पटना हाईकोर्ट को मिलेगी नई महिला कमान: न्यायमूर्ति मीनाक्षी एम राय होंगी बिहार की नई मुख्य न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट ने की अनुशंसा

पटना, 24 मई 2026। बिहार के न्यायिक और प्रशासनिक गलियारे से एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक विधिक प्रविष्टि सामने आई है। देश की सर्वोच्च अदालत के कोलेजियम ने पटना उच्च न्यायालय के मुख्य प्रशासनिक पद को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक बड़ा नीतिगत निर्णय लिया है। सिक्किम उच्च न्यायालय की वरिष्ठतम न्यायाधीश न्यायमूर्ति मीनाक्षी एम राय को पटना हाईकोर्ट का नया मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) नियुक्त करने की विधिक अनुशंसा केंद्र सरकार को प्रेषित की गई है।

​सुप्रीम कोर्ट के इस विनिर्देश के उपरांत अब केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्रालय के प्रशासनिक डेस्क से इस संदर्भ में आधिकारिक अधिसूचना (Notification) ससमय जारी की जाएगी। यह न्यायिक बदलाव पटना उच्च न्यायालय के वर्तमान मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संगम कुमार साहू के सेवानिवृत्ति विन्यास से एकीकृत संधारित है। इस शीर्ष प्रशासनिक विस्थापन के पटल पर आते ही बिहार के विधिक समाज, अधिवक्ताओं और न्यायिक अधिकारियों के सिंडिकेट के भीतर एक नए कार्यवाहक युग की सुगबुगाहट लाउड मोड पर सक्रिय हो गई है।

4 जून को सेवानिवृत्त हो रहे हैं न्यायमूर्ति संगम कुमार साहू, कानून मंत्रालय जारी करेगा अधिसूचना

​पटना उच्च न्यायालय की आंतरिक प्रशासनिक समय सारणी के अनुसार, वर्तमान मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संगम कुमार साहू आगामी 4 जून को अपने पद की विधिक गरिमा और दायित्वों से पूरी कड़ाई के साथ सेवानिवृत्त (Retire) हो रहे हैं। उनके कार्यकाल के म्यूट होने से पूर्व ही सुप्रीम कोर्ट ने संस्थागत निरंतरता को बनाए रखने के लिए अग्रिम कड़ियों को लाइन-अप कर दिया है। न्यायमूर्ति मीनाक्षी एम राय चार जून के उपरांत किसी भी नियत तिथि को राजभवन के मुख्य विंग में बिहार के राज्यपाल के समक्ष पद और गोपनीयता की विधिक शपथ ग्रहण कर कार्यभार को लाइव करेंगी।

​इस विधिक प्रक्रिया के तहत सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम की ओर से प्राप्त संचिका की स्क्रूटनी केंद्रीय कानून मंत्रालय के शीर्ष कप्तानों द्वारा मुकम्मल की जा रही है। कानून मंत्रालय के विनिर्देश पर राष्ट्रपति भवन से विधिक हस्ताक्षर होने के उपरांत वारंट ऑफ अपॉइंटमेंट (नियुक्ति पत्र) प्रचालन में लाया जाएगा। पटना उच्च न्यायालय के इतिहास में इस प्रविष्टि को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि न्यायमूर्ति मीनाक्षी एम राय के पास विभिन्न भौगोलिक प्रक्षेपों और जटिल विधिक वादों के निस्तारण का एक अत्यंत प्रखर, अभेद्य और लंबा संस्थागत अनुभव संधारित है, जो बिहार के न्यायिक विन्यास को संतुलित करने में कप्तानी भूमिका निभाएगा।

गंगटोक से दिल्ली और फिर राजभवन: न्यायमूर्ति मीनाक्षी एम राय का गौरवशाली सफर

​न्यायमूर्ति मीनाक्षी एम राय के जीवन वृत्त, शैक्षणिक पृष्ठभूमि और पारिवारिक सांख्यिकी की स्क्रूटनी करने पर एक अत्यंत प्रेरणादायी और गौरवशाली विलेख पटल पर आता है। उनका जन्म 12 जुलाई 1964 को सिक्किम की सुरम्य राजधानी गंगटोक के एक बेहद प्रतिष्ठित और प्रशासनिक परिवार के भीतर हुआ था। उनके पिता सिक्किम राज्य सरकार के प्रशासनिक ढांचे के भीतर मुख्य स्तंभ यानी गृह सचिव (Home Secretary) के विधिक पद पर अपनी सेवाएं हस्तगत करा चुके थे, जिसके कारण उन्हें बचपन से ही नियमों की शुचिता और प्रशासनिक कड़ाई का परिवेश लाइव मोड पर हस्तगत हुआ था।

​उनकी प्रारंभिक और माध्यमिक शिक्षा गंगटोक के ही शैक्षणिक संस्थानों में संधारित हुई। उन्होंने वर्ष 1980 के टाइम-स्टैम्प के भीतर दसवीं की परीक्षा प्रखरता से उत्तीर्ण की, जिसके उपरांत वर्ष 1983 में उन्होंने बारहवीं के विन्यास को सफलतापूर्वक मुकम्मल किया। उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने देश की राजधानी दिल्ली की ओर प्रस्थान किया और दिल्ली विश्वविद्यालय के सुप्रसिद्ध लेडी श्रीराम (LSR) कॉलेज के विंग में प्रविष्ट होकर राजनीति शास्त्र (Political Science) के विषय में स्नातक की डिग्री हासिल की।

​राजनीति शास्त्र की सांख्यिकी को आत्मसात करने के बाद उन्होंने विधिक प्रणालियों का विशेषज्ञ बनने के विनिर्देश पर दिल्ली विश्वविद्यालय के ही प्रतिष्ठित कैंपस लॉ सेंटर (CLC) के भीतर दाखिला लिया और कानून (LL.B.) की संचिका को सफलतापूर्वक लॉक किया। कानून की डिग्री हस्तगत होने के तुरंत बाद उन्होंने देश के सबसे बड़े विधिक मंचों यानी दिल्ली उच्च न्यायालय और माननीय सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के पटल पर एक सक्रिय अधिवक्ता के रूप में अपनी विधिक प्रैक्टिस का प्रचालन लाइव किया, जहाँ उन्होंने कई ऐतिहासिक दीवानी और फौजदारी वादों पर अपनी तार्किक कप्तानी का लोहा मनवाया।

सिक्किम की पहली महिला जज से पटना उच्च न्यायालय के कमान केंद्र तक की विधिक यात्रा

​अधिवक्ता के रूप में अपनी धाक जमाने के उपरांत न्यायमूर्ति मीनाक्षी एम राय ने न्यायिक सेवा के भीतरी प्रक्षेपों को सुदृढ़ करने का कड़ा निर्णय लिया। 11 दिसंबर 1990 को वे अपने गृह राज्य सिक्किम के न्यायिक तंत्र के भीतर प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट (Judicial Magistrate) के रूप में विधिक रूप से नियुक्त हुईं। कनिष्ठ न्यायिक अधिकारी के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने जमीनी स्तर के विवादों, भूमि विसंगतियों और सामाजिक अपराधों की केस डायरियों का सूक्ष्म और निष्पक्ष फॉरेंसिक मूल्यांकन मुकम्मल किया। उनकी कार्यकुशलता और निष्पक्ष आचरण के कारण उनका पदोन्नति ग्राफ निरंतर प्रखर होता चला गया।

​न्यायिक सेवा की विभिन्न कड़ियों को पार करते हुए 15 अप्रैल 2015 का दिन उनके करियर और सिक्किम के इतिहास में एक अभेद्य मील का पत्थर विनिर्मित हुआ। उस नियत तिथि को वे सिक्किम उच्च न्यायालय के भीतर पहली महिला न्यायाधीश (First Female Judge) के रूप में विधिक रूप से पदस्थापित की गईं। उच्च न्यायालय के जज के रूप में उन्होंने पिछले मचलते 11 वर्षों के दौरान कतिपय ऐतिहासिक विलेखों, मानवाधिकारों की रक्षा और जनहित याचिकाओं पर अत्यंत संतुलित और अभूतपूर्व फैसले जारी किए। वर्तमान समय में वे सिक्किम उच्च न्यायालय के भीतर वरिष्ठतम न्यायाधीश के विन्यास में अपनी सेवाएं लाइव रखे हुए थीं, जहां से अब उनका डाइवर्जन सीधे तौर पर बिहार के मुख्य न्यायिक केंद्र यानी पटना उच्च न्यायालय की ओर तय किया गया है।

पटना हाईकोर्ट में नए न्यायिक युग का संचरण और लंबित मुकदमों के निस्तारण की सांख्यिकी

​बिहार का पटना उच्च न्यायालय देश के सबसे बड़े और अत्यधिक कार्यबोझ वाले विधिक प्रक्षेपों में से एक संधारित किया जाता है। यहां दीवानी, फौजदारी, भूमि विवाद और रिट याचिकाओं के लंबित मुकदमों का एक बहुत बड़ा डेटा डंप सक्रिय संधारित है। न्यायमूर्ति संगम कुमार साहू के कार्यकाल के दौरान इन मुकदमों के मलबे को साफ करने और ई-कोर्ट प्रणालियों को लाइव करने की दिशा में कतिपय आक्रामक प्रयास मुकम्मल किए गए थे। अब इसी सांगठनिक गति को बरकरार रखने और कनिष्ठ अदालतों के बुनियादी ढांचे को अपग्रेड करने का मुख्य उत्तरदायित्व न्यायमूर्ति मीनाक्षी एम राय के कंधों पर डाइवर्ट होने जा रहा है।

​विधिक विश्लेषकों का मानना है कि एक महिला मुख्य न्यायाधीश के रूप में उनकी प्रविष्टि से बिहार के भीतर महिलाओं के विरूद्ध होने वाले अपराधों, पॉक्सो अधिनियम के मामलों और पारिवारिक न्यायालयों के लंबित वादों के त्वरित निष्पादन (स्पीडी ट्रायल) को एक नया विनिर्देश प्राप्त होगा। बियाडा, औद्योगिक विवादों और उत्पाद विभाग के कड़े शराबबंदी कानूनों से जुड़ी रिट याचिकाओं की सांख्यिकी पर भी उनके संतुलित दृष्टिकोण का सीधा प्रभाव परिलक्षित होना तय है।

​अधिवक्ता संघ और बार काउंसिल के कप्तानों ने सुप्रीम कोर्ट की इस अनुशंसा का स्वागत करते हुए स्पष्ट किया है कि वे नई मुख्य न्यायाधीश के न्यायिक एजेंडे और कोर्ट रूम की शुचिता को बनाए रखने में अपना पूर्ण सांगठनिक सहयोग हस्तगत कराने के लिए मुस्तैद हैं, ताकि आम मुसाफिरों और पीड़ितों को न्यूनतम समय-सीमा के भीतर पारदर्शी न्याय सुलभ कराया जा सके। कानून मंत्रालय से अधिसूचना निर्गत होने के उपरांत पटना हाईकोर्ट के मुख्य विंग के किवाड़ों पर उनके स्वागत की विधिक तैयारियां शुरू कर दी जाएंगी।

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