मोकामा में फेसबुक पोस्ट पर छिड़ा खूनी गैंगवार: सोनू-मोनू गिरोह ने विरोधी गुट पर की ताबड़तोड़ फायरिंग, सरपंच और मुखिया पति के बीच विवाद गहराया

मोकामा/पटना, 24 मई 2026। बिहार के पटना जिले के अंतर्गत आने वाले मोकामा प्रक्षेप के पचमहला थाना क्षेत्र में सोशल मीडिया के डिजिटल पटल पर शुरू हुई आंशिक छींटाकशी और वैचारिक प्रतिद्वंद्विता ने अंततः एक बेहद खौफनाक और हिंसक गैंगवार का रूप अख्तियार कर लिया है। नौरंगा जलालपुर पंचायत के दो रसूखदार पक्षों—सरपंच पति मुकेश सिंह और मुखिया पति सह अधिवक्ता प्रमोद सिंह—के बीच फेसबुक पोस्ट पर मूंछों पर ताव देने और उपहास उड़ाने को लेकर उपजा विवाद कतिपय घंटों के भीतर ही गोलीबारी के खूनी विन्यास में तब्दील हो गया।

​इलाके के कुख्यात सोनू-मोनू गिरोह के शागिर्दों ने अपनी आपराधिक सनक का परिचय देते हुए विरोधी गुट के मुकेश सिंह को निशाना बनाकर ताबड़तोड़ हवाई फायरिंग मुकम्मल की, जिससे पूरे अंचल के भीतर भारी सांगठनिक हड़कंप, अफरा-तफरी और गहरा मानसिक अवसाद छा गया। घटना की संवेदनशील इनपुट मिलते ही पचमहला थाना पुलिस की आक्रामक एसआईटी और जासूसी विंग तुरंत ग्राउंड जीरो पर मुस्तैद हुई और घटना स्थल से खोखा बरामद कर अपराधियों की धरपकड़ के लिए चौतरफा छापेमारी ग्रिड सक्रिय कर दिया है।

डिजिटल पटल पर मूंछों का ताव: क्या है फेसबुक विवाद की अंतर्निहित पटकथा

मोकामा में फेसबुक पोस्ट पर छिड़ा खूनी गैंगवार: सोनू-मोनू गिरोह ने विरोधी गुट पर की ताबड़तोड़ फायरिंग, सरपंच और मुखिया पति के बीच विवाद गहराया

​इस प्रखर और हिंसक टकराव के बुनियादी कारणों की स्क्रूटनी करने पर यह प्रामाणिक तथ्य सामने आता है कि इस विवाद की पटकथा पूरी तरह से डिजिटल रंजिश की कड़ियों से जुड़ी संधारित है। दरअसल, नौरंगा जलालपुर पंचायत के सरपंच पति मुकेश सिंह ने हाल ही में अपने फेसबुक अकाउंट पर एक व्यंग्यात्मक विलेख (पोस्ट) लाइव किया था। इस पोस्ट में उन्होंने सोनू-मोनू गिरोह के पिता सह स्थानीय अधिवक्ता प्रमोद सिंह को सीधे तौर पर निशाना बनाते हुए अपनी एक तस्वीर साझा की थी, जिसमें वे अपनी मूंछों पर ताव देकर प्रमोद सिंह की सामाजिक हैसियत का उपहास उड़ाते परिलक्षित हो रहे थे।

​मुकेश सिंह ने अपने इस डिजिटल विन्यास में पचमहला थाना पुलिस की कार्यप्रणाली की प्रखर प्रशंसा करते हुए कुख्यात सोनू-मोनू गिरोह की आपराधिक कार्यशैली पर भी तीखा तंज कसा था। सोशल मीडिया पर इस पोस्ट के वायरल होते ही प्रमोद सिंह के समर्थक और सोनू-मोनू गिरोह के कनिष्ठ शागिर्द भड़क उठे। अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा को मलबे में तब्दील होता देख और विरोधी गुट की इस आक्रामक प्रविष्टि से बौखलाए सोनू-मोनू गिरोह के शूटरों ने कानून को अपने हाथ में लेने का कड़ा विनिर्देश तय किया और मुकेश सिंह के आवासीय परिसर के मुहाने पर जा धमके।

दहक उठीं बंदूकें: सोनू और सौरभ ने की दो चक्रों की हवाई फायरिंग, खोखा जब्त

​प्रत्यक्षदर्शियों और अंचल से संकलित इनपुट्स के अनुसार, फेसबुक पोस्ट के प्रतिशोध में सोनू-मोनू गिरोह के कनिष्ठ कारिंदे अत्याधुनिक हथियारों से लैस होकर मोकामा के उस चिन्हित हॉट-स्पॉट पर प्रविष्ट हुए जहां मुकेश सिंह संधारित थे। अपराधियों ने मुकेश सिंह के मनोबल को ब्लॉक करने और अंचल के भीतर अपनी हनक को दोबारा लाइव करने के विन्यास से अचानक पिस्तौल निकाली और ताबड़तोड़ दो चक्रों की हवाई फायरिंग मुकम्मल कर दी। गोलियों की गूंज सुनते ही स्थानीय राहगीरों और मुसाफिरों के बीच भगदड़ मच गई और लोग अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित केबिनों की ओर डाइवर्ट होने लगे।

​इस घटना के तुरंत बाद पचमहला थानेदार कुंदन कुमार भारी पुलिस बल और सशस्त्र सुरक्षा दस्तों के साथ मौके पर लाइव प्रविष्ट हुए। पुलिस कप्तानों ने घटना स्थल का फॉरेंसिक निरीक्षण संधारित करते हुए वहां से प्रयुक्त गोलियों के दो खाली खोखे विधिक रूप से जब्त कर लिए हैं। पचमहला थानेदार कुंदन कुमार ने मामले के अद्यतन स्टेटस पर प्रकाश डालते हुए बताया कि फायरिंग की इस वारदात को सोनू और सौरभ नामक दो शातिर अपराधियों ने अंजाम दिया है। पुलिस ने त्वरित विधिक एक्शन लेते हुए सोनू, सौरभ और उनके पिता प्रमोद सिंह के खिलाफ जानलेवा हमला करने और आर्म्स एक्ट की सुसंगत कड़क धाराओं के तहत नामजद प्राथमिकी दर्ज करने की संचिका को लाइन-अप कर दिया है।

पुलिस की सादे लिबास में छापेमारी और न्यायालय के आदेश के उल्लंघन का बैकस्टोरी

​इस संपूर्ण खूनी रंजिश के पीछे एक और अत्यंत विवादास्पद और प्रशासनिक बैकस्टोरी संधारित पाई गई है, जिसने दोनों पक्षों के बीच बारूद सुलगाने में उत्प्रेरक का कार्य किया। विलेखों के अनुसार, कतिपय दिनों पूर्व पचमहला थाना की पुलिस सादे लिबास (सिविल ड्रेस) में अचानक अधिवक्ता प्रमोद सिंह को गिरफ्तार करने की नीयत से उनके आवास पर प्रविष्ट हुई थी। पुलिस ने जिस पुराने मामले में प्रमोद सिंह की गिरफ्तारी का प्रखर प्रयास किया था, उस मामले में सक्षम न्यायालय द्वारा पहले से ही प्रमोद सिंह की विधिक गिरफ्तारी पर कड़ा स्टे (रोक) विधारित कर लॉक किया गया था।

​न्यायालय के इस अभेद्य सुरक्षा आदेश के बावजूद, सादे कपड़ों में पहुंचे कनिष्ठ पुलिसकर्मियों ने अधिवक्ता प्रमोद सिंह को जबरन घसीटते हुए थाने लाने का प्रयास लाइव किया था। कानून के ज्ञाता होने के नाते अधिवक्ता ने पुलिसिया तानाशाही का प्रखर प्रतिकार किया और खुद को उनके चंगुल से म्यूट रखा। यह संपूर्ण विवादास्पद प्रशासनिक प्रक्रम वहां लगे तीसरी आंख यानी सीसीटीवी (CCTV) कैमरे के डिजिटल फुटेज में पूरी कड़ाई के साथ कैद हो गया था। प्रमोद सिंह के प्रतिद्वंद्वी समूह यानी मुकेश सिंह के गुट ने इस सीसीटीवी वीडियो क्लिप को कूटनीतिक रूप से डाउनलोड कर सोशल मीडिया के सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर वायरल कर दिया था, जिसे मुकेश सिंह ने अपनी मूंछों वाले फेसबुक पोस्ट के जरिए और अधिक हवा दी।

विद्वेषपूर्ण कार्रवाई का आरोप बनाम पुलिसिया कप्तानी का कड़ा स्टैंड

​मामले के पूर्ण संतुलन को बनाए रखने के उद्देश्य से जब दोनों पक्षों के विलेखों की स्क्रूटनी की गई, तो अत्यंत विरोधाभासी बयान पटल पर आए। आरोपी पक्ष के मुख्य स्तंभ सह अधिवक्ता प्रमोद सिंह ने पुलिसिया तंत्र पर गंभीर आरोप मढ़ते हुए कहा कि स्थानीय पचमहला थाना पुलिस कतिपय निहित स्वार्थों के तहत उनके विरुद्ध विद्वेषपूर्ण कार्रवाई का चक्रव्यूह रच रही है। जब माननीय न्यायालय द्वारा उनकी गिरफ्तारी पर विधिक रोक संधारित थी, तब सादे कपड़ों में पुलिस का प्रविष्ट होना और उन्हें घसीटना केवल और केवल उनकी सामाजिक और विधिक साख को अपमानित व ब्लॉक करने की एक सुगठित साजिश थी, जिसे उनके विरोधी मुकेश सिंह के इशारे पर लाइव किया गया था।

​इसके विपरीत, मोकामा पुलिस प्रशासन और पचमहला थानेदार कुंदन कुमार ने इस तर्क को पूरी तरह से रिजेक्ट करते हुए अपना कड़ा स्टैंड पटल पर रखा है। पुलिस कप्तानों का स्पष्ट कहना है कि सोनू-मोनू गिरोह लंबे समय से मोकामा और आस-पड़ोस के अंचलों में रंगदारी, अवैध सिंडिकेट संचालन और मारपीट जैसी गंभीर आपराधिक गतिविधियों में लिप्त संधारित है। सोशल मीडिया के किसी आंशिक विवाद की आड़ लेकर सरेआम बस्तियों के भीतर फायरिंग करने वाले इन तत्वों को किसी भी सूरत में विधिक रूप से बख्शा नहीं जाएगा।

​पुलिस की दो जासूसी टीमें अब सोनू और सौरभ की भौतिक अवस्थिति को ट्रेस करने के वास्ते उनके सभी संभावित ठिकानों और शरणदाताओं के विंग्स पर ताबड़तोड़ छापेमारी ग्रिड सक्रिय किए हुए हैं। पुलिस ने साफ चेतावनी दी है कि अपराधियों के साथ-साथ उन्हें पर्दे के पीछे से वित्तीय और सांगठनिक संरक्षण देने वाले सफेदपोश संरक्षकों के सर्विस रिकॉर्ड्स की भी गहन स्क्रूटनी की जाएगी और उनके विरुद्ध भी कठोर दंडात्मक संचिकाएं ससमय खोली जाएंगी ताकि अंचल की विधि-व्यवस्था पूरी तरह से अभेद्य संधारित बनी रहे।

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