पटना मेट्रो परियोजना में तेजी के निर्देश, समयसीमा के भीतर कार्य पूरा करने पर जोर

राजधानी पटना में तेजी से बदलती परिवहन व्यवस्था के बीच पटना मेट्रो रेल परियोजना को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि पटना मेट्रो से जुड़े सभी निर्माण कार्यों को तय समयसीमा के भीतर पूरा किया जाए और गुणवत्ता के साथ किसी भी तरह का समझौता न किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि निर्माण कार्यों के दौरान आम लोगों को कम से कम परेशानी हो, इसके लिए एक व्यापक और प्रभावी ट्रैफिक प्रबंधन योजना तैयार की जाए।

सोमवार को पटना स्थित लोक सेवक आवास के ‘संकल्प’ सभागार में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने पटना मेट्रो रेल परियोजना की प्रगति का विस्तार से जायजा लिया। बैठक में परियोजना से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों ने विभिन्न कॉरिडोरों पर चल रहे निर्माण कार्यों और आगामी चरणों की तैयारी की जानकारी साझा की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने परियोजना की रफ्तार बढ़ाने, नियमित निगरानी सुनिश्चित करने और प्रत्येक चरण के लिए स्पष्ट समय-निर्धारण करने का निर्देश दिया।

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि न्यू आईएसबीटी से आकाशवाणी तक प्रस्तावित कॉरिडोर-1 तथा न्यू आईएसबीटी से मीठापुर (जगनपुरा होते हुए) तक निर्माण कार्य कई हिस्सों में जारी है। परियोजना के तहत कई स्थानों पर सिविल संरचनाओं का निर्माण, स्टेशन विकास, ट्रैक तैयारी और अन्य तकनीकी कार्य समानांतर रूप से चल रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि परियोजना के विभिन्न स्थलों पर एक साथ तेज गति से कार्य करना आवश्यक है, ताकि निर्माण में अनावश्यक देरी न हो।

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से 2 जुलाई 2026 को मलाहीपकड़ी तक मेट्रो रेल परियोजना के विस्तारीकरण के लोकार्पण का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पटना के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी। उनके अनुसार मेट्रो के इस विस्तार से शहरवासियों को दैनिक आवागमन में बड़ी राहत मिलेगी। सड़क मार्ग पर निर्भरता घटेगी, समय की बचत होगी और यात्रा पहले की तुलना में अधिक सुगम बनेगी।

उन्होंने कहा कि पटना जैसे तेजी से विकसित होते शहर के लिए आधुनिक सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था अत्यंत आवश्यक है। मेट्रो रेल केवल एक परिवहन परियोजना नहीं, बल्कि राजधानी के भविष्य को आकार देने वाली आधारभूत संरचना है। यह शहर को अधिक व्यवस्थित, सुरक्षित और आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसलिए परियोजना के क्रियान्वयन में किसी भी स्तर पर ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी।

पटना मेट्रो परियोजना में तेजी के निर्देश, समयसीमा के भीतर कार्य पूरा करने पर जोर

बैठक के दौरान ट्रैफिक प्रबंधन को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि मेट्रो निर्माण के दौरान पटना की यातायात व्यवस्था बाधित न हो, इसके लिए वैज्ञानिक और व्यावहारिक ट्रैफिक प्लान तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि शहर के विभिन्न हिस्सों में निर्माण कार्य चलने से जाम की स्थिति पैदा हो सकती है, इसलिए पहले से वैकल्पिक मार्ग, डायवर्जन योजना और यातायात नियंत्रण प्रणाली तैयार करना आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि पटना की वर्तमान ट्रैफिक व्यवस्था का व्यापक अध्ययन किया जाए। बढ़ते वाहन दबाव, संकरी सड़कों और संवेदनशील चौराहों की पहचान कर दीर्घकालिक समाधान तैयार किया जाए। उनका मानना है कि केवल अस्थायी व्यवस्था पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए स्थायी ट्रैफिक मैनेजमेंट मॉडल विकसित करना होगा।

निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर भी मुख्यमंत्री ने सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मेट्रो परियोजना जैसी बड़ी आधारभूत संरचना में सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। निर्माण क्षेत्र में कार्यरत श्रमिकों, इंजीनियरों और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। सभी निर्माण स्थलों पर बैरिकेडिंग, चेतावनी संकेत, सुरक्षा उपकरण और निगरानी व्यवस्था मजबूत रखी जाए।

मुख्यमंत्री ने निर्माण एजेंसियों और संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि परियोजना के प्रत्येक चरण के लिए स्पष्ट कार्ययोजना बनाई जाए। किस हिस्से का काम कब शुरू होगा और कब समाप्त होगा, इसका विस्तृत रोडमैप तैयार किया जाए। इससे न केवल कार्य की निगरानी आसान होगी बल्कि समयसीमा का पालन भी प्रभावी ढंग से हो सकेगा।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता किसी भी हालत में प्रभावित नहीं होनी चाहिए। यदि परियोजना को लंबे समय तक टिकाऊ और सुरक्षित बनाना है तो हर चरण में तकनीकी मानकों का कड़ाई से पालन जरूरी है। घटिया सामग्री या जल्दबाजी में किए गए कार्य भविष्य में बड़ी समस्या बन सकते हैं। इसलिए गुणवत्ता नियंत्रण की नियमित समीक्षा की जाए।

पटना मेट्रो के संचालन से राजधानी में कई सकारात्मक बदलाव आने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि मेट्रो शुरू होने के बाद सड़क यातायात का दबाव काफी हद तक कम होगा। निजी वाहनों पर निर्भरता घटेगी, जिससे ईंधन की बचत होगी और प्रदूषण स्तर में भी कमी आएगी। इसके अलावा कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों, छात्रों और व्यापारियों को तेज और समयबद्ध परिवहन सुविधा मिलेगी।

बैठक में पटना के प्रस्तावित सैटेलाइट टाउनशिप पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि सैटेलाइट टाउनशिप का मास्टर प्लान तय समयसीमा के भीतर तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि राजधानी का सुनियोजित विस्तार भविष्य की आवश्यकता है। बढ़ती आबादी और शहरी दबाव को देखते हुए नए आवासीय एवं व्यावसायिक क्षेत्रों का व्यवस्थित विकास जरूरी है।

सैटेलाइट टाउनशिप के माध्यम से पटना के आसपास नए शहरी केंद्र विकसित किए जाने की योजना है। इससे मुख्य शहर पर आबादी का दबाव कम होगा और बेहतर आवास, सड़क, जल निकासी तथा अन्य नागरिक सुविधाओं का विकास संभव हो सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए योजनाओं का निर्माण किया जाए ताकि आने वाले वर्षों में पटना आधुनिक शहरी विकास का उदाहरण बन सके।

इस समीक्षा बैठक में नगर विकास एवं आवास मंत्री , मुख्य सचिव , नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार, पटना मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक संदीप कुमार आर. पुडुकलकट्टी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों ने परियोजना की वर्तमान स्थिति और आगामी कार्ययोजना पर अपने विचार साझा किए।

पटना मेट्रो परियोजना को बिहार की सबसे महत्वपूर्ण शहरी आधारभूत परियोजनाओं में गिना जा रहा है। आने वाले महीनों में यदि कार्य निर्धारित समयसीमा के अनुसार आगे बढ़ता है तो राजधानी के परिवहन ढांचे में ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल सकता है। सरकार का फोकस स्पष्ट है—तेज निर्माण, उच्च गुणवत्ता, बेहतर ट्रैफिक प्रबंधन और समय पर परियोजना का समापन। यही चार स्तंभ पटना मेट्रो के सफल भविष्य की नींव बनेंगे।

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