरी तरह से स्वस्थ घोषित किया।
डॉक्टरों के अनुसार, प्लेटफॉर्म पर जिस तरह से सुरक्षित और सामान्य प्रसव कराया गया, वह एक चुनौतीपूर्ण कार्य था, लेकिन पुलिसकर्मियों और यात्रियों की तत्परता ने इसे सफल बना दिया। फिलहाल खुशबू और उनकी बेटी दानापुर अस्पताल के वार्ड में भर्ती हैं, जहाँ उन्हें आवश्यक टीकाकरण और चिकित्सा सहायता दी जा रही है। राजा चौधरी का पूरा परिवार अस्पताल में खुशियां मना रहा है और इस अनूठी याद को अपने साथ खगड़िया ले जाने के लिए तैयार है। यह कहानी हमें सिखाती है कि आपात स्थिति में यदि धैर्य और सहयोग का हाथ बढ़ाया जाए, तो कठिन से कठिन चुनौतियों पर भी विजय पाई जा सकती है। पाटलिपुत्र जंक्शन की इस घटना की चर्चा पूरे पटना में हो रही है और लोग रेल पुलिस की इस सेवा भावना को सलाम कर रहे हैं।


