ओडिशा की मुख्य सचिव अनु गर्ग ने पटना के बापू टावर का किया दौरा, गांधीजी के विचारों और चंपारण सत्याग्रह की जीवंत कलाकृतियों को सराहा

पटना, 15 मई 2026। बिहार की राजधानी पटना के गर्दनीबाग में नवनिर्मित और वास्तुकला के बेजोड़ नमूने ‘बापू टावर’ को देखने और समझने के लिए देश के विभिन्न राज्यों के उच्चाधिकारियों का आगमन निरंतर जारी है। इसी कड़ी में शुक्रवार को ओडिशा की मुख्य सचिव अनु गर्ग ने अपनी बिहार यात्रा के दौरान इस ऐतिहासिक स्मारक का विस्तृत भ्रमण किया। इस उच्चस्तरीय दौरे के दौरान उनके साथ निर्माण विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार सिंह सहित ओडिशा सरकार के कई अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य बिहार द्वारा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की स्मृतियों और उनके ऐतिहासिक आंदोलनों को सहेजने के लिए किए गए तकनीकी व ढांचागत प्रयासों को करीब से देखना था। अनु गर्ग ने बापू टावर परिसर में काफी समय बिताया और वहां स्थापित विभिन्न दीर्घाओं का अवलोकन करते हुए इसे ज्ञान, इतिहास और आधुनिक कला का एक अनूठा संगम बताया।

बापू टावर की आधुनिक वास्तुकला और चक्राकार रैम्प ने खींचा ध्यान

​भ्रमण की शुरुआत में ओडिशा की मुख्य सचिव और उनके साथ आए प्रतिनिधिमंडल ने बापू टावर के बाहरी और आंतरिक स्थापत्य कला का बारीकी से निरीक्षण किया। निर्माण विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार सिंह ने टीम को टावर के निर्माण में इस्तेमाल की गई हरित भवन तकनीक (Green Building Technology) और इसकी संरचनात्मक विशिष्टताओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। छह मंजिला इस विशाल टावर में आगंतुकों की सुगमता के लिए बनाए गए विशेष चक्राकार रैम्प (Circular Ramp) की अधिकारियों ने विशेष रूप से सराहना की।

​इस रैम्प के माध्यम से आगंतुक बिना किसी व्यावहारिक कठिनाई के क्रमिक रूप से महात्मा गांधी के जीवन के अलग-अलग कालखंडों से रूबरू हो सकते हैं। वास्तुकला के इस आधुनिक स्वरूप को देखते हुए अनु गर्ग ने कहा कि यह भवन केवल एक कंक्रीट की इमारत नहीं है, बल्कि यह अपने आप में बापू के सिद्धांतों की तरह सरल, पारदर्शी और दूरदर्शी है। भवन के निर्माण में पर्यावरण अनुकूल मानकों का पालन करना वर्तमान समय की सबसे बड़ी जरूरत है, जिसे बिहार सरकार ने इस परियोजना में बखूबी धरातल पर उतारा है।

चंपारण सत्याग्रह और बिहार के जनमानस का ऐतिहासिक जुड़ाव

​दौरे के अगले चरण में वरिष्ठ अधिकारियों का यह दल बापू टावर के भीतर स्थापित उन दीर्घाओं (Galleries) में पहुंचा, जो विशेष रूप से वर्ष 1917 के ऐतिहासिक चंपारण सत्याग्रह पर केंद्रित हैं। इन दीर्घाओं में प्रदर्शित की गई ऐतिहासिक तस्वीरों, मूल दस्तावेजों की प्रतियों और भित्ति चित्रों (Murals) के माध्यम से उस दौर के पूरे घटनाक्रम को जीवंत किया गया है। अधिकारियों ने बहुत गहराई से देखा कि किस तरह बिहार के आम किसानों और जनमानस ने महात्मा गांधी के एक आह्वान पर नील की खेती के खिलाफ ब्रिटिश हुकूमत के सामने घुटने टेकने से इनकार कर दिया था।

​चंपारण की इस पावन धरती ने कैसे एक साधारण मोहनदास करमचंद गांधी को ‘महात्मा’ के रूप में देश और दुनिया के सामने स्थापित किया, इसका पूरा ऐतिहासिक विवरण यहां बेहद तार्किक तरीके से पेश किया गया है। अनु गर्ग ने इस प्रदर्शनी को देखते हुए कहा कि बिहार के लोगों ने स्वाधीनता संग्राम में जो अद्वितीय और विधिक भूमिका निभाई थी, उसे इस टावर में बहुत ही गरिमापूर्ण और ऐतिहासिक रूप से संजोया गया है। यह इतिहास के उन पन्नों को दोबारा जीवंत करता है जिन्हें आज की पीढ़ी को जानना बेहद आवश्यक है।

अत्याधुनिक डिजिटल और ऑडियो-विजुअल माध्यमों का बेजोड़ संगम

​बापू टावर की सबसे बड़ी विशेषता इसका तकनीकी रूप से उन्नत होना है, जिसने ओडिशा के प्रशासनिक अमले को सबसे अधिक प्रभावित किया। दीर्घाओं के भीतर इतिहास को केवल चित्रों के माध्यम से नहीं, बल्कि अत्याधुनिक 3डी मैपिंग, होलोग्राम तकनीक, डिजिटल डिस्प्ले और उच्च गुणवत्ता वाले ऑडियो-विजुअल (श्रव्य-दृश्य) माध्यमों के जरिए प्रस्तुत किया गया है। महात्मा गांधी के भाषणों, उनके साबरमती आश्रम के दिनों और देशव्यापी आंदोलनों की कड़ियों को छोटी-छोटी वृत्तचित्रों (Documentaries) के रूप में दिखाया जा रहा है।

​अधिकारियों ने इन डिजिटल माध्यमों की तकनीकी शुद्धता और प्रस्तुतीकरण की शैली को पूरी तरह से बेजोड़ और अंतरराष्ट्रीय स्तर का बताया। अनु गर्ग ने रेखांकित किया कि आज की युवा पीढ़ी और स्कूली बच्चे किताबों की तुलना में डिजिटल और दृश्यात्मक माध्यमों से बहुत जल्दी सीखते हैं। इतिहास को इस तरह तकनीक के साथ जोड़कर पेश करना एक क्रांतिकारी कदम है, जिससे यहां आने वाले बच्चों और शोधार्थियों को गांधीवादी दर्शन को समझने में एक बिल्कुल नया और व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होगा।

युवाओं के लिए प्रेरणा और सामाजिक चेतना का उत्कृष्ट केंद्र

​पूरे परिसर का भ्रमण करने के बाद ओडिशा की मुख्य सचिव ने बापू टावर के महत्व को रेखांकित करते हुए इसे समाज के लिए एक बड़ा मार्गदर्शक केंद्र बताया। उन्होंने कहा कि यह परिसर केवल पर्यटन का एक केंद्र नहीं है, बल्कि यह ज्ञान, शोध और मानवीय चेतना का एक उत्कृष्ट संस्थान है। आज के इस दौर में जब दुनिया विभिन्न प्रकार के द्वंद्वों और वैचारिक मतभेदों से गुजर रही है, तब महात्मा गांधी के सत्य, अहिंसा, कौमी एकता और स्वच्छता के सामाजिक संदेशों की प्रासंगिकता कई गुना बढ़ जाती है।

​यह टावर आने वाले समय में देश भर के युवाओं के लिए एक प्रेरणा पुंज का कार्य करेगा, जो उन्हें जीवन में नैतिक मूल्यों और सामाजिक समरसता के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करेगा। ओडिशा सरकार के अधिकारियों ने माना कि इस तरह के स्मारकों का निर्माण हर राज्य में होना चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक जड़ों से हमेशा जुड़ी रहें और एक बेहतर समाज के निर्माण में अपना योगदान दे सकें।

पुष्पगुच्छ, शॉल और स्मृति चिन्ह देकर किया गया विदाई अभिनंदन

​भ्रमण कार्यक्रम के अंतिम चरण में बापू टावर प्रबंधन की ओर से अतिथि अधिकारियों के सम्मान में एक विधिक विदाई सत्र का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बापू टावर के निदेशक विनय कुमार ने ओडिशा की मुख्य सचिव अनु गर्ग और बिहार के निर्माण विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार सिंह सहित अन्य सभी वरिष्ठ पदाधिकारियों का आत्मीय स्वागत किया। निदेशक द्वारा मुख्य सचिव को पारंपरिक खादी का पुष्पगुच्छ, बिहार की हस्तशिल्प कला से निर्मित रेशमी शॉल और बापू टावर की प्रतिकृति का एक भव्य स्मृति चिन्ह भेंट कर उनका विधिवत अभिनंदन किया गया।

​ओडिशा के प्रशासनिक दल ने बिहार सरकार और बापू टावर प्रबंधन की इस गर्मजोशी और त्रुटिहीन व्यवस्था के प्रति अपना आभार व्यक्त किया। इस सफल और उच्चस्तरीय यात्रा के समापन के बाद अधिकारियों का यह दल अपने आगे के निर्धारित कार्यक्रमों के लिए रवाना हो गया, जिससे दोनों राज्यों के बीच प्रशासनिक और सांस्कृतिक अनुभवों के आदान-प्रदान को एक नया आयाम मिला है।

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